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श्मशान घाट पर स्थित नीम के पेड़ से घंटों से उठ रही आग की ऊंची लपटे, लोग मान रहे चमत्कार

बारिश और फायर ब्रिगेड भी नहीं बुझा सकी आग, पेड़ की पत्तीयों को नुकसान नहीं

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श्मशान घाट पर स्थित नीम के पेड़ से घंटों से उठ रही आग की ऊंची लपटे, लोग मान रहे चमत्कार

श्मशान घाट पर स्थित नीम के पेड़ से घंटों से उठ रही आग की ऊंची लपटे, लोग मान रहे चमत्कार

कौशांबी. जिले के कडा धाम में गंगा किनारे स्थित हनुमान घाट से सटे श्मशान घाट पर लगे एक नीम के पेड़ में सुबह से आग की ऊंची-ऊंची लपटे उठ रही है। हैरानी वाली बात यह है कि पेड़ से उठ रही आग से धुंआ नहीं निकल रहा। न ही पेड़ की पत्तीयों को नुकसान पहुंचा है। यह आग मानों ऐसे निकल रही हो जैस गैस जल रही हो। वहीं दूसरीओर जिले में रूक- रूककर हो रही बारिश भी आग को नहीं बुझा सकी, न ही फायरब्रिग्रेड के कर्मी। जिसे बाद से स्थानीय लोग इसे चमत्कार मान रहे है। नीम के पेड़ निकल रही आग की इन लपटों को देखने के लिए भारी संख्या में स्थानीय लोग यहां पहुंच रहे है।

आप को बतादें कि जिले के कडा धाम में गंगा किनारे हनुमान घाट के पास दो साल पहले ही शमशान घाट बना है। तब से हर रोज हनुमान मंदिर के ठीक सामने बने इस श्मशान घाट पर शवों की अंत्योष्ठी की जा रही है। रविवार की सुबह रिमझिम बारिश के बीच घाट पर अंतिम संस्कार करने पहुंचे कुछ लोगों ने देखा कि श्मशान घाट पर स्थित नीम के पेड़ से आग की लपटे उठ रही है। पहले तो इन लोगों ने आग की लपटों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। लेकिन आग की लपटे जब तेज हुई तो और लोगों का ध्यान उस तरफ गया। लोगों ने देखा तो नीम के पेड़ से पाँच जगहों से आग की तेज लपटें निकल रही है।

हैरानी की बात यह है कि आग की लपटों के साथ कहीं से भी धुआँ नहीं निकलता दिखाई दिया। पेड़ से निकल रही लपटों से पत्तियाँ भी नहीं झुलस रही है। वहीं इस दौरान कई बार रूक-रूककर हो रही बारिश भी आग को नहीं बुझ सकी। इसके बाद स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना फायर बिग्रेड को दिया। सूचना पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम भी आग पर काबू नहीं पा सकी। आखिर में सुबह लगी यह आग बारह घंटे गुजर जाने के बाद शाम तक नहीं बुझी थी। वहीं पेड़ में आग की सूचना के बाद मौके पर स्थानीय लोगों का भारी जमावड़ा लगा हुआ है। लोग इसे दैवीय चमत्कार मान रहे है। वहीं इस मामले में हनुमान मंदिर के महंत का कहना है कि हनुमान मंदिर के नीचे शवों की अंत्योष्ठी करने से माना करते है लेकिन कोई नहीं मानता, इसी कारण यह दैवीय आपदा आई है।

By- शिवनंदन साहू

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