
धरे रहे गए दावे, गरीबों का टूट रहा सपना : 20 हजार नहीं अब दो लाख रुपये एकमुश्त देने पर ही मिल रहे फ़्लैट
कटनी. केंद्र सरकार की महात्वाकांक्षी पीएम आवास योजना शहर के लोगों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं हैं। लोगों को उम्मीद थी कि शीघ्र ही अब उनको आसान किश्तों के साथ पक्की छत नसीब हो जाएगी और वे किराया के मकान से मुक्त हो जाएंगे और अपना आशियाना होगा, लेकिन न तो प्रेमनगर की मल्टी पूरी बनी और ना ही झिंझरी की। दो साल में बनकर तैयार हो जाने वाली प्रेमनगर और झिंझरी की मल्टी पांच साल में भी पूरी नहीं हुई है। दोनों जगह 2018 से काम चल रहा है। प्रेमनगर में 60 फीसदी मल्टी तो तैयार भी हो गई है, लेकिन झिंझरी में तीन साल से अधिक समय से काम बंद है और भवन जर्जर हो रहा है।
आपको बता दें कि इसमें एक नए निर्देश ने हितग्राहियों की गंभीर परेशानी बढ़ा दी है। पहले यह नियम था कि आवेदन प्रक्रिया के साथ 20 हजार रुपये की डीडी जमा कर देने पर बैंकों के माध्यम से लोन स्वीकृत कराकर आसान किश्तों में छत मुहैया कराई जानी थी, लेकिन अब प्रेमनगर मल्टी में उन्हीं हितग्राहियों को आवंटन प्राप्त हो रहा है जो एक साथ 2 लाख रुपये जमा कर रहे हैं। इसमें नगर निगम के अधिकारियों की यह विफलता सामने आ रही है कि वे बैंकों से ऋण केस ही स्वीकृत नहीं करा पा रहे हैं।
यह है स्थित
प्रेमनगर में 1412 इडब्ल्यूएस फ्लैट बन रहे हैं। जिसमें से अबतक झिंझरी योजना मिलाकर 1608 लोगों ने आवेदन किया है। इसमें से 75 लोग ही ऐसे हैं जिन्होंने पूरा अंशदान जमा कर दिया हैं। शेष लोगों के पास रुपये जमा करने की व्यवस्था ही नहीं है। अब लोग परेशान हैं कि कैसे उनको पक्की छत नसीब होगी। मेहनत-मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले लोग अब यही मान बैठे हैं कि इस योजना से उनका भला नहीं होने वाला। यह सिर्फ पूंजीपतियों से जुड़े लोगों को ही मिल पाएंगे, या फिर कर्ज के बोझ तले दबें तो ही लाभ मिलेगा।
बैंक नहीं कर रहे समय पर फाइनेंस
सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम आवास योजना में बैंकों का बड़ा ही ढुल मुल रवैया है। आपको जानकर हैरानी होगी कि पीएम आवास के नोडल अधिकारी, तत्कालीन अधीक्षण यंत्री, आयुक्त से लेकर कलेक्टर तक कई दौर की बैठकें बैंकों के साथ कर चुके हैं, लेकिन कोई बात नहीं बनी। पंबाज नेशनल बैंक में 411 प्रकरण नगर निगम ने तैयार कराकर भेजे हैं, जिनमें से मात्र 30 पर ही लोन हुआ है। इसी तरह आवास बैंक में 347 प्रकरण में से 190 प्रकरण में लोन की प्रक्रिया हुई है। इंडियन ओवरसीज बैंक को 290 प्रकरण भेजे गए हैं, जिनमें से अभी तक एक भी प्रकरण स्वीकृत नहीं हुआ।
अधिकारियों की अजब तर्क: 8 लाख का मकान दो लाख में दे रहे हैं...
शहर में अबतक प्रधानमंत्री आवास योजना में हितग्राहियों को समय पर बैंक से लोन दिलाकर पक्की छत मुहैया न करा पाने के मामले में नगर निगम के अधिकारियों का अजीबो-गरीब तर्क सामने आया है। अधिकारी कह रहे हैं कि लोग जब अपना मकान बनाते हैं तो लोन खुद ही पास कराते हैं, हम तो 8 लाख रुपये का मकान दो लाख रुपये में दे रहे हैं तो क्या हितग्राही इतना भी नहीं कर सकता। एकमुश्त राशि जमा करने पर ही आवास मिलेंगे। अब सवाल यह उठता है कि गरीब लोगों के पास एकमुश्त दो लाख रुपये जमा करने के लिए होता तो फिर किश्तों के फेर में लगभग पांच वर्षों से क्यों पड़े रहते।
ऐसे समझें लोगों की परेशानी
केस 01
पंकज मिश्रा एनकेजे ने बताया कि 2019 में आवेदन प्रक्रिया पूरी कर 20 हजार रुपये की डीडी जमा कर चुके हैं, लेकिन अबतक आवास नहीं मिला। नगर निगम के अधिकारी कह रहे हैं कि एकसाथ एक लाख 80 हजार रुपये रुपये जमा करने पर आवास मिलेगा वह भी बनने पर।
केस 02
गुरुनानक वार्ड निवासी सोनम मोटवानी ने बताया कि नगर निगम में आवेदन देकर प्रेमनगर में मल्टी में फ्लैट लेने के लिए 20 हजार रुपये की डीडी जमा कर दिया गया है। अब न तो लोन मिल रहा और ना ही फ्लैट, ननि के चक्कर काटकर परेशान हैं।
इनका कहना है
बैंक पीएम आवास के लिए ऋण स्वीकृत करने में रुचि कम ले रहे हैं, सरकार की ही स्कीम है कि जो एकमुश्त राशि जमा करे, उसे पहले प्राथमिकता दें, क्योंकि बैंक अपने हिसाब से ही ऋण स्वीकृत कर रहे हैं। कुछ बैंकों ने फाइनेंस किया है। बैंक केवाइसी, सिविल स्कोर आदि की समस्या के चलते लोन नहीं दे रहे हैं। प्राथमिकता नकद जमा करने वालों को दी जा रही है।
सत्येंद्र सिंह धाकरे, आयुक्त।
Published on:
22 Feb 2022 09:43 pm
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