
Serious problem of Transport Nagar in Katni
कटनी. शहर में 1983-84 में बनाई गई ट्रांसपोर्ट नगर योजना का उद्देश्य शहर के भीतर ट्रांसपोर्ट और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को हटाकर उपनगरीय क्षेत्र पुरैनी-कुठला में शिफ्ट करना था। इसके पीछे मुख्य मकसद यह था कि शहर में हो रहे भारी ट्रैफिक और जाम की समस्या को कम किया जा सके। लेकिन योजना बने 40 साल का वक्त बीत गया है, लेकिन अब तक नगर निगम के अफसरों, जनप्रतिनिधियों को जनता को जाम, हादसों, वाहनों की धमाचौकड़ी के दर्द से राहत दिलाने कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।
शहर के कई हिस्सों में आज भी परचून और अन्य कारोबार फल-फूल रहे हैं, जिनके कारण शहर में जाम की समस्या बढ़ती जा रही है। स्थिति तब और भी बिगड़ जाती है जब रात में भारी वाहन शहर के भीतर से गुजरते हैं। इन वाहनों की धमाचौकड़ी से लोगों को रात में भी चैन से सोने नहीं मिल रहा है। कटनी शहर की जनता का कहना है कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने इस समस्या की ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया है। महापौर और स्थानीय विधायक को भी जनता की इस बड़ी समस्या से कोई सरोकार नहीं है। जबकि, योजना के तहत 114 कारोबारियों को लीज पर भूखंड कई वर्ष पहले आवंटित किए जा चुके हैं, फिर भी उन्हें उपनगरीय क्षेत्रों में शिफ्ट नहीं किया गया है। ठोस कार्रवाई के अभाव में शहर के कारोबारी मनमानी कर रहे हैं। इसके चलते शहर की सडक़ों पर जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे आम जनता को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
लॉटरी सिस्टम से आवंटित हुए थे प्लाट
जानकारी के अनुसार 2012 में 114 कारोबारियों को लॉटरी सिस्टम से प्लाट आवंटित किए गए थे। 14 वर्ष में मात्र 40 लोगों ने ही यहां पर निर्माण किया है व कर रहे हैं। कारोबार एक भी व्यापारी ने नहीं शुरू किया। वहीं दूसरी ओर 45 लोगों ने ही अबतक नगर निगम में भवन निर्माण के लिए मानचित्र स्वीकृत कराएं हैं। शेष के आवेदन पर अभी विचार नहीं हुआ तो कई लोगों ने अबतक नक्शे के लिए आवेदन ही नहीं किया। नियम व अनुबंध शर्तों के अनुसार इन ट्रांसपोर्ट करोबारियों को एक वर्ष के अंदर निर्माण कर कारोबार शुरू कर देना था, निमय के पालन न करने पर अबतक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अधिकारी सिर्फ नोटिस-नोटिस खेल रहे हैं।
फैक्ट फाइल
लाभ न हानि की शर्त पर हो आवंटन
अभी ट्रांसपोर्ट नगर में 115 प्लाट खाली पड़े हैं। अन्य कारोबारियों ने आवेदन किया है, लेकिन वे वर्तमान कलेक्टर गाइड लाइन के हिसाब से प्लाट लेने राजी नहीं हैं। इस संबंध में नगर निगम ने 13 अगस्त 2018 की परिषद की बैठक में निर्णय लिया कि न लाभ न हानि की शर्त पर आवंटन किया जाए। 29 सितंबर 2018 को प्रस्ताव कलेक्टर के पास भेजा गया, इसके बाद यहां से नगरीय प्रशासन विभाग को गया, लेकिन वहां से कलेक्टर गाइड लाइन के अनुसार ही प्लाट देने कहा गया। 13 फरवरी 23 को भी पत्राचार हुआ, लेकिन कोई सार्थक परिणाम सामने नहीं आए।
अड़चन मान बना बैठे अड़ंगा
यहां पर जिन कारोबारियों को प्लाट मिल गए हैं, उनका तर्क है कि जब एक साथ सभी कारोबारियों को प्लाट मिल जाएं, तो निर्माण शुरू करें, नहीं तो कुछ लोग शहर में कारोबार करें और कुछ लोग ट्रांसपोर्ट नगर में। इस परिस्थिति में ट्रांसपोर्ट नगर में कारोबारी करने वालों का व्यापार प्रभावित होगा। यह अड़ंगा ट्रांसपोर्ट नगर शिफ्टिंग में अड़चनें पैदा किए हुए है। इसके अलावा नक्शा आदि के सरलीकरण की मांग की जा रही है।
इन क्षेत्रों में ज्यादा परेशान
शहर के गर्ग चौराहा, घंटाघर से लेकर चांडक चौक तक की सडक़, आजाद चौक से लेकर शेर चौक तक, मिशन चौक से लेकर सुभाष चौक, कचहरी चौक से सिविल लाइन एरिया, मोहन टॉकीज रोड हो या फिर गोलबाजार व शहर अन्य अंदरूरी क्षेत्र, या फिर झंडा बाजार, नई बस्ती, पुरानी बस्ती सहित हर जगह ट्रांसपोर्ट का कारोबार हो रहा है। 5 दशक पहले शहर की आबादी कम थी, भीड़-भाड़ नहीं होती थी, लेकिन कई साल से समस्या गंभीर हो गई है। शहर की समस्या को देखते हुए 40 साल पहले जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने ट्रांसपोर्ट नगर योजना बनाई, लेकिन यह सिर्फ कागजों में चल रही है। नगर सरकार से लेकर प्रशासन व जनप्रतिनिधियों को आवाम की समस्या से कोई सरोकार नहीं है। सिर्फ बैठक, नोटिस और नगरीय प्रशासन विभाग को पत्राचार का खेल हो रहा है, हालात यह हैं कि पूरा शहर जाम का दंश झेल रहा है।
योजना को लेकर खास-खास
वर्जन
ट्रांसपोर्ट नगर शिफ्टिंग को लेकर प्रक्रिया चल रही है। सभी विभागीय अधिकारियों को समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने कहा गया है। शीघ्र ही इस मामले की समीक्षा कर शहरहित में आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे।
शिशिर गेमावत, प्रभारी आयुक्त।
Published on:
16 Sept 2024 07:39 am
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