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मां के पेट में थीं तब उठ गया था पिता का साया, बेटी ने लेफ्टिनेंट बनकर बढ़ाया मान

Katni's daughter became a lieutenant officer

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कटनी

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Balmeek Pandey

Sep 29, 2024

Katni's daughter became a lieutenant officer

Katni's daughter became a lieutenant officer

भारतीय सेना में अधिकारी बनने की पाई अद्वितीय सफलता, स्कूल से लेकर भारतीय सेना तक का सफर है रोचक

कटनी. एक ऐसी बेटी जब वह मां की कोख में थी, तब एक हादसे में पिता की मौत हो गई थी। 7 जुलाई 1999 को गौतम बंधवा राजीव गांधी वार्ड निवासी पिता प्रमोद उपाध्याय का निधन हो गया, बेटी 30 सितंबर 1999 को जन्मी। इस बेटी ने पिता का साया उठ जाने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और भाई के साथ मां का ध्यान रखते हुए सफलता का झंडा गाड़ा है। लेफ्टिनेंट बनकर शहर का मान बढ़ाया है। लेफ्टिनेंट रितिका उपाध्याय ने अपने दृढ़ संकल्प और कठिन परिश्रम से भारतीय सेना में अधिकारी बनने का सपना साकार किया। रितिका का सफर कटनी के बार्डस्ले स्कूल से शुरू हुआ और उन्होंने ओरिएंटल कॉलेज, भोपाल से स्नातक की पढ़ाई की। 7 सितंबर 2024 को चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी से 11 महीने की कड़ी ट्रेनिंग के बाद रितिका भारतीय सेना की अधिकारी बनीं। भाई ऋषि ने बताया कि ट्रेनिंग के बाद बहन ने पदभार संभाला है।

नौसेना से सेना तक का सफर
रितिका की इस सफलता की यात्रा इतनी आसान नहीं थी। इससे पहले, उनका चयन भारतीय नौसेना अकादमी में हुआ था, लेकिन उनका मन सेना में शामिल होने का था। इसलिए, नौसेना में एक महीने की सेवा के बाद, उन्होंने अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी चेन्नई में चयनित होने के बाद नौसेना छोड़ दी और भारतीय सेना में शामिल हो गईं। यह निर्णय उनके दृढ़ निश्चय और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण को दर्शाता है। चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में 11 महीने की कड़ी और चुनौतीपूर्ण ट्रेनिंग के बाद, रितिका ने अपने परिवार, खासकर अपनी मां नीलम उपाध्याय और भाई ऋषि का सपना साकार किया। यह ट्रेनिंग सिर्फ शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन रितिका ने इसे पूरी मेहनत और लगन से पूरा किया।


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बचपन की प्रेरणा, मां और भाई का साथ
रितिका का बचपन उनकी मां और भाई के साथ बीता। मां की प्रेरणा और भाई के साथ ने हमेशा रितिका को आगे बढऩे के लिए प्रोत्साहित किया। उनकी मां ने हमेशा से रितिका को कड़ी मेहनत करने और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। रितिका की इस कामयाबी ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे शहर का नाम रोशन किया है। उनकी मां और भाई के लिए यह गर्व का क्षण है, जिन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया। रितिका की यह सफलता उन तमाम बेटियों के लिए एक प्रेरणा है, जो बड़े सपने देखती हैं और उन्हें पूरा करने की हिम्मत रखती हैं।

बेटी की सफलता, परिवार और समाज की प्रेरणा
लेफ्टिनेंट रितिका उपाध्याय का यह सफर दिखाता है कि कैसे एक बेटी अपनी मेहनत और साहस से न सिर्फ अपने सपनों को पूरा कर सकती है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा बन सकती है। उनकी यह उपलब्धि हर उस लडक़ी के लिए एक संदेश है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं है। बता दें कि इनकी मां नीलम उपाध्यक्ष रेलवे बुकिंग कार्यालय में पदस्थ हैं।