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IPS धर्मेंद्र सिंह का छलका दर्द.. कहा- जानबूझकर पदोन्नति से किया वंचित, CM साय को पत्र लिखकर बताई पीड़ा

IPS Dharmendra Singh Chhawai: भारतीय पुलिस सेवा (IPS) 2012 बैच के एक पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह छवई ने आरोप लगाया है कि उन्हें जानबूझकर पदोन्नति से वंचित किया है…

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IPS Dharmendra Singh Chhawai

SP धर्मेंद्र सिंह का छलका दर्द ( Photo - Patrika )

IPS Dharmendra Singh Chhawai: प्रमोशन नहीं मिलने पर कवर्धा एसपी का दर्द सामने आया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर पुलिस महकमे में खलबली मचा दी है। भारतीय पुलिस सेवा (IPS) 2012 बैच के एक पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह छवई ने आरोप लगाया है कि उन्हें नियमों के बावजूद उन्हें जानबूझकर पदोन्नति से वंचित किया गया। वहीं पत्र के लिए कथित अन्याय, भेदभाव और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन की पीड़ा व्यक्त की है।

IPS Dharmendra Singh Chhawai: पत्र में कही ये बात

सीएम साय को लिखे पत्र के अनुसार, अधिकारी वर्तमान में कवर्धा पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं और पुलिस मुख्यालय द्वारा समय-समय पर जारी की गई पदोन्नति सूचियों (10 अक्टूबर 2024, 31 दिसंबर 2024, 26 मई 2025 और 31 जुलाई 2025) में उनके नाम पर विचार किया गया, लेकिन उन्हें पदोन्नत नहीं किया गया। इसका कारण बताया गया कि उनके विरुद्ध लोकायुक्त संगठन, भोपाल में जांच लंबित है।

अधिकारी ने अपने दर्द को शब्दों में बयां करते हुए लिखा है कि जिन अधिकारियों पर उनसे कहीं अधिक गंभीर आरोप हैं, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज हैं और जिन मामलों में न्यायालय से अंतिम रिपोर्ट तक नहीं आई है, उन्हें पदोन्नति का लाभ दे दिया गया। जबकि उनके मामले में न तो चार्जशीट जारी हुई है और न ही कोई विभागीय कार्यवाही लंबित है।

पदोन्नति नियमों का हवाला

पत्र में भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा 15 जनवरी 1999 को जारी पदोन्नति नियमों का हवाला देते हुए बताया गया है कि यदि अधिकारी निलंबित नहीं है, आरोप पत्र जारी नहीं हुआ है और न्यायालय में आपराधिक मामला लंबित नहीं है, तो उसे पदोन्नति से वंचित नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद उन्हें वरिष्ठ वेतनमान और उप पुलिस महानिरीक्षक (DIG) के पद पर पदोन्नति नहीं दी गई।

पुलिस अधीक्षक ने इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद-16 के तहत समान अवसर के अधिकार का खुला उल्लंघन बताया है। पत्र में यह भी कहा गया है कि समान परिस्थिति वाले अधिकारियों को पदोन्नत किया गया, जबकि उनके साथ भेदभाव किया गया, जिससे उनका मनोबल आहत हुआ है। कवर्धा एसपी का पत्र सामने आने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। अब देखना होगा कि इस मामले में मुख्यमंत्री और राज्य सरकार इस पर क्या फैसला लेती है।