
People will wear Khadi in Katni on Independence Day
कटनी. एक दौर था जब वतन में स्वदेशी आंदोलन छिड़ा और आंदोलन की प्रतीक ‘खादी’ बना। यह उस दौर की बात है जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 1915 में खादी सत्यागृह शुरू किया था। लोगों के जेहन में खादी खास महत्व रखने लगा। अब धीरे-धीरे फिर समाज में इसका क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। कुछ दिनों के बाद हम आजादी का महापर्व स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहे हैं। यह पर्व देशप्रेम के साथ एक दिन खादी के नाम करने का है। शहर में कई ऐसे संगठन हैं, जो खादी की अलख जगा रहे हैं। ओम शांति स्व सहायता समूह दीन दयाल योजना राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन द्वारा आत्मनिर्भर भारत उत्सव के तहत स्वदेशी वस्त्र याने की खादी की अलक जगाई जा रही है।
समूह द्वारा स्वरोजगार के साथ खादी को भी प्रमोट किया जा रहा है। ग्रुप की स्मिता बर्मन सहित अन्य सदस्यों के द्वारा स्वतंत्रता दिवस सहित अन्य त्योहारों, आयोजनों सहित दैनिक खादी वस्त्र पहनने का आवाहन किया जा रहा है। समूह द्वारा राष्ट्रीय पर्व पर सामाजिक और सांस्कृतिक समानता का संदेश देने वाले खादी वस्त्र पहनने का ही आवाहन किया है।
महिला-पुरुषों में है क्रेज
समाज में कई महिला व पुरुष ऐसे हैं, जिनमें अभी भी खादी का क्रेज है। टेंट कारोबारी अजय सरावगी बताते हैं कि वे अधिकांश समय खादी का कुर्ता ही पहनते हैं। खादी से न सिर्फ स्वदेशी का आभाष होता है बल्कि कपड़ा भी बेहतर होता है। महिलाओं में भी खादी की साड़ी पहनने का क्रेज है।
Published on:
09 Aug 2024 09:05 pm
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