बालमीक पांडेय @ कटनी. गरीबों को सस्ते दर पर मकान उपलब्ध कराने में एक बड़ा खेल सामने आया है। गरीबों के मकानों को चौकीदार, स्थानीय वर्चस्व रखने वाले लोगों ने भाड़े पर दे दिया है। इस पूरे खेल में नगर निगम के अफसरों की भी मिलीभगत सामने आई है। नगर निगम द्वारा 13 साल पहले 2007 में 2921 लाख रुपये से इंटीग्रेटेड हाउसिंग एंड स्लम डेवलपमेंट प्रोग्राम (आएचएसडीपी) योजना शुरू की। दो साल के अंदर एक हजार 119 गरीबों को आवास मुहैया कराना था, लेकिन अबतक नगर निगम एक हजार आवासों का निर्माण ही करा पाई है। जानकर ताज्जुब होगा कि आवंटन अभी तक ठीक ढंग से 50 फीसदी हितग्राहियों को भी नहीं हुआ है। इतना ही नहीं हर बस्ती में 60 से 70 मकान चौकीदार व स्थानीय बाहुबलियों द्वारा एक हजार से लेकर 2 हजार रुपये प्रतिमाह किराये पर दिए गए हैं। इसका खुलासा शनिवार को पत्रिका द्वारा की गई पड़ताल में हुआ। पत्रिका ने प्रेमनगर बस्ती में जाकर आवास में रह रहे लोगों से हकीकत जानी तो नगर निगम की बेपरवाही खुलकर सामने आई। नोडल अधिकारी सहित प्रभारी अधिकारियों की बेपरवाही से मनमानी का खेल जारी है।
चौकीदार, ठेकेदार व स्थानीय लोगों का वर्चस्व
गरीबों के मकान पर चौकीदार, ठेकेदार व स्थानीय लोगों का वर्चस्व बना हुआ है। हितग्राहियों को आवास मुहैया हो जाए इसके लिए न तो नगर निगम पहल कर रही और ना ही जिला प्रशासन। महापौर और पार्षदों को मानो इस समस्या से कोई सरोकार ही नहीं। बस्तियों के हालात ऐसे हैं कि चौकीदार, ठेकेदार व स्थानीय दबंग व्यक्तियों भवनों को किराये पर देकर अवैध वसूली की जा रही है। प्रेमनगर के लोगों ने बताया कि शायरा, महेश, प्रहलाद सिंह, अनिल सहित अन्य लोगों द्वारा किराये पर मकान दिलाए जा रहे हैं। डाइट के पास बने कई आवासों को चौकीदार द्वारा किराये पर दिया गया है।
यहां-यहां बने हैं मकान
– प्रेमनगर अयोध्या बस्ती एनकेजे
– डाइट भवन के पास एनकेजे
– सरला नगर पहरुआ मंडी के आगे
– इंद्रानगर पहरुआ मंडी के आगे
– पडऱवारा माधवनगर
– अमकुही कटाये घाट के आगे
यह है किराये के आवासों की स्थिति
स्थान किराये से
प्रेमनगर 26
सरलानगर 42
इंद्रानगर 29
डाइड 18
पडऱवारा 38
खास-खास:
– दो लाख रुपये में एक हितग्राही को देना था पक्का मकान, 72 हजार रुपये शासन की ग्रांट है, शेष राशि हितग्राही को देना है।
– ठेकेदार गुणवत्ता विहीन निर्माण, समयावधि में निर्माण नहीं किए, इस पर नगर निगम ने कोई कार्रवाई कही।
– ठेकेदार एके बिल्डर्स को सिर्फ किया ब्लैक लिस्टेड, एमआइसी ने सिर्फ समयावधि बढाती रही।
– पडऱवारा में अधिकांश कब्जाधारी रह रहे हैं, इंद्रानगर सरलानर में बर्तन करोबारी कब्जा जमाए हुए हैं।
– 1772 भवनों का होना था आवंटन, 1465 का पहले चरण में किया था शामिल, 500 लोगों ने ही आवंटन प्राप्त किया।
– 965 हितग्राही ऐसे थे कि तीन बार नोटिस देने के बाद भी नहीं लिया आवंटन, 900 से अधिक आवास लेने से कर चुके हैं इन्कार।
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इन आठ ठेकेदारों ने किया बंटाढार
– एके बिल्डर्स, चारों बस्ती
– धनरास कंस्ट्रक्शन सरलानगर
– प्रगति इंडिया कंस्ट्रक्शन पडऱवारा
– आरआर कंस्ट्रक्शन
– एसएन खंपरिया चार जगह
– सुरेंद्र तिवारी अमकुही
– मनीष उपाध्याय राधेकृष्ण कंस्ट्रक्शन
– आशीष जार पे्रमनगर
यह है गरीबों की छत के हालात
केस 01
आरती विश्वकर्मा प्रेमनगर स्थित आइएचएसडीपी के 13 नंबर ब्लॉक में कई माह से रह परिवार के साथ रही हैं। सीमा नामक महिला द्वारा 1500 रुपये हर माह किराये पर मकान दिया गया है। महीना होते ही सीमा वसूली करके चली जाती है।
केस 02
पानी की टंकी के पीछे अयोध्या बस्ती में बने आएचएसडीपी योजना के आवास नंबर 14 को मुन्नी यादव द्वारा 1600 रुपये किराये पर दे दिया गया है। एक व्यक्ति कुछ दिन पहले गृहप्रवेश कर कहीं चला गया है और उसमें उसका ताला लगा हुआ है।
केस 03
प्रेमनगर के 36 नंबर ब्लॉक पर स्वाति विश्वकर्मा द्वारा किराये पर मकान को लिया गया है। स्वाति ने बताया कि स्थानीय निवासी महेश निषाद द्वारा एक हजार रुपये भाड़े पर दिया गया है। अभी एक माह ही हुए है। ऐसे यहां पर अधिकांश लोग रह रहे हैं।
केस 04
प्रेमनगर निवासी संदीप जायसवाल चार साल पहले 20 हजार रुपये आवास के लिए नगर निगम में राशि जमा कर चुका है। 14 हजार रुपये की रसीद कटी और 6 हजार रुपये बैंक में जमा किए। निगम कर्मी आशीष बिलैया ने सिर्फ आश्वासन दिया, लेकिन आवास अबतक नहीं मिला। शायरा, सीमा, मुन्नी सहित अन्य लोगों द्वारा आवास किराये पर दिए गए हैं।
इनका कहना है
नगर निगम के आवासों को किराये पर उठा देने की जानकारी नहीं है। मैं बाहर हूं। लौटकर इसकी जांच कराई जाएगी। हितग्राही को आवास आवंटित किए जाएं इस पर पहल करेंगे।
आरपी सिंह, आयुक्त, नगर निगम।
यह बहुत ही गंभीर विषय है। इसपर आयुक्त व कलेक्टर से चर्चा करेंगे। इसकी तत्काल जांच कराएंगे। दोषियों पर कार्रवाई होगी। जो आवास तैयार हो गए हैं उन्हें हितग्राहियों को आवंटित किया जाएगा।
राजेश बहुगुणा, संभागायुक्त।