
Lack of doctors in district hospital
कटनी. जिला अस्पताल में कटनी के अलावा आसपास से लगे चार अन्य जिलों के कई गांवों का भार है। सरकार ने सुविधाओं में बढ़ोत्तरी की है लेकिन मुठ्ठी भर विशेषज्ञों व स्टॉफ के भरोसे सैकड़ों लोगों को इलाज हो रहा है। पिछले कई साल से रोगों के विशेषज्ञों की कमी बनी हुई है तो नर्सिग स्टॉफ से लेकर मशीनों से जांच करने वालों तक की कमी बनी हुई है। हालत यह है कि जरूरत पडऩे पर पीडि़तों का इलाज करने की बजाय उन्हें जबलपुर मेडीकल कॉलेज रेफर करना पड़ता है। जिला अस्पताल मेंं कटनी के अलावा सतना, पन्ना, दमोह, उमरिया जिले से भी मरीज गंभीर हालत में पहुंचते हैं।
१५० बिस्तरों की बढ़ी संख्या
पूर्व में जिला अस्पताल में २०० बेड की सुविधा थी, जिसे बढ़ाकर ३५० कर दिया गया है। उस अनुपात में स्टॉफ व विशेषज्ञ नहीं बढ़ाए गए हैं। वर्तमान स्थिति के अनुसार विशेषज्ञों के ३३ पद स्वीकृत हैं और उनमें से मात्र १० डॉक्टरों की ही पदस्थापना है। स्थिति यह है कि स्त्री रोग विशेषज्ञ के स्वीकृत चार पदों में एक की भी स्थापना नहीं है तो शिशु रोग के लिए ७ के स्थान पर मात्र दो पद ही भरे हैं। दो की जगह एकमात्र रेडियोलाजिस्ट की पदस्थापना से सैकड़ों लोग एक्सरे आदि कराने परेशान होते हैं। इसके अलावा चिकित्सा अधिकारियों के भी स्वीकृत २० पदों में से ५ पद रिक्त पड़े हुए हैं।
ट्रामा यूनिट सेंटर में नहीं एक भी पदस्थापना
जिला अस्पताल को ट्रामा यूनिट सेंटर की सौगात दी गई है। करोड़ों रुपये की लागत से बनी यूनिट में शासन के नियमानुसार विशेषज्ञों से लेकर लैब टेक्निशियन, ड्रेसर, वार्डवाय, सफाई कर्मचारी तक के ६० पद की स्वीकृति है। ट्रामा यूनिट की स्थापना के बाद से अभी तक एक भी पद पर शासन ने पदस्थापना नहीं की है, जिसके चलते उसका संचालन ही नहीं हो पा रहा है। आकस्मिक ओपीडी के सहारे ही काम चल रहा है।
नर्सिंग स्टॉफ की भी कमी
अस्पताल में मरीजों की देखरेख के लिए नर्सिंग स्टॉफ की भी पर्याप्त पदस्थापना नहीं है। ३५० बेड के अस्पताल के हिसाब से नर्सिग अधीक्षक, मेट्रन, नर्सिग सिस्टर, नर्सिंग ब्रदर, स्टॉफ नर्स, एलएचव्ही, एएनएम के १७० पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में शासन से मात्र ७५ के स्टॉफ की पदस्थापना है और ९५ पद महीनों से रिक्त पड़े हैं। ऐसे में वार्डों व आकस्मिक चिकित्सा में परेशानी आ रही है।
सिविल सर्जन ही संभाल रहे पद
जिला अस्पताल में पदस्थ सिविल सर्जन डॉ. एसके शर्मा मेडीकल स्पेशलिस्ट हैं। कुछ माह पूर्व ही उनको सीएस का पद मिला है और उनके अलावा कोई भी मेडीकल स्पेशलिस्ट नहीं है। ऐसे में प्रशासकीय कार्य के साथ ही डॉ. शर्मा खुद ही सुबह से तीन घंटे मरीज देखते हैं। उनको कुछ दिन पूर्व सीएमएचओ का भी प्रभार दे दिया था, जिसे उन्होंने छोड़ दिया।
रोजाना पहुंचते हैं ७०० के मरीज
जिला अस्पताल में जिले के अलावा दूसरे स्थानों से रोजाना औसतन ७०० के लगभग मरीज पहुंचते हैं। शुक्रवार की दोपहर तक ही ५८७ मरीज जांच कराने पहुंचे थे तो २१ जून को ६०७, २० जून को ६७१, १९ को ६३४ और १८ जून को ७८१ मरीजों ने जांच कराई थी। ऐसी ही स्थिति रोज बनती है और लोगों को डॉक्टरों की कमी के कारण परेशान होना होता है। इसके अलावा रोजाना १५० से २०० लोग मरीज खून आदि की जांच कराने पहुंचते हैं तो
औसतन ७० लोग एक्सरे कराने पहुंचते हैं। विशेषज्ञों की कमी से उन्हें भी जूझना पड़ता है।
खास बातें-
- ३५० बिस्तरों की सुविधा का है अस्पताल
- विशेषज्ञों के ३३ में से मात्र १० पद ही भरे
- महिला रोग विशेषज्ञों की नहीं पदस्थापना
- शिशु रोग में सात में मात्र दो विशेषज्ञ
- मेडीकल अधिकारियों के पांच पद रिक्त
- प्रतिदिन ६०० से ७०० मरीज पहुंचते हैं जांच कराने
- नर्सिंग स्टॉफ के ९५ पद पड़े खाली
इनका कहना है...
अस्पताल में विशेषज्ञों व स्टॉफ की कमी है। उपलब्ध स्टॉफ के साथ ही बेहतर तरीके से स्वास्थ्य सेवाएं देने का प्रयास किया जा रहा है। डॉक्टरों व अन्य स्टाफ की कमी को लेकर वरिष्ठ कार्यालयों से लगातार पत्राचार किया जा रहा है।
डॉ. एसके शर्मा, सिविल सर्जन, जिला चिकित्सालय
Published on:
23 Jun 2018 12:04 pm
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