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सात समंदर पार तक पहुंची कडा के रंग-बिरंगी ताजिया की शोहरत

कागजों से बने ताजिया के बिना अधूरा होता है मोहर्रम का जुलूस हुसैन की शहादत को याद कर ताजिया बनाने वाले कारीगरों को मिलता है सुकून

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सात समंदर पार तक पहुंची कडा के रंग-बिरंगी ताजिया की शोहरत

कौशांबी. ताजिया, मोहर्रम का अटूट हिस्सा है, जो पैगम्बर मोहम्मद साहब के नवासे हुसैन की शहादत को याद कर निकाले जाते है| मोहर्रम के महीने में वैसे तो ये ताजिये हर जगह नजर आते हैं लेकिन कौशाम्बी जिले के प्राचीन कस्बे " कडा " में बने ताजिया मुहर्रम के समय देश के बिभिन्न प्रदेशों मे भेजे जाते हैं | हुसैन की शहादत बनाये गए इन आलीशान ताजियों की मांग विदेशो तक में है |

पाँच साल पहले यहा से एक ताजिया नीदरलैंड भेजा गया, जो आज भी वहाँ के म्यूजियम मे एक नमूने के तौर में मौजूद है | इस कस्बे में इन आलीशान ताजियों को बनाने वाले सैकड़ों परिवार ताजिये बनाकर इमाम हुसैन की शहादत को याद करते है| जब तक ये कारीगर सैकड़ों की तादाद में ताजिये बनाकर ताजियेदारों को सौप न दें उन्हें सुकून नहीं मिलता है | रंग -बिरंगे कागजो से तैयार किये गए इन ताजियों का मुहर्रम में अहम स्थान रहता है|
बिना ताजिया के मुहर्रम पूरा नहीं होता है| ताजिया तैयार करने वाले कारीगर इसे बनाने में काफी संतोष पाते है| कडा में बनाने वाले ताजिया दूसरी जगहों पर बनने वाले ताजिया से अधिक शोहरत पा चुके है| यहाँ के कारीगरों के हांथो बनने वाली ताजिया लोग हांथो हाँथ लेते है | बांस की खपचियों के ऊपर चमकदार कागजो को जब आकर मिलता है तो लोग उन्हे देखते रह जाते है। ताजिया बनाने वाले कारीगरों का कहना है कि आस्था का प्रतिक ताजिया बनाने से उनके मन को सुकून मिलाता है और वो अपने एस हुनर से इमाम हुसैन को श्रधांजलि देते है| ताजिया बनाने में कारीगरों का पूरा परिवार रात दिन लगा रहता है| एक ताजिया को बनाने में चार से छः महीने तक का समय लगता है| इसमे लगभग पैतीस से चालीस हजार तक की लागत आती है|
जबकि एक ताजिया को वह साठ से सत्तर हजार रुपये तक में बेचते है| मुहर्रम के मौके पर एक परिवार 12 से 15 पंद्रह ताजिया बनाते है| इससे होने वाली कमाई से ही उनके परिवार का भरण पोषण होता है| ऐतिहासिक नगरी कडा में बनने वाले आस्था का प्रतिक ताजिया की चमक देश के बिभिन्न प्रान्तों के आलावा सात समुन्दर पार तक फैली हुई है| कडा के कारीगर असगर अली उर्फ़ बडकू का ताजिया पाँच साल पहले "नीदरलैंड" के "KITROPREN" संग्रहालय में ले जाकर रखा गया है| इस ताजिया को विशेष आकर के बक्से में पैक कर के ले जाया गया था| मुहर्रम से पहले कड़ा में ताजिया बनवाने वालो की भीड़ लगी रहती है। ताजिया बनाने में लगभग चार से छः माह तक का समय लगता है| इसमे अभ्रक , गंधक के साथ रंग -बिरंगी चमकदार पन्नियाँ व सजावट के कई दूसरे समान लगाए जाते है | ताजिया मुहर्रम की दसवी तारीख को करबला में दफन किये जाते है|