
Sanitation tax imposed arbitrarily in Katni city
बालमीक पांडेय @ कटनी. जगह-जगह सड़कों पर समा रहे ट्रक, लोडर व ऑटो, गड्ढों और उधड़ी सड़क में गिरकर घायल हो रहे लोग, धूल के गुबार से दमा, आंखों की बीमारी व संक्रमण के शिकार हो रहे व्यक्ति, प्रदूषण से संभाग ही नहीं बल्कि देश में शहर की बदनामी, कभी लाइन फूटने से तो कभी हादसे के कारण परेशान शहर की जनता...। यह हाल है इन दिनों शहर की सीवर लाइन के कारण। शहर मं प्रोजेक्ट डेव्हलपमेंट एंड मैनेजमेंट कंस्लस्टेंट की निगरानी में चल रहा है। ठेका कंपनी केके स्पन के ठेकेदार की मनमानी और नगर निगम व जिला प्रशासन की अनदेखी के कारण शहर की जनता परेशान है। इस ओर इंजीनियर झांकने तक नहीं जा रहे। इसके अलावा शहर के मुख्य मार्ग चांडक चौक से जुहला बायपास तक सड़क चाड़ीकरण के लिए हो रहे काम व नाली निर्माण कार्य में त्रिशूल कंस्ट्रक्शन के ठेकेदार की मनमानी से शहर की जनता परेशान है। इन सबकी मुख्य वजह है विभागीय इंजीनियरों द्वारा ध्यान न देना। इंजीनियर या तो साइड को झांकने नहीं जाते, या जा भी रहे हैं तो सिर्फ रस्मअदायगी कर रहे हैं, जिसका नतीजा है कि सभी विकास कार्य सिर्फ ठेकेदारों के हाथों की कठपुतली बन गए हैं।
कइने भर को इंजीनियर
शहर में आइएचएसडीपी, ट्रंासपोर्ट नगर, ऑडिटोरियम, कटनी नदी पुल आदि काम में ठेकेदार द्वारा व मजदूरों द्वारा कैसे भ्रष्टाचार किया गया यह सबके सामने हैं। इसके बाद भी विभागीय यंत्री, उपयंत्री सिर्फ हर माह मोटी तनख्वाह उठाने को हैं। विभागीय कर्मचारियों की मानें तो इंजीनियर कभी कभार ही साइट पर जाते हैं। शहर में बिजली के पोल, नाली निर्माण, सड़क निर्माण, डिवाइडर, टंकी निर्माण सहित अन्य भवन निर्माणों में मनमानी जारी है।
इन पर है जिम्मेदार
- 100 प्रतिशत सहायक यंत्री।
- 10 प्रतिशत कार्यपालन यंत्री।
- 02 प्रतिशत अधीक्षण यंत्री।
यह है इंजीनियरों की स्थिति
- मप्र सेतु निगम द्वारा कटनी में चल रहे काम के लिए कार्यपालन यंत्री व उपयंत्री किए गए हैं तैनात।
- पीआइयू द्वारा जिले में एक कार्यपालन यंत्री व इंजीनियर व सब इंजीनियर किए गए हैं तैनात।
- नगर निगम में 16 इंजीनियर और सब इंजीनियरों को दी गई है जिम्मेदारी, फिर भी जारी है मनमानी।
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गरीबों के आशियाने में भी देरी
नगर निगम द्वारा शहर में दो स्थानों पर झिंझरी और प्रेमनगर में प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण की गति बेहद धीमी है। सबसे ज्यादा धीमी गति झिंझरी की है। यहां पर अभी तक 40 फीसदी भी काम पूरा नहीं हुआ। नगर निगम के इंजीनियरों व प्रभारियों द्वारा ध्यान न दिए जाने से काम मंथर गति से चल रहा है।
ऑडिटोरियम अब भी अधूरा
