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Video: अजब-गजब नगर निगम का कारनामा: आपने कहीं नहीं देखा होगा इस तरह से लाखों लोगों की जिंगदी के साथ खिलावाड़

जल जीवनदाता है, इसीलिए कहा भी गया है कि 'जल ही जीवन है। मनुष्य के लिए शरीर का संतुलन बनाए रखने शुद्ध पानी आवश्यक है, लेकिन आपको जानकर ताज्जबु होगा कि पिछले 15 वर्षों से शहरवासियों को नगर निगम द्वारा शहर की लगभग 3 लाख जनता को शुद्ध पानी पिलाने का दावा जो किया जा रहा है वह सवालों में है।

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Balmeek Pandey

Nov 26, 2019

बालमीक पांडेय @ कटनी. जल जीवनदाता है, इसीलिए कहा भी गया है कि ‘जल ही जीवन है। मनुष्य के लिए शरीर का संतुलन बनाए रखने शुद्ध पानी आवश्यक है, लेकिन आपको जानकर ताज्जबु होगा कि पिछले 15 वर्षों से शहरवासियों को नगर निगम द्वारा शहर की लगभग 3 लाख जनता को शुद्ध पानी पिलाने का दावा जो किया जा रहा है वह सवालों में है। क्योंकि पिछले डेढ़ दशक से नगर निगम के पास केमिस्ट ही नहीं है। कटायेघाट जलसोधन केंद्र में अप्रशिक्षित कर्मचारियों के भरोसे ही एलम लिक्डिवड और ब्लीचिंग पाउडर मिलाकर पेयजल की सप्लाई प्रतिदिन की जा रही है। नगर निगम कटनी लाखों लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर रही है। शुद्ध और साफ जल का मतलब है वह मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक अशुद्धियों और रोग पैदा करने वाले जीवाणुओं से मुक्त होना चाहिए वरना यह हमारे पीने के काम नहीं आ सकता है, लेकिन ऐसा कुछ भी होता नहीं दिख रहा।

 

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26 एमएलडी पानी की सप्लाई
शहर के लोग जिस पानी को पी रहे हैं, उसमें कौन सा तत्व अधिक है और किस चीज की कमी है, इसकी जानकारी के लोग पानी पी रहे हैं। नगर निगम के पास शुद्धता के नाम पर सिर्फ लिक्विड और ब्लीचिंग पाउडर ही उपलब्ध है, जिसके माध्यम से अंदाज से पानी को पीने योग्य बनाकर लोगों के घरों तक भेजा जा रहा है। ऐसे में लोगों के घरों तक पहुंचने वाला पानी कितना शुद्ध है, इसकी कोई गारंटी नहीं है। बहुत आवश्यकता पडऩे पर निगम पीएचइ की लैब का सहयोग लेता है। शहर में प्रतिदिन 26 से 27 एमएलडी पानी की सप्लाई होती है। वर्तमान में कुछ वार्डों को छोड़कर दोनों समय पानी दिया जा रहा है, उसमें सबसे ज्यादा कटायेघाट एनीकट का सहारा लिया जाता है।

 

Nagar Nigam katni is purifying water supply without chemist
balmeek pandey IMAGE CREDIT: patrika

ये है जल सोधन केंद्र के हालात
पत्रिका ने सोमवार को जल सोधन केंद्र की पड़ताल की तो बड़ी लापरवाही सामने आई। कहने को तो यहा तीन शिफ्टों में 24 कर्मचारी नगर निगम के मुस्तैद हैं, लेकिन एक भी कर्मचारी नहीं मिला। 20 एमएलडी पेयजल का सोधन मशीनें चालू थीं और अंदाज से चल रहा था। केमिस्ट के नाम पर राजकुमार तिवारी सब इंजीनियर को रखा गया है। जो पीएचइ सप्ताह में कभी-कभार सेम्पिलिंग कराते हैं। यहां तक कि पुराने कर्मचारी होने के नाते अधिकारी इन्हें तजुर्बेदार मानते हुए केमिस्ट समझ बैठी है। यहां पर एलम पीएसीएल लिक्विड, ब्लीचिंग पाउडर मिलाकर ही काम चलाया जा रहा है। गंदे पानी होने पर एलम बढ़ा दिया जाता है और कैल्शियम ऑक्साइड मिला देते हैं।

 

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पूर्व कलेक्टर ने कराई थी व्यवस्था
नगर निगम की लैब में पानी की शुद्धता की जांच को लेकर पूर्व कलेक्टर विशेष गढ़पाले ने केमिस्ट की व्यवस्था कराई थी। जिसमें पीएचइ के केमिस्ट को सप्ताह में दो दिन नगर निगम में सेवाएं देना तय किया गया था। कुछ दिन व्यवस्था चलने के बाद सुविधा बंद हो अब तो सिर्फ सेम्पलिंग के सप्ताह व एक पखवाड़े में औपचारिकता हो रही है7

