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घर जमाई की मौत होते ही खुद की गर्भवती बेटी को घर से धक्के देकर निकला, लोग बने रहे तमाशबीन

पति के मौत के बाद अपनी बेटी को घर से धक्के देकर निकला दिया है

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घर जमाई की मौत होते ही खुद की गर्भवती बेटी को घर से धक्के देकर निकला, लोग बने रहे तमाशबीन

कवर्धा . इस जहान पर माता पिता ही भगवान होते हैं यह सभी मानते हैं, लेकिन यहां बैगा महिला के लिए उलटा साबित हो रहा है। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में एक पिता का साथ छूट जाने के बाद माता-पिता और भाई भी बैगा महिला को घर से निकाल दिए। इसके चलते 15 दिनों से महिला भटक रही है। ऐसे हालात में उस महिला को पोड़ी चौकी से सखी वन स्टॉप सेंटर भेज दिया।

बोड़ला थाना, पोड़ी चौकी अंतर्गत ग्राम गांगपुर की रहने वाली पर्वती का शादी सात साल पहले मानसिंह बैगा के साथ हुआ था। इसके बाद से दोनों माईके में ही रहते थे, लेकिन मानसिंह टीबी बीमारी से ग्रषित था। काफी इलाज कराने के बाद भी दो माह पहले ही मानसिंह की मौत हो गई। इसके कुछ दिन पार्वती को माता पिता ने अपने साथ रखा। लेकिन करीब 15 दिन पहले ही पिता धनसिंह बैगा ने भी पार्वती व उसके बच्चे को रखने से मना कर दिया। इसके बाद भी पार्वती रहने की कोशिश की, तो चचेरे भाई ने मकान में आग लगाकर भगा दिया। परेशान महिला बच्चे को साथ लेकर 15 दिन से भटक रही है। जिसे सखी वन स्टॉप सेंटर भेज दिया गया है।

पति की मौत के बाद पार्वती बिल्कुल अकेली हो गई। ऐसे में वह खुद ही मौत को गले लगाने का विचार किया, लेकिन पेट में पल रहे ९ माह के बच्चे व एक ६ वर्ष के लड़के के लिए पार्वती को जीना पड़ा। पति के जाने के बाद जब पार्वती को माता पिता का साथ नहीं मिला तो उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे और कहां जाए। इसके