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जंगलों और पहाड़ी इलाकों में रहने वालों के लिए संजीवनी है ये एंबुलेंस, 2171 को पहुंचाया अस्पताल

Chhattisgarh Bike Ambulance: बाइक एम्बुलेंस छतीसगढ़ के उन चुनिंदा 5 जिलों के विकासखण्डों में संचालित है, जहां की भौगोलिक बनावट दुर्गम है

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Chhattisgarh news

जंगलों और पहाड़ी इलाकों में रहने वालों के लिए संजीवनी है ये एंबुलेंस, 2171 को पहुंचाया अस्पताल

कवर्धा. जंगलों और पहाड़ी इलाकों की डगमगाती पगडंडियों पर बाइक एंबुलेंस वनांचल वासियों के लिए संजीवनी साबित (Chhattisgarh Bike Ambulance) हो रही है। बाइक एम्बुलेंस छतीसगढ़ के उन चुनिंदा 5 जिलों के विकासखण्डों में संचालित है, जहां की भौगोलिक (Chhattisgarh Geography ) बनावट दुर्गम है। इसमें कबीरधाम (Kawardha district) भी शामिल है।

बाइक एम्बुलेंस सेवा के परिणाम स्वरूप एक ओर जहां गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराने में सफलता मिल रही है, वहीं दूसरी ओर वनांचल के लोगों को स्वास्थ्य लाभ देकर प्रचलित झाड़-फूंक और अंधविश्वास को दूर करने में मदद भी मिल रही है। यूनीसेफ ने भी इस वाहन से किए जा रहे काम की सराहना की है। वजह भी है कि इससे ज्यादा से ज्यादा माता और शिशु की जान बचाने की कवायद रंग ला रही है। इसके अतिरिक्त अन्य गम्भीर प्रकरणों में भी बाइक एम्बुलेंस सेवा लोगों को राहत पहुंचाने का काम कर रही है।

15 जुलाई 2018 को कबीरधाम के तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बाइक एम्बुलेंस सेवा आरम्भ हुई। इसके पश्चात मांग को देखते हुए 2 बाइक एम्बुलेंस सेवा की इसमे जोड़ी गई। इस प्रकार कबीरधाम में फिलहाल 5 बाइक एम्बुलेंस सेवा दे रही है और राज्य में सर्वाधिक 2171 लोगों ने अब तक इस सेवा का लाभ लिया है।

भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल बाइक
दरअसल राज्य में संजीवनी 108 और महतारी 102 एंबुलेंस सेवाएं जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में नहीं जा पाती हैं। ऐसे में शासन द्वारा बाइक एम्बुलेंस सेवा शुरू करने का फैसला लिया गया। इसके लिए डिजाइन तैयार की गई और कुछ बाइक एंबुलेंस को यहां दौड़ाना शुरू किया गया। फोर स्ट्रोक मोटरसाइकिल को एंबुलेंस में बदलने की लागत एक लाख 70 हजार रुपए आई। इसके बाद भौगोलिक परिस्थितियों को देखकर इसके चलाने वालों को बुनियादी आवश्यक प्राथमिक चिकित्सा का प्रशिक्षण भी दिया गया।

ग्रामीणों को दिया स्वास्थ्य लाभ
बाइक एम्बुलेंस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह उन सुदूर वनांचल क्षेत्रों में पहुंचने में दक्ष है जहां चार पहिया एम्बुलेंस से नहीं पहुंच पाते। वनांचल तक पहुंचकर ग्रामीणाों को स्वास्थ्य लाभ के लिए मुख्य धारा में जोडऩे में काफी हद तक लाभ मिला है।

अन्य जिलों की स्थिति
नारायणपुर जिले में सर्वप्रथम जून 2014 में बाइक एम्बुलेंस सेवा आरम्भ की गई। यहां 2 क्षेत्रों में सेवारत बाइक एम्बुलेंस द्वारा मई 2019 तक 867 लोगों को सुविधा दी। अप्रैल 2017 में दंतेवाड़ा जिले में सुविधा आरम्भ की, जो मार्च 2018 से बंद है। बलरामपुर के 4 क्षेत्रों में 1 अप्रेल 2018 से यह सेवा आरम्भ है और यहां अब तक 870 लोग इस सेवा का लाभ ले चुके हैं। सुकमा जिले में मई 2018 से आरम्भ इस सेवा से 80 लोगों को जीवनदान मिला, जबकि अगस्त 2018 से यहां की सेवाएं बन्द पड़ी है।