
Dial 100 attacks on the soldier
कटनी. कभी जिन छोटी-छोटी विवाद की बातों को लोग नजर अंदाज कर देते थे, अब उन्हीं बातों को लेकर लोग हिंसक हो रहे हैं। कहीं मवेशी के खेत में घुसने के विवाद पर लोग हत्या जैसे अपराध को अंजाम दे रहे हैं तो छेड़छाड़ व प्रेम प्रसंग के मामूली विवाद भी हत्या करा रहे हैं। पिछले छह माह की स्थिति पर नजर डालें तो जिले में नौ लोगों की हत्याएं हुई हैं और इतने ही हत्या के प्रयास के मामले दर्ज हुए। जिसमें से अधिकांश मामले मामूली विवाद के रहे हैं।
पांच माह में हर माह चार हत्याएं
पिछले साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति खराब रही है। वर्ष 2018 में जिले में 32 हत्या के मामले सामने आए और 22 मामलों में व्यक्ति को मरणान्नसन स्थिति में छोड़ दिया गया, जिसपर पुलिस ने हत्या के प्रयास का मामला आरोपियों पर दर्ज किया। पिछले साल पांच माह ऐसे रहे हैं, जिनमें हर माह चार के लगभग हत्याएं हुई हैं। इसमें मार्च में पांच, अगस्त, सितंबर, अक्टूबर व नवंबर माह में चार-चार हत्या के मामले जिले में दर्ज हुए।
केस-01
12 जून को बड़वारा थाना के मगरहेटा में जंगल में एक मवेशी चराने वाले युवक राधेलाल का शव मिला था। पुलिस ने मामले की जांच की और आरोपी प्रेमिका को पकड़ा। मामले में प्रेमिका ने प्रेमी से मिलने से इंकार किया था और युवक ने विवाद किया। महिला ने कुल्हाड़ी से उसकी हत्या कर दी थी।
केस-02
11 जुलाई को एनकेजे थाना क्षेत्र के प्रेमनगर में बन रहे पीएम आवास में ईंट बनाने वाले मिक्सर में छत्तीसगढ़ निवासी मजदूर बुधकुमार का शव हत्या कर फेंका गया था। मामले में सामने आया कि महिला से छेड़छाड़ के चलते उसके साथ ही काम करने वाले दो युवकों ने उसे मौत के घाट उतारा था।
केस-03
22 जुलाई को बड़वारा थाना क्षेत्र के पिपरियाकला में तुलसा यादव नामक महिला से उसके देवर का खेत में बकरी चराने को लेकर विवाद हुआ। विवाद बढ़ा तो देवर हिंसक हो गया और उसने भाभी के सिर पर लाठियों से वार कर दिया। महिला की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।
पुलिस का साइबर क्राइम पर फोकस, पुलिसकर्मियों को इस तरह करेंगे अपडेट...पढि़ए खबर
- क्रोध सभी समस्याओं की जड़ है। क्षणिक गुस्से में बड़े-बड़े कांड हो जाते हैं। आज आदमी को चाहिए कि छोटे-छोटे विवादों को नजरअंदाज करे। जिले में होने वाले पुलिस के जनसंवाद कार्यक्रमों में भी हम लोगों से इस तरह के मामलों में शांति का परिचय देने समझाइश दे रहे हैं।
ललित शाक्यवार, पुलिस अधीक्षक
एक्सपर्ट व्यू...
धैर्य शक्ति हो रही कम-
लोगों के नैतिक मूल्यों का पतन हो रहा है और जीवन शैली में लगातार हो रहे परिवर्तन से धैर्य शक्ति कम हो रही है। उसी का नतीजा के आदमी भागदौड़ की जिंदगी में सिर्फ अपने परिवार को ही महत्व देता है और ऐसे में छोटे-छोटे विवाद बड़ा रूप ले रहे हैं। अक्रामक होने के दौरान उसे खुद ज्ञान नहीं रहता है कि वह क्या कर रहा है। उसका ज्ञान बाद में होता है।
डॉ. रत्नेश कुरारिया, मनोचिकित्सक
Published on:
03 Aug 2019 11:30 am
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