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शहर के बैंकों ने नहीं फाइनेंस किए होमलोन अब आवास बैंक भोपाल को दिया काम, एचडीएफसी, आइसीआइसीआइ व एसबीआइ बैंक ने की मनमानी

नगर निगम द्वारा शहर में दो स्थानों पर प्रधानमंत्री आवास बनवाए जा रहे हैं। झिंझरी और प्रेमनगर में काम चल रहा है, लेकिन दोनों ही स्थानों पर काम की गति बेहद धीमी है। इनके पीछे की मुख्य वजह राशि की अनुपलब्धता व ठेकेदारों द्वारा लेटलतीफी करना है।

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कटनी

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Balmeek Pandey

Jan 20, 2020

Katni's banks are not doing loan section of PM awas

Katni's banks are not doing loan section of PM awas

कटनी. नगर निगम द्वारा शहर में दो स्थानों पर प्रधानमंत्री आवास बनवाए जा रहे हैं। झिंझरी और प्रेमनगर में काम चल रहा है, लेकिन दोनों ही स्थानों पर काम की गति बेहद धीमी है। इनके पीछे की मुख्य वजह राशि की अनुपलब्धता व ठेकेदारों द्वारा लेटलतीफी करना है। नगर निगम द्वारा आवास के लिए राशि जुटाने बैंक में हितग्राहियों के ऋण प्रकरण स्वीकृत कराने केस भेजे गए, लेकिन जानकर ताज्जुब होगा कि शहर के तीन प्रमुख बैंकों ने लोन पास नहीं किए। कभी आय प्रमाणपत्र तो कभी अन्य वजहों से मामले को तीन माह से अटकाया जा रहा है। नगर निगम द्वारा आइसीआइसीआइ बैंक में 181 ऋण प्रकरण, एचडीएफसी में 86 व स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में 225 प्रकरण भेजे गए। लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि एक भी प्रकरण तीनों बैंकों ने स्वीकृत नहीं किए। प्रकरण स्वीकृत करने तीन बार कलेक्टर एसबी सिंह, आयुक्त आरपी सिंह ने बैंकर्स की बैठक ली, इसके बाद भी कोई प्रगति नहीं आई। बैंकों के ढुलमुल रवैया के चलते अब नगर निगम ने नया रास्ता अख्तियार किया है। आवास भोपाल से संपर्क कर बैंक ऋण स्वीकृत कराने प्रक्रिया शुरू की गई है।

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यह है निर्माण की स्थिति
झिंझरी में बन रहे प्रधानमंत्री आवास (एएचपी) का काम 27 मार्च 18 से शुरू होकर 30 मई 2019 को पूरा कर देना था। इसमें इडब्ल्यएस के 792, एलआइजी 384 व एमआइजी के 336 आवास बनने हैं। नगर निगम की 117.46 करोड़ रुपये वाली योजना का काम अभी भी धीमी गति से चल रहा है, जबकि समय सीमा समाप्त हो गई है। यहां पर बीआरपी एसोसिएट द्वारा किया जा रहा है। इसी तरह द्वितीय चरण प्रेमनगर में 2800 आवास बनने हैं। इसमें इडब्ल्यूएस 1744 और एलआइजी के 1056 आवास हैं। यहां पर 205.53 करोड़ की लागत से कल्याण टोल इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड द्वारा काम किया जा रहा है। 1436 निर्माणाधीन हैं। उनमें से एमआइएस अटचमेंट 500 से अधिक हो गए हैं।

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खास-खास:
- दो साल से लेकर अब तक यहां पर दो हजार से अधिक हितग्राहियों द्वारा 20 हजार रुपये जमा किए गए हैं।
- 20 हजार हितग्राही को प्रथम किश्त जमा कराई गई है एक लाख 80 हजार बैंक से फाइनेंस कराया जा रहा है।
- किराये का मकान लेने के साथ किश्त जमा करने के लिए भी हितग्राहियों को सता रही चिंता, अभी तक एक भी आवास का नहीं हुआ आवंटन।
- बगैर आवास बने ही नगर निगम ने लॉटरी सिस्टम से आवासों को कर दिया है आवंटित, हितग्राही काट रहे चक्कर।

इनका कहना है
प्रधानमंत्री आवास के लिए चयनित शहर के तीनों बैंक आइसीआइसीआइ, एचडीएफसी व एसबीआइ द्वारा ऋण स्वीकृत करने में रुचि नहीं दिखाई जा रही। अबतक एक भी प्रकरण स्वीकृत नहीं हुए। काम रुकने के कारण दिक्कत आ रही है। आवास बैंक भोपाल से ऋण स्वीकृत कराने पहल शुरू की गई है।
शैलेंद्र शुक्ला, अधीक्षण यंत्री।

एग्रीमेंट के आधार पर प्रक्रिया जारी है। ऋण प्रकरणों में बैंक, उपभोक्ता और नगर निगम की भागीदारी होनी है, स्वीकृति के लिए ऊपर भेजा गया है। 10 दिनों स्वीकृत हो जाएंगे। बैंक अपने नियमों के अनुसार ही काम करती है। साथ ही आय आवश्यक रूप से देखी जा रही है ताकि उपभोक्ता ऋण अदा कर सके।
संजय श्रीवास्तव, प्रबंधक एसबीआइ।