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एलपीजी किल्लत के बीच राहतभरा कदम, दशकों बाद शहर में हजारों परिवारों को मिलेगा केरोसीन

शहर के 19204 परिवारों को मिलेगा केरोसिन, प्रति परिवार 1 लीटर वितरण का लक्ष्य, गांवों के लिए सामने आई बड़ी विसंगति, जिले को मिला आवंटन, कंपनी निर्धारण के लिए चल रही प्रक्रिया

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कटनी

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Balmeek Pandey

Mar 30, 2026

Kerosene to Benefit Thousands of Families

Kerosene to Benefit Thousands of Families

बालमीक पांडेय@ कटनी. एलपीजी गैस की लगातार बढ़ती दिक्कतों और आपूर्ति में आ रही दिक्कतों के बीच सरकार ने शहरी उपभोक्ताओं को आंशिक राहत देने के लिए एक बार फिर केरोसिन (मिट्टी का तेल) वितरण शुरू करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में आदेश जारी होने के बाद खाद्य विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कटनी शहरी क्षेत्र में कुल 19,204 परिवारों को केरोसिन वितरित किया जाएगा।Kerosene to Benefit Thousands of Families
खाद्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार फिलहाल प्रति परिवार 1 लीटर केरोसिन देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, ताकि आपात स्थिति में लोग इसका उपयोग कर भोजन बना सकें। विभाग द्वारा जिले को कुल 19,204 लीटर केरोसिन का आवंटन किया जा चुका है। अब वितरण के लिए संबंधित कंपनी का चयन किया जा रहा है, जिसके बाद पीडीएस (राशन दुकानों) के माध्यम से उपभोक्ताओं तक केरोसिन पहुंचाया जाएगा।

गैस संकट से जूझ रहे उपभोक्ता

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे तनाव, विशेष रूप से अमेरिका और ईरान के बीच टकराव के कारण एलपीजी गैस की आपूर्ति, कीमतों और आपूर्ति पर असर पड़ा है। इसका सीधा प्रभाव आम उपभोक्ताओं पर दिखाई दे रहा है। कटनी शहर में स्थिति यह है कि गैस सिलेंडर की बुकिंग के बाद भी 10 से 15 दिन तक उपभोक्ताओं को इंतजार करना पड़ रहा है। गैस एजेंसियों और गोदामों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं, जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

राहत या फिर औपचारिकता

हालांकि सरकार के इस निर्णय को राहत के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन प्रति परिवार केवल 1 लीटर केरोसिन वितरण को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। विशेषज्ञों और उपभोक्ताओं का मानना है कि इतनी कम मात्रा में केरोसिन से एक परिवार में मुश्किल से 2-3 दिन ही भोजन बन पाएगा। खाद्य विभाग का कहना है कि वितरण प्रक्रिया को जल्द शुरू करने के लिए सभी तैयारियां अंतिम चरण में हैं। वहीं उपभोक्ताओं को उम्मीद है कि सरकार भविष्य में केरोसिन की मात्रा बढ़ाने या गैस आपूर्ति में सुधार के लिए ठोस कदम उठाएगी। कटनी में केरोसिन वितरण की यह पहल फिलहाल राहत का एक छोटा प्रयास जरूर है, लेकिन बढ़ती महंगाई और गैस संकट के बीच यह व्यवस्था कितनी कारगर साबित होगी, यह आने वाला समय ही बताएगा।

ज्वलनशील पदार्थों के अवैध भंडारण पर खाद्य विभाग की चेतावनी

खाद्य विभाग ने नागरिकों को पेट्रोल और डीजल जैसे ज्वलनशील पदार्थों का घर, गोदाम या व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अवैध भंडारण न करने की सख्त सलाह दी है। विभाग का कहना है कि इस प्रकार का भंडारण कभी भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है, जिससे जनहानि और संपत्ति का भारी नुकसान हो सकता है। खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में आवश्यक जांच की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई भी की जा सकती है। नागरिकों से कहा कि सुरक्षा मानकों का पालन करें और किसी भी तरह के जोखिम से बचें।

ग्रामीणों के लिए नहीं प्रावधान

एक ओर जहां सरकार शहर में एलपीजी गैस की बढ़ती समस्या को लेकर केरोसीन देने का निर्णय लिया तो वहीं ग्रामीणों से तौबा किया है, जबकि पूर्व में ग्रामीणों को भी मिट्टी का तेल मिलता था। पूर्व में हुई जंगलों की अंधाधुंध कटाई के कारण अब ग्रामीणों को पर्याप्त मात्रा में जलाऊ लकड़ी भी नहीं मिल रही है। अधिकांश ग्रामीण परिवार उज्जवला गैस सिलेंडर पर ही आश्रित हैं। ग्रामीणों को आस है कि उनके लिए भी प्रति परिवार एक माह में कम से कम 5 लीटर केरोसीन का प्रावधान किया जाए। वहीं दूसरी ओर गोपाल कम होने के कारण पर्याप्त मात्रा में कंडे भी नहीं बन पा रहे हैं।

शहर में बढ़ी जलाऊ लकड़ी की बिक्री

जबसे शहर में गैस सिलेंडर को लेकर समस्या बढ़ी है तबसे न सिर्फ होटल-रेस्टारेंट का कारोबार प्रभावित हुआ बल्कि घरों में भी खाना बनाने के लिए संकट आ बना है। लोग सिलेंडर पाने जद्दोजहद तो कर रहे हैं साथ ही अब वैकल्पिक व्यवस्था से काम चल रहे हैं। शहर में अब जलाऊ लकड़ी की भी आवक बढ़ गई हैं। मजदूर महिलाएं व पुरुष ग्रामीण इलाकों से ट्रेन, बस, ऑटो आदि के माध्यम से लकड़ी लाकर बेच रहे हैं। लोग लकड़ी-कंडा के माध्यम से भी खाना बनाने लगे हैं।

इनका कहना है

जिले के 19 हजार 204 परिवारों को केरोसीन वितरित किया जाएगा। प्रति परिवार 1 लीटर वितरण होगा। आवंटन प्राप्त हो गया है। वितरण के लिए कंपनी तय की जाना है।

पीयूष शुक्ला, सहायक खाद्य आपूर्ति अधिकारी।