
अमकुही में स्थापित हो रहीं इकाइयां।
कटनी. दाल मिल, राइस मिल, प्लास्टिक उद्योग, मिनरल्स, लाइम स्टोन व कपड़ा उद्योग सहित लघु उद्योग की अन्य इकाइयों को लेकर कभी चर्चाओं में रहा कटनी अब बीमार और बंद हो रही इकाइयों को लेकर चर्चाओं में है। 6 सौ से ज्यादा लघु इकाइयों के इस शहर में ज्यादातर इकाइयां घाटे पर चल रही हैं, तो इकाइयों के संचालक ऐसी स्थितियां निर्मित होने को लेकर सरकारी नीतियां और कच्चे माल की उपलब्धता सहित उनमें लगने वाले टैक्स को कारण बता रहे हैं।
यहां छात्रों की बढ़ गई इतनी संख्या की शिक्षकों को आ रहा पढ़ाने में पसीना...जानिए कारण
बड़ी इकाइयों के लिए ही बन रही नीतियां
- लघु उद्योग भारती के संभागीय अध्यक्ष अरुण सोनी का कहना है कि कोई भी सरकार रही हो, उनकी नीतियों का ८० प्रतिशत लाभ मध्यम व बड़ी इकाइयों को ही मिला है। कच्चा माल हो या टैक्स छोटे उद्योगों को भी बड़े की गिनती में गिना जाता है और इस कारण से जिले में भी 25 प्रतिशत इकाइयां बीमारू हो गई हैं।
लघु उद्योगों की ओर नहीं सरकार का ध्यान
मिलर्स अनिल वासवानी का कहना है कि लघु उद्योगों की मांग की ओर सरकार का ध्यान नहीं है। वादे के बाद उसे पूरा न करने से स्थिति यह है कि छोटे उद्योग स्पर्धा से बाहर होते जा रहे हैं। शहर में ही अमकुही में उद्योग स्थापना को जमीन उपलब्ध है लेकिन इकाइयां लगाने वालों की संख्या लाभ न होने से कम है।
हत्या के मामले आज भी अनसुलझे, डकैती का भी मामला ठंडा...
खास-खास:
- लघु उद्योगों से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि बड़े उद्योगों की तरह ही उनपर भी टैक्स लगता है और इसके चलते छोटे उद्योग स्पर्धा से बाहर होते जा रहे हैं।
- बड़े उद्योगपति कच्चे माल तो बल्क में लेते हैं और इसमें उनको सस्ते में सामग्री मिलती है जबकि उतना ही टैक्स देने के बाद लघु उद्योग संचालित करने वाले व्यापारी जब कच्चा माल खरीदते हैं तो उनको लागत अधिक आती है।
- प्रदूषण फीस, उत्पादन, लाइसेंस की फीस में भी लघु उद्योग इकाइयों को राहत नहीं मिल रही है।
- जिले की 25 प्रतिशत इकाई बीमार की श्रेणी में शामिल हैं। यहां एक हजार से ज्यादा इकाइयां हैं।
- जिले में लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना 2017 लागू है। जिसमें मशीनरी की खरीदी पर सरकार अनुदान दे रही है। उद्योगों को जमीन उपलब्ध कराने से लेकर स्थापना तक में विभागीय मदद देकर प्रोत्साहित किया जा रहा है। टैक्स व कच्चे की उपलब्धता पर हम कुछ नहीं कह सकते हैं।
अजय श्रीवास्तव, महाप्रबंधक, जिला उद्योग विभाग
Published on:
31 Aug 2019 11:59 am
बड़ी खबरें
View Allकटनी
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