नगर निगम द्वारा लगभग 13 साल से बस स्टैंड के समीप ऑडिटोरियम बनाया जा रहा है। इसमें नगर निगम लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपये फूंक रही है। 2009 से ऑडिटोरियम का काम चल रहा है, लेकिन अबतक पूरा नहीं हो पाया। न तो इंटीरियर वर्क पूरा हुआ न बिजली का। यहां तक कि संचालन के लिए टेंडर तक नहीं हो पाया।
सीवर लाइन दे रही दर्द
शहर में 170.70 किलोमीटर सीवर लाइन का काम चल रहा है। इसमें नगर निगम द्वारा इसमं 96 करोड़ 50 लाख रुपये फूंके जा रहे हैं। फरवरी 2019 में काम हो जाना था, फिर से समायावधि एक साल के लिए बढ़ा दी गई है। अभी तक शहर में तीस फीसदी भी काम नहीं हुआ। पूरे शहर की जनता को यह लाइन दर्द दे रही है।
अस्पताल निर्माण भी मंथर गति से
जिला अस्पताल में 16 करोड़ रुपये की लागत से पीआइयू द्वारा 4 अक्टूबर 2018 से 150 बिस्तर का अस्पताल भवन बनाया जा रहा है। इसका काम फरवरी 2020 में पूरा हो जाना है, लेकिन अभी तक 50 फीसदी भी काम नहीं हुआ। विभाग का अनुमान है कि 2021 तक पूरा हो पाएगा। इसमें भी इंजीनियर ध्यान नहीं दे रहे।
कटनी नदी पुल से गया दगा
कटनी-मैहर मार्ग पर कटनी नदी पर चार करोड़ रुपये से अधिक का पुल निर्माण कराया जा रहा था। 2008 से इसका निर्माण जारी है। मप्र सेतु निगम के इंजीनियरों की बेपरवाही और ठेकेदार रामसज्जन शुक्ला की लापरवाही से निर्माणाधीन पुल का एक स्लैब टूट गया और अब काम रुका है। शहर की जनता परेशान है।
नाला निर्माण दे रहा दर्द
जगन्नाथ चौक से लेकर जुहला बायपास तक सड़क चौड़ीकरण का काम होना है। शहर का अतिक्रमण हटाने इंजीनियरों को अधिकारियों की सांसें तो फूल ही रही हैं, साथ ही फेज-1 में नाला निर्माण में जमकर मनमानी जारी है। पूरा नाला आड़ा-तिरछा बनाया जा रहा है, वह भी गुणवत्तविहीन, इंजीनियर ध्यान नहीं दे रहे।
जर्जर हो रहे आवास
गरीबों को सस्ते दर पर आवास मुहैया कराने के लिए नगर निगम द्वारा आएचएसडीपी योजना चलाई जा रहा है। 2007 से लगभग 2921 लाख रुपये से गरीबों के लिए आवास बनाए जा रहे हैं। अभी भी आवास आधे-अधूरे हैं, जो आवास बन गए हैं, वे भी अधूरे हैं। नगर निगम के इंजीनियरों को देखने तक की फुर्सत नहीं है।
शहर जाम, ट्रांसपोर्ट नगर पर नहीं काम
नगर निगम द्वारा लगभग 39 वर्षों से ट्रांसपोर्ट नगर बसाने की योजना चल रही है। अभी तक इसको अमलीजामा नहीं पहनाया गया। ढाई सौ से अधिक बड़े कारोबारियों को पुरैनी में बने ट्रांसपोर्ट नगर में शिफ्ट करना है। यहां पर न तो माकूल व्यवस्थाएं हुई और ना ही कारोबारियों ने यहां पर काम शुरू किया। नगर निगम के इंजीनियर ध्यान ही नहीं दे रहे।
इनका कहना है
विभाग के सभी यंत्रियों और उपयंत्रियों को सभी निर्माण कार्यों में विशेष निगरानी के निर्देश दिए जाएंगे। यदि बेपरवाही पाई जाती है तो सख्त कार्रवाई करेंगे। हम स्वयं कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं।
आरपी सिंह, आयुक्त नगर निगम।
Published on:
23 Nov 2019 12:20 pm
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