
कौशांबी. यूपी बोर्ड परीक्षा मे कौशांबी जिले के ऊपर लगे कलंक का दाग मिटाने के लिए जिला प्रशासन ने भले ही सख़्ती करते हुये सीसीटीवी कैमरा व स्टेटिक मजिस्ट्रेटों को तैनात किया है लेकिन नकल पर नकेल कसने की मंशा पर सवालिया निशान भी लग रहा है।

परीक्षा केंद्रों पर जो सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं उनमे आवाज की रिकार्डिंग नहीं हो रही है। ऐसे मे परीक्षा कक्ष के बाहर या कैमरे की पहुंच से बाहर खड़े हो इमला बोलकर नकल करने की संभावना बहुत अधिक है। हालांकि जिलाधिकारी का दावा है कि ऐसा बिल्कुल नहीं हो सकता है।

परीक्षा केंद्रों मे जो सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं उनकी प्रतिदिन की रिकार्डिंग कापी जमा करने के साथ जमा करानी होगी। रिकार्डिग की मानीटरिंग की जा रही है। कौशांबी जिला बोर्ड परीक्षा के दौरान होने वाली नकल के लिए देश के कई प्रदेशों मे विख्यात है।

यहां पर पश्चिम बंगाल, बिहार, मध्य प्रदेश से लेकर जम्मू-कश्मीर तक के परीक्षार्थियों ने परीक्षा देकर बेहतरीन नंबरों से हाई स्कूल व इंटर मीडिएट की परीक्षा पास किया है। सूबे मे सत्ता बदलने के साथ ही नकल पर नकेल कसने की कवायद शुरू हुई।

कौशांबी जिले पर शासन की विशेष नजर रही और जिलाधिकारी को नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए निर्देशित किया। शासन के निर्देश पर जिले के सभी 88 परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए।

परीक्षा शुरू हुई तो नकल माफियाओं के बीच यह चर्चा होने लगी की परीक्षा केंद्रों मे जो कैमरे लगाए गए हैं वह सिर्फ वीडियो रिकरद कर सकते हैं, आडियो रिकार्डिंग की कोई व्यवस्था नहीं है। आशंका जताया जा रहा है कि कैमरे की पहुंच से बाहर होकर इमला बोलकर नकल कराई जा सकती है।