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जिला अस्पताल में नहीं सोनोलॉजिस्ट, मरीज भुगत रहे ‘अव्यवस्था की पीड़ा’ हर दिन 100 की बजा 40 की जांच

गर्भवती महिलाओं की जांच में देरी, सामान्य मरीज निजी केंद्रों पर लुटने को मजबूर, दो साल से रेडियोलॉजिस्ट का पद खाली

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कटनी

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Balmeek Pandey

May 24, 2025

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कटनी. जिला अस्पताल की स्थिति इन दिनों फिर बदहाल है। यहां आने वाले मरीजों को बीमारी से ज्यादा सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही और अनदेखी का दर्द झेलना पड़ रहा है। खासतौर पर सोनोग्रॉफी जांच को लेकर हालात बेहद गंभीर हैं। गर्भवती महिलाएं हों या अन्य गंभीर मरीज, सभी को जांच के लिए एक हफ्ते से लेकर पंद्रह दिन तक का इंतजार करना पड़ रहा है। वजह साफ है अस्पताल में वर्षों से कोई स्थायी सोनोलॉजिस्ट पदस्थ नहीं है।
जब से डॉ. आरके अठया ने मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी का पद संभाला है, तब से लेकर आज तक जिले में किसी भी रेडियोलॉजिस्ट की नियमित नियुक्ति नहीं हुई। करीब दो साल से यह स्थिति जस की तस बनी हुई है। इस बीच जरूरतें बढ़ी हैं, मरीजों की संख्या बढ़ी है, लेकिन जांच व्यवस्था वहीं ठप है।

इन डॉक्टरों के भरोसे चल रही सोनोग्रॉफी सेवा

स्थिति ऐसी है कि मेडिकल कॉलेज जबलपुर से पोस्ट ग्रेजुएट कर रहे छात्र तीन महीने की इंटर्नशिप के तहत कटनी अस्पताल भेजे जाते हैं। इन्हीं से सोनोग्रॉफी की जिम्मेदारी निभाई जा रही है। इन डॉक्टरों को न तो पर्याप्त अनुभव होता है और न ही वे नियमित उपलब्ध रहते हैं। अक्सर अवकाश या छुट्टी पर रहने के कारण जांचें और भी प्रभावित होती हैं।

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मरीजों की बढ़ती पीड़ा, समाधान की नहीं सुध

हर दिन अस्पताल में 80 से 100 मरीजों को डॉक्टर सोनोग्रॉफी की सलाह देते हैं, लेकिन जांच हो पाती है केवल 40 से 45 की। सबसे अधिक सोनोग्रॉफी गर्भवती महिलाओं की होती हैं, जो प्रसव से पहले की नियमित जांच के लिए आती हैं। सामान्य मरीज या तो इंतजार करते हैं या फिर मजबूरी में निजी जांच केंद्रों का रुख करते हैं, जहां उन्हें अधिक शुल्क चुकाना पड़ता है।

जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की बेरुखी

यह समस्या कोई नई नहीं है। वर्षों से जिला अस्पताल सोनोलॉजिस्ट के अभाव से जूझ रहा है, लेकिन न स्वास्थ्य विभाग, न जिला प्रशासन और न ही जनप्रतिनिधियों ने इस मुद्दे पर गंभीरता दिखाई है। नतीजतन आम लोगों को इलाज से पहले जांच के लिए ही संघर्ष करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में सोनोग्रॉफी जैसी महत्वपूर्ण जांच सुविधा का हाल बताता है कि स्वास्थ्य व्यवस्था किस हद तक लापरवाह हो चुकी है। गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों की जान के साथ यह खिलवाड़ है, जिसे अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जरूरत है कि शासन-प्रशासन इस ओर शीघ्र संज्ञान लेकर स्थायी समाधान सुनिश्चित करे।

सीएस ने कही यह बात

डॉ. यशवंत वर्मा, सिविल सर्जन ने कहा कि जिला अस्पताल में स्थायी रेडियोलॉजिस्ट की पदस्थापना नहीं हैं। इंटर्नशिप वाले डॉक्टरों द्वारा सोनाग्रॉफी की जा रही है। हालांकि प्रतिदिन 40 से 45 सोनोग्रॉफी हो रहीं हैं। रेडियोलॉजिस्ट का पद रिक्त होने की जानकारी शासन को भेजी गई है।