5 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

1933 में पहुंचे थे बापू, तिलक राष्ट्रीय स्कूल में रुककर सुलगाई थी आजादी की चिंगारी

Special story on Gandhi Jayanti

3 min read
Google source verification

कटनी

image

Balmeek Pandey

Oct 01, 2024

Special story on Gandhi Jayanti

Special story on Gandhi Jayanti

जिस स्कूल में ठहरे थे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी वह पड़ा है वीरान, सिर्फ जयंती व पुण्यतिथि पर आती है याद, हम बापू सहित अन्य वीरों की पहल से परतंत्रता की बेडिय़ों से मुक्त हुए

कटनी. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जिन्होंने अहिंसा की राह पर चलकर अंग्रेजी हुकुमत के ऊपर ऐसा प्रहार किया कि उन्हें देश छोडकऱ जाना पड़ा और हम बापू सहित अन्य वीरों की पहल से परतंत्रता की बेडिय़ों से मुक्त हुए। हम वर्षों से अब आजाद देश के पंक्षी हैं। यह संभव हो पाया राष्ट्रपिता की खास पहल से। 2 अक्टूबर को उनकी जन्मजयंती पर हर कोई याद कर रहा हैै। बापू की यादें बारडोली की धरा से बेहद जुड़ी हुई हैं।
दो दिसंबर 1933 को जनजन में आजादी की चिंगारी जलाते हुए बापू कटनी पहुंचे तो पूरा महाकौशल प्रांत देखने और उनके इस महायज्ञ का भागीदार बनने उमड़ पड़ा था। बापू श्री तिलक राष्ट्रीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय घंटाघर में ठहरे थे। सुबह होते ही बापू हरिजन उद्धार यात्रा के लिए निकल पड़े थे। यहां पर लोगों से मिलकर आजादी की लड़ाई में शामिल होने आवाहन किया और फिर गांधीद्वार होते हुए सभा स्थल फारेस्टर प्लेग्राउंड पहुंचे थे।

कटनी ऐसे हुई बारडोली..
बात दें कि बापू फॉरेस्टर प्लेग्राउण्ड में आयोजित सार्वजनिक सभा को संबोधित करने के पश्चात गांधी सिहोरा के लिये रवाना हुए थे। बापू को सुनने के लिए 22 हजार लोग पहुंचे थे। सभा को संबोधित करते हुए बापू ने कहा कि खास बात यह है यहां के लोगों की आंखों में आजादी का ज्वाला जल रही है। तब बापू ने कहा था कि ठीक इसी तरह उड़ीसा का एक गांव है बारडोली वहां के लोगों में भी गजब का उत्साह देखने मिला है। तभी से मुड़वारा-कटनी का दूसरा नाम बारडोली पड़ा था।


बिजली के इंतजार में नया औद्योगिक क्षेत्र, चार माह बाद होगा प्लांटों को आवंटन

स्थान है वीरान
बापू जिस स्कूल के जिस कमरे में ठहरे थे वह आज भी वीरान है। यहां पर बापू की याद में सिर्फ एक बोर्ड और कमरे में एक तस्वीर टंगी है। स्कूल व परिसर को खास बनाने पाटियों, सरकारों और जनप्रतिनिधियों ने आजतक ध्यान नहीं दिया। गांधीवादी विचारधारा के लोग यहां पर सिर्फ संगोष्ठी व श्रद्धांजलि देने का ही काम कर रहे हैं। आयोजन-प्रयोजन कर स्थल को उसी फटेहाल में छोड़ दिया जा रहा है। मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग द्वारा यहां पर सिर्फ बापू के आने की दिनांक और कार्यक्रम का सूचना बोर्ड लगाकर कर्तव्य की इतिश्री कर चुका है।

बापू की यादों को समेटे है स्कूल
स्कूल बापू की सुनहरी यादों को समेटे हुए है। बाल गंगाधर तिलक ने स्वदेशी की अलख भी जगाई थी। इसकी निशानी आज भी कटनी में है। यह मध्य प्रदेश का एक मात्र स्वदेशी विद्यालय है। किसी जमाने में इसका आकर्षण और वैभव इतना प्रसिद्ध था कि महात्मा गांधी ने यहां रात्रि विश्राम किया था। उन्होंने इसकी खुलकर प्रसंशा भी की थी। स्कूल के शिक्षक राकेश तिवारी के अनुसार महात्मा गांधी सीधे फारेस्ट प्लेग्राउंड पहुंचे और जनमानस को संबोधित किया था। बापू के आवाहन पर क्षेत्र से हजारों की संख्या में लोग आजादी की लड़ाई में शामिल हुए थे। सभा समाप्ति के उपरांत बापू ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा था। खास बात यह है कि महाकौशल प्रांत से 7 डिक्टेटर नियुक्त किए गए थे, जिसमें से कटनी से प्रथम डिटेक्टर स्कूल के प्राचार्य पं. गोविंद प्रसाद खंपरिया व शिक्षक नरोत्तम प्रसाद शर्मा को बनाया था।