
कागज के लिफाफों ने सैकड़ों परिवारों के चेहरे पर रौनक लौटाई
कौशांबी. सरकार ने प्लास्टिक की थैलियों पर रोक क्या लगाई जिले में कागज का लिफाफा बनाने वाले सैकड़ों परिवारों के चेहरे पर रौनक आ गई। अब इन परिवारों को एक बार फिर से रोजगार मिलने की उम्मीद जगी है। इस काम से जुड़े कुछ लोगों को तो कागज के लिफाफे बनाने का आर्डर मिलने भी शुरू हो गए हैं। तो वहीं इस काम जुड़े कुछ परिवार दिनभर में डेढ़ से दो हजार थैलियाँ बनाकर एक हजार से बारह सौ रुपए तक की कमाई कर रहे हैं। और सरकार के इस कदम को सराहनीय बता रहे हैं।
गौरतलब है कि प्लास्टिक की थैलियों से बढ़ते प्रदूषण को देखते हुये सरकार ने 16 जुलाई से पचास माइक्रॉन से कम की पॉलिथीन के इस्तेमाल और ब्रिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। जिसके बाद बाज़ारों से प्लास्टिक की थैलियां धीरे-धीरे गायब होती जा रही है। और उनकी कागज के लिफाफे दिखाई देने लगे है। जिले में लगभग दो हजार परिवार कागज के लिफाफे बनाने के काम से जुड़ा हुआ है। जो पुराने अखबारों से छोटे-बड़े लिफाफे बना कर अपनी जीविका चलाते है। गौरतलब है कि जिले के कडा, दारानगर, अजुहा, देवीगंज, मंझनपुर, भरवारी, मूरतगंज, चायल, कादीपुर, सराय अकिल, तिल्हापुर बाजार सहित लगभग पाँच दर्जन गांवों में कागज के लिफाफे बनाने का काम होता हैं।
जो एक बार फिर रोजगार से जुड़ सुखद महशूश कर रहे है। इस रोजगार से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार ने पचास माइक्रॉन से कम की पॉलिथीन को प्रतिबंधित कर सिर्फ प्रदूषण रोकने में ही अहम भूमिका नहीं निभाई बल्कि उनके जीवन में भी नई उम्मीद जगी है। सालों पहले बंद हो चुके कागज के लिफाफे की जरूरत लोगों को एक बार फिर महशूश हो रही है। जिसका नतीजा यह है कि हमें काम मिल रहा है। इस काम से जुड़े लोगों का कहना है कि अब परिवार चलाने में मदद मिलेगी।
By- शिवनंदन साहू
Published on:
20 Jul 2018 08:18 pm
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