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गजब! 9 हजार परिवारों में नहीं थे प्रसाधन, 2018 में ओडीएफ हो गया था यह जिला, अब एक माह में तैयार हुए 7922 प्रसाधन

30 सितंबर 2018 को कटनी जिला ओडीएफ (खुले शौच से मुक्त) घोषित हो गया था। जानकर ताज्जुब होगा कि जिले के 9 हजार से अधिक परिवारों में प्रसाधन नहीं था। बेसलाइन सर्वे के अनुसार ही जिले को ओडीएफ मान लिया गया था।

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कटनी

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Balmeek Pandey

Mar 06, 2020

ajmer

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कटनी. 30 सितंबर 2018 को कटनी जिला ओडीएफ (खुले शौच से मुक्त) घोषित हो गया था। जानकर ताज्जुब होगा कि जिले के 9 हजार से अधिक परिवारों में प्रसाधन नहीं था। बेसलाइन सर्वे के अनुसार ही जिले को ओडीएफ मान लिया गया था। एलओबी और एनएलबी सर्वे हुआ तब जिले की हकीकत सामने आई। सर्वे में पाया गया कि 8 हजार 993 परिवारों में प्रसाधन ही नहीं है। ये सभी लोग खुले में ही शौच के लिए जा रहे हैं। हालांकि इसमें पात्र हितग्राही 8 हजार 142 पाए गए हैं। सर्वे सूची के बाद जिला पंचायत द्वारा पहल की गई और एक माह के अंदर 7 हजार 922 प्रसाधन पूर्ण किए गए हैं। अब जिले में 278 प्रसाधनों का निर्माण शेष बचा है, जिन्हें एक माह में पूर्ण करना है। उसके लिए जनपद पंचायत स्तर पर पहल की जा रही है। बैंकों द्वारा 73 प्रसाधनों की राशि को तकनीकी खामी के कारण रिजेक्ट कर दिया गया है। 414 पुराने प्रसाधनों की भी अपलोडिंग का कार्य किया गया है। बता दें कि स्वच्छ भारत मिशन की इस पहल में कटनी प्रदेश में दूसरे स्थान पर है।

यह है प्रसाधनों की स्थिति
जनपद हितग्राही निर्माण
बड़वारा 1843 1802
बहोरीबंद 1024 1012
ढीमरखेड़ा 2376 2327
कटनी 1478 1384
रीठी 297 292
विगढ़ 1124 1105
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योग 8142 7922
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इस जिले में चार चार महीने से पंचायत सचिवों को नही मिल रहा वेतन, सता रही पोषण की चिंता, हो रहे परेशान

हितग्राहियों ने बनाए 6309 प्रसाधन
खास बात यह रही कि इस बार हितग्राहियों ने प्रसाधन निर्माण में रुचि दिखाई। स्वयं से 6 हजार 309 प्रसाधन बनाए हैं। ग्राम पंचायतों द्वारा 1876 प्रसाधनों का निर्माण कराया गया है। 7 हजार 905 प्रसाधनों का सत्यान कार्य स्थल पर व सुपरवाइजरों द्वारा 7 हजार 922 प्रसाधनों का सत्यापन किया गया है। 7 हजार 478 हितग्राहियों को राशि 8 करोड़ 97 लाख 36 हजार रुपये का भुगतान भी विभाग द्वारा कर दिया गया है।

इनका कहना है
एलओबी और एनएलबी सर्वे में 8142 परिवारों के यहां प्रसाधन नहीं थे। स्वीकृति के बाद प्रसाधनों का निर्माण कराया गया है। 7922 प्रसाधन बन गए हैं। 278 शेष हैं, जिनका निर्माण एक सप्ताह में कराने जनपदों को निर्देश दिए गए हैं।
आनंद पांडेय, जिला समन्वयक एसबीएम।