कटनी. वर्तमान परिवेश में विवाह बंधन एक व्यवसाय की तरह हो चला है। विवाह में रुपया, जेवरात और वाहनों का न सिर्फ सौदा होता है, बल्कि करोड़ों रुपए समारोह में बेफिजूल फूंके जाते हैं। फिजूल खर्चे को बचाने और समाज में फैले दहेज प्रथा के अभिशाप में जहां बाप के सिर बेटी का बोझ बढ़ा दिया वहीं तमाम बहुएं दहेज उत्पीडऩ की यातना सहने को मजबूर हैं। बड़वारा क्षेत्र के ग्राम विलायतकला निवासी कृषक वीरेंद्र तिवारी ने बेटी विभा व रायपुर छत्तीसगढ़ निवासी रत्नेश तिवारी के पुत्र सृजनेश ने दहेज प्रथा की कुरीतियों का परित्याग करते हुए विवाह कर समाज के सामने आदर्श प्रस्तुत किया। इस विवाह समारोह की न सिर्फ लोगों ने मुक्तकंठ से प्रशंसा की बल्कि वर-वधु सहित दोनों ही परिवार का सम्मान करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी बताया। इस विवाह समारोह के जनप्रतिनिधि, अधिकारी, समाजसेवी सहित प्रदेशभर के लोग साक्षी बने।