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यहां प्लास्टिक प्रदूषण रोकने महिलाएं जगा रहीं अलख…

स्कूल के साथ ही कॉलोनी में महिलाओं की बैठक कर बता रहीं नुकसान, मां जालपा परमार्थ समिति की सदस्य कपड़े के थैले का उपयोग करने कर रहीं जागरुक

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कटनी

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Mukesh Tiwari

Oct 01, 2019

Women are running awareness campaign

महिलाओं को जानकारी देतीं समिति सदस्य।

कटनी. शहर को सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त बनाने को लेकर अब समाजसेवी संस्थाएं व महिलाएं आगे आ रही हैं। स्टाप सिंगल यूज प्लास्टिक अभियान में जालपा वार्ड की मां जालपा परमार्थ सेवा समिति की महिलाएं बच्चों व महिलाओं को पॉलीथिन, डिस्पोजल आदि का उपयोग न करने जागरुक कर रही हैं। जिसके लिए स्कूलों में कार्यक्रमों के साथ ही कॉलोनियों में भी छोटी-छोटी बैठक कर प्लास्टिक के नुकसान बताए जा रहे हैं। शनिवार को संस्था सदस्यों ने वार्ड में ही महिलाओं की बैठक की और उसमें पालीथिन की जगह कपड़े के थैलों का उपयोग करने की सलाह दी गई। संस्था प्रमुख नीरा सेठिया ने महिलाओं से कहा कि प्लास्टिक से पर्यावरण के साथ ही मवेशियों को भी नुकसान हो रहा है तो जमीन की उर्वरा शक्ति भी कम हो रही है। संस्था की अन्य सदस्यों ने भी पॉलीथिन का उपयोग न करने की बात कही। इससे पहले संस्था द्वारा शेर चौक स्कूल में छात्रों को प्लास्टिक प्रदूषण के विषय में जानकारी दी। साथ ही संस्था द्वारा महिलाओं व छात्राओं के बीच जागरुकता को लेकर कपड़े के थैले बनाने की प्रतियोगिता भी आयोजित की जा रही है। इस दौरान शीतल असाटी, अनीता नायक, सुनीता मिश्रा, अनूपा सोनी, आशा तिवारी, माया गुप्ता, पूजा मिश्रा, प्रीति जगाती सहित अन्य जन मौजूद थीं।

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इन्होंने कहा -
हमारे पूर्वजों ने जिस तरह का पर्यावरण हमें दिया था। उसे हमने प्लास्टिक जैसी चीजों से खराब कर दिया। हमारी जिम्मेदारी है कि हम उसे पहले की तरह सुंदर बनाएं।
मीरा नगरिया, वरिष्ठ नागरिक

प्लास्टिक कई वर्ष तक जमीन में ऐसे ही पड़ा रहता है। जिससे हमारी भूमि की उर्वरा शक्ति कम हो रही है। मवेशी भी उसका शिकार हो रहे हैं तो जलाने से हमें भी नुकसान होता है।
शिवाली जैन, संस्था सदस्य

घर से निकलने से पहले महिलाएं अपने घर के पुरुषों को सबसे पहले थैला पकड़ाएं ताकि सामग्री पॉलीथिन में न आए। यह हमारी जिम्मेदारी है और इसके लिए हम जागरुक कर रहे।
कीर्ति असाटी, संस्था सदस्य

ये भी करेंगे काम-
- छात्राओं, महिलाओं के बीच थैले बनाने की प्रतियोगिता के साथ ही जागरुकता कार्यक्रम
- संस्था की ओर से कपड़े थैले बनाकर कॉलोनियों ने वितरण
- स्कूलों में बच्चों को जागरुक करना कि वे अपने माता-पिता को थैले का उपयोग करने कहें
- कॉलोनी में घर-घर जाकर लोगों को प्लास्टिक का उपयोग न करने जागरुक