 

Nagar Nigam purifying water supply without chemist
balmeek pandey IMAGE CREDIT: patrika

25 हजार से अधिक नल कनेक्शन
शहर में लोगों के घरों तक पानी पहुंचाने के लिए नगर निगम द्वारा अमृत योजना प्रोजेक्ट के माध्यम से पाइप लाइन बिछाने और नल कनेक्शन देने का कार्य कराया जा रहा है। अभी तक शहर में नल कनेक्शनों की संख्या 25 हजार पहुंच गई है। छह हजार उपभोक्ताओं की राशि जमा होनी है। उसके बाद उनको भी पानी उपलब्ध कराया जाएगा। महापौर नल जल योजना से गरीब परिवारों को भी सस्ते दाम में निगम कनेक्शन उपलब्ध कराने की योजना है जो मंथर गति से चल रही है।

 

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खास-खास:
– शहर के 44 हजार परिवारों को पिलाया जा रहा पानी, 2 लाख 30 हजार लोगों को रजिस्टर्ड पानी दे रहा निगम।
– शहर में नलकूपों के पानी की कभी नहीं होता जांच, हैंडपंपों में दवा डालने की भी जहमत नहीं उठाते अधिकारी।
– केन और पैकेट में बिकने वाले पानी की शुद्धता की भी नहीं होती जांच, मनमाने तरीके से सिंगल यूज प्लास्टिक व डिब्बों में हो रही सप्लाई।
– 24 कर्मचारी हैं मुस्तैद, दो इंटेकवेल में दो-दो कर्मचारी, दो-दो कर्मचारी फिल्टर में पंप ऑपरेटर, फिल्टर ऑपरेटर काम कर रहे हैं।

दूषित जल से होने वाले रोग
विषाणु द्वारा- पीलिया, पोलियो, गैस्ट्रो इंटराइटिस, जुकाम, संक्रामक यकृत शोथ, चेचक।
जीवाणु द्वारा- अतिसार, पेचिस, मियादी बुखार, अतिज्वर, हैजा, कुकुर खांसी, सूजाक, उपदंश, जठरांत्र शोथ, प्रवाहिका, क्षय रोग।
प्रोटोजोआ द्वारा- पायरिया, पेचिस, निद्रारोग, मलेरिया, अमिबियोसिस रूग्णता, जियार्डियोसिस रूग्णता।
कृमि द्वारा- फाइलेरियाए हाइडेटिड सिस्ट रोग व पेट में विभिन्न प्रकार के कृमि का आ जाना जिसका स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

एक्सपर्ट व्यू:
इस पूरे मामले को लेकर सिविल सर्जन डॉ. एसके शर्मा का कहना है स्वस्थ जीवन के लिए स्वच्छ जल बेहद आवश्यक है। दूषित पानी पीने से पेट, लीवर व गुर्दा खराब हो जाता है। गैसटाइटिश, एन्ट्राइटिश, लीवर में पीलिया, ज्वाइडिश, नेफ्राइटिस, हिपाटाइटिश सहित अन्य गंभीर संक्रमण होते हैं। इसलिए लोगों को शुद्ध पानी पीना चाहिए। केन और पैकेट वाले पानी की भी बगैर जांच कराए सेवन नहीं करना चाहिए।

 

Municipal Corporation is purifying water supply without chemist
balmeek pandey IMAGE CREDIT: patrika

सुरक्षा में भारी चूक
पत्रिका टीम जल सोधन केंद्र में सोमवार की दोपहर एक बजकर 56 मिनट पर पहुंची, तो नगर निगम की गंभीर लापरवाही सामने आई। सोधन यंत्र के मुख्य द्वार पर ताला नहीं लगा था। टीम तलघरे सहित प्रथम तल में चल रहे जल सोधन के कार्य को देखा। वहां पर बड़ी-बड़ी मशीनें चल रही थी, जल सोधन हो रहा था, लेकिन एक भी कर्मचारी नहीं मिला। जबकि टीम 15 मिनट तक केंद्र में रही। ऐसे में यदि कोई बदमाश यहां पर आकर कुछ गड़बड़ी कर दे तो लाखों लोगों की जान आफत में पड़ सकती है इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता।

इनका कहना है
नगर निगम के पानी की समय-समय पर जांच कराई जाती है। केमिस्ट नहीं है यह बात सही है। शहर में अमृत प्रोजेक्ट से काम हो रहा है और जल्द ही पांच साल के लिए कंपनी को ही पानी की सप्लाई आदि का काम दिया जाना है। लोगों को पानी शुद्ध मिले इसपर ध्यान दिया जाएगा।
आरपी सिंह, आयुक्त नगर निगम।