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बिना एक्सपायरी डेट लिखे खाद्य पदार्थों की हो रही खुलेआम बिक्री

बारिश के मौसम के चलते लोगों के खान-पान पर विशेष ध्यान रखा जाना आवश्यक होता है। इसके अलावा त्योहार के सीजन में डिमांड बढऩे के चलते मिलावटी मिठाइयों व अन्य खाद्य पदार्थों की बिक्री की संभावनाओं के मद्देनजर खाद्य पदार्थों के मानकों की जांच सम्बन्धी कवायद शुरू कर दी गई है। हालांकि यह महज औपचारिकता ही निभा रहे हैं।

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बिना एक्सपायरी डेट लिखे खाद्य पदार्थों की हो रही खुलेआम बिक्री

बिना एक्सपायरी डेट लिखे खाद्य पदार्थों की हो रही खुलेआम बिक्री

कवर्धा. खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग जांच के नाम पर महज औपचारिकता निभाते हैं। मिलावट की जांच में देरी होती है लेकिन अन्य सामग्रियों की तो जांच हो ही सकती है। जैसे ब्रेड, दूध, पैकेट में बिक्री वाली सामग्री। बाजार में कई ऐसे खाद्य सामग्री है जिसमें एक्सपायरी डेट ही नहीं लिखा होता। बच्चों के खाने के लिए तरह-तरह लोकल स्तर के खाद्य पदार्थ बिकते हैं जिससे बदबू तक आती है इसकी जांच नहीं की जाती। कई पानी पाउच बिक रहे हैं जिसमें उसमें भी निर्माण तिथि व एक्सपायरी डेट नहीं लिखा होता। इसी भी जांच नहीं हो रही।
रिपोर्ट के आधार कार्रवाई प्रावधान
राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला रायपुर व आवश्यकतानुसार अन्य राज्य स्थित प्रयोगशालाओं में भेजा जाता है। इसके अलावा चलित खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला के माध्यम से भी मौके पर खाद्य सामग्रियों की परीक्षण की प्राथमिक कार्रवाई की जाती है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 विनिमय 2011 की धारा 2/4/2 के तहत खाद्य विश्लेषक द्वारा विश्लेषण रिपोर्ट 14 दिनों के भीतर भेजे जाने का प्रावधान है। प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर अमानक स्तर के खाद्य पदार्थों के सम्बन्धित प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किया जाता है।
अधिकारी ही सुस्त
खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा जानकारी में बताया गया कि जनवरी 22 से कुल 63 खाद्य नमूना संकलित किया जा चुका है। इनमें से 19 नमूना मानक व 2 अमानक घोषित किया गया है। 42 नमूनों का जांच रिपोर्ट आना शेष है। अधिकारी ने जानकारी दी कि सिर्फ अगस्त माह में ही 24 खाद्य नमूना संकलित किया गया है, जिसकी रिपोर्ट नहीं आयी है। विभागीय कार्रवाई बेहद सुस्त गति से चलती है, जबकि रोजाना दबिश देना चाहिए।