
कवर्धा. कवर्धा कृषि उपज मंडी भी राष्ट्रीय कृषि बाजार से जुड़ चुका है। इसके चलते यहां के किसानों की फसल भी राष्ट्रीय स्तर पर बिक्री होती है। 17 माह में कवर्धा कृषि उपज मंडी से 54 करोड़ के उपज बेचे जा चुके हैं।
अक्टूबर 2016 में राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी संख्या में कृषि उपज मंडी को ऑनलाइन नीलामी (ई-नाम) के माध्यम से जोड़ा गया। छत्तीसगढ़ राज्य के छह मंडी में कवर्धा कृषि उपज मंडी को भी शामिल किया गया। तब से कवर्धा कृषि उपज मंडी में अनाज, दलहन व तिलहन की बिक्री ऑनलाइन के जरिए हो रही है। शुरुआती दौर में मंडी के व्यापारियों ने इसमें रूचि नहीं दिखाई, लेकिन अब इनकी संख्या बढ़ रही है।
17 माह के भीतर कवर्धा मंडी से 54 करोड़ 47 लाख रुपए से अधिक की उपज राष्ट्रीय कृषि बाजार में बेचा जा चुका है। मतलब रोजाना औसतन 10 लाख रुपए से अधिक की उपज की बिक्री ऑनलाइन के माध्यम से हो रही है। इसमें चना, सोयाबीन, अरहर, तिवड़ा के अलावा सरना, महामाया और धान की 10 - 10 वैरायटी शामिल है।
जब से कृषि मंडी में ऑनलाइन बिक्री प्रारंभ हुई है तब से अब तक एक लाख 62 हजार क्विंटल चना, राहर, सोयाबीन, तिवड़ा और धान की बिक्री हो चुकी है। इसमें सबसे अधिक चना 58 हजार 987 और सायोबीन 54 हजार 987 क्विंटल की बिक्री हुई। इसमें कुल 12 हजार 75 विक्रेता ने हिस्सा लिया, जबकि 21 क्रेताओं की उपज बिक्री हुई।
कृषि मंडी से उपज के ऑनलाइन व राष्ट्रीय कृषि पर बिक्री से किसानों को फायदा मिलता है। इससे किसानों की फसल राष्ट्रीय बाजार में दिखाई देती है। यदि क्वालिटी बेहतर है तो दाम भी उचित मिलेगा। इसमें व्यापारी दाम को लेकर कांटामारी नहीं कर सकते। जैसे यहां का चना बहुत ही बेहतर माना जाना है, जिसके कारण इसकी डिमांड काफी रहती है।
कवर्धा कृषि मंडी में उपज खरीदी के लिए 74 क्रेताओं ने पंजीयन कराया है, जबकि इसमें 40 फीसदी ही लगातार खरीदारी में सक्रिया रहते हैं। इसका मुख्य कारण ऑनलाइन की शुरुआती दौर में होने वाली परेशानी रही।
कवर्धा के कृषि उपज मंडी के सचिव अरूण कुमार पाठक ने बताया कि ऑनलाइन उपज की खरीदी बिक्री को लेकर शुरुआती दौर में व्यापारियों की रूचि कम थी, लेकिन अब ठीक है। अब तक सवा लाख क्विंटल के आसपास उपज की बिक्री हो चुकी है।
Published on:
23 Mar 2018 03:04 pm
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