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अजब शौंक: 1835 से लेकर अब तक के भारतीय सिक्कों और नोटों का कलेक्शन

बचपन के शौक ने तैयार कराया दुर्लभ एल्बम, डाक टिकट का भी खास संग्रह, किया जा चुका है सम्मानित

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कटनी

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Balmeek Pandey

May 18, 2025

Unique collection of Indian currency

Unique collection of Indian currency

कटनी. शौक कोई भी हो, यदि उसमें समर्पण हो तो वह न केवल अद्भुत बन जाता है बल्कि दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनता है। कुछ ऐसा ही अनोखा शौक है कटनी शहर के डन कॉलोनी निवासी और पेशे से फोटोग्राफर प्रशांत पचौरी का, जिन्होंने 1835 से अब तक की भारतीय मुद्रा और डाक टिकटों का संग्रह कर एक दुर्लभ ऐतिहासिक खजाना तैयार किया है। प्रशांत पचौरी का यह अनोखा शौक न सिर्फ एक व्यक्तिगत जुनून है, बल्कि यह भारत के ऐतिहासिक विकास को संग्रहित करने वाला प्रेरणादायक कार्य भी है। ऐसे शौक समाज को इतिहास के करीब लाने और नई पीढ़ी को जागरूक करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
प्रशांत के पास 187 साल पुरानी मुद्राओं का अनूठा कलेक्शन है, जिसमें सैकड़ों की संख्या में सिक्के, नोट और डाक टिकट शामिल हैं। उन्होंने इस समूचे कलेक्शन को खूबसूरती से सजाकर एल्बम का रूप दिया है, जिसे वे विभिन्न एग्जिबिशन में प्रदर्शित करते हैं और हर बार लोगों की खूब सराहना पाते हैं।

हर युग की दिखती है झलक

प्रशांत ने बताया कि उनके पास ब्रिटिश काल, प्री-इंडिपेंडेंस, आज़ादी के बाद के शुरुआती वर्षों से लेकर वर्तमान तक के सिक्के और नोट मौजूद हैं। हर एल्बम को लेमिनेट कर सुरक्षित रखा गया है ताकि समय का असर इन पर न पड़े। खास बात यह है कि उनके पास हर धातु और डिज़ाइन के सिक्कों का संग्रह है, जैसे कांस्य, निकल, चांदी और स्टील से बने सिक्के।

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डाक टिकटों का भी बेशकीमती कलेक्शन

सिर्फ सिक्कों और नोट ही नहीं, बल्कि प्रशांत ने डाक टिकटों का भी शानदार संग्रह तैयार किया है। उन्होंने बताया कि बचपन में उन्हें जब भी कोई टिकट या अलग दिखने वाला सिक्का मिलता था, वे उसे संभाल कर रख लेते थे। यही शौक समय के साथ जुनून में बदल गया और आज उनके पास ऐसे टिकट भी हैं जो अब डाक सेवाओं में उपयोग नहीं होते। प्रशांत बताते हैं कि इस शौक को पूरा करने में परिवार का पूरा सहयोग मिला। उनकी पत्नी और बच्चे भी इस संग्रह को संभालने और प्रदर्शनी के लिए तैयार करने में मदद करते हैं।

ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने का प्रयास

प्रशांत का यह संग्रह न केवल शौक की संतुष्टि का जरिया है, बल्कि यह भारत की आर्थिक और सांस्कृतिक यात्रा को एक नजर में दिखाने वाली जीवित किताब जैसा भी है। उनका कहना है, हर सिक्का और नोट अपने समय की कहानी कहता है। अगर इसे संभालकर रखा जाए तो अगली पीढ़ी भी अपने इतिहास को छूकर महसूस कर सकती है। शहर में आयोजित होने वाली प्रदर्शनियों में जब प्रशांत अपने एल्बम लेकर पहुंचते हैं तो लोग हैरान रह जाते हैं। उनके कलेक्शन को देखकर लोग न सिर्फ तारीफ करते हैं बल्कि कई युवा उनसे प्रेरित होकर ऐसा ही कुछ करने का मन भी बनाते हैं।