
मनरेगा में कबीरधाम अव्वल, रोजगार सृजन में नया रिकॉर्ड ( Photo - Patrika )
Kawardha District News: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में कबीरधाम जिले ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। जिले ने रोजगार सृजन के कई प्रमुख मानकों पर शानदार प्रदर्शन करते हुए ग्रामीण विकास की दिशा में नई मिसाल कायम की है।
कबीरधाम ने सर्वाधिक मानव दिवस रोजगार सृजन, सर्वाधिक ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने और सर्वाधिक दिव्यांगजनों को काम देने जैसे महत्वपूर्ण पैरामीटर्स में प्रदेश में शीर्ष स्थान हासिल किया है। मनरेगा के तहत जिले में कुल 58 लाख 54 हजार 40 मानव दिवस का रोजगार सृजित किया गया जो पूरे प्रदेश में सबसे अधिक है। इसके साथ ही 1 लाख 42 हजार 482 ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया, जो जिले को इस श्रेणी में भी प्रथम स्थान पर ले गया। विशेष रूप से दिव्यांगजनों को रोजगार देने में भी कबीरधाम ने संवेदनशीलता और सक्रियता दिखाई है। जिले में 2538 दिव्यांगजनों को 58 हजार 493 मानव दिवस का रोजगार प्रदान किया गया जो प्रदेश में सर्वाधिक है।
मनरेगा में महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही है। जिले में 1 लाख 30 हजार 160 महिलाएं पंजीकृत हैं जिन्हें 29 लाख 33 हजार 959 मानव दिवस का रोजगार मिला है। इस श्रेणी में कबीरधाम प्रदेश में तीसरे स्थान पर रहा। यह आंकड़े बताते हैं कि योजना के माध्यम से महिलाओं को भी आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में प्रभावी कार्य हुआ है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले के 11 हजार 466 परिवारों को 100 दिनों का पूर्ण रोजगार मिला, जिससे उनकी आय में स्थिरता आई और जीवन स्तर में सुधार हुआ। कबीरधाम जिले का यह प्रदर्शन दर्शाता है कि प्रभावी योजना क्रियान्वयन, सतत निगरानी और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप कार्य करने से किस तरह बड़े परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
जिले में मनरेगा के तहत कार्यरत ग्रामीणों को 124 करोड़ 53 लाख 46 हजार रुपए का मजदूरी भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में किया गया। मजदूरी भुगतान के मामले में भी कबीरधाम प्रदेश में तीसरे स्थान पर है। समय पर भुगतान से ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिली है।
&ग्राम पंचायतों की मांग के अनुसार निर्माण कार्यों को स्वीकृति दी गई और वनांचल से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक बड़े पैमाने पर काम शुरू किए गए। साथ ही मजदूरी का समय पर भुगतान सुनिश्चित किया गया,ए जिससे ग्रामीणों को निरंतर रोजगार मिलता रहा।
गोपाल वर्मा, कलेक्टर
स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण, आजीविका बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया। आजीविका डबरी, नए तालाब निर्माण, पुराने तालाबों का गहरीकरण, कच्ची नाली निर्माण जैसे जल संरक्षण कार्यों के साथ-साथ कुक्कुट पालन शेड और पशुपालन शेड जैसी गतिविधियों को प्राथमिकता दी गई।
-अभिषेक अग्रवाल, सीईओ
Updated on:
02 Apr 2026 06:24 pm
Published on:
02 Apr 2026 06:23 pm
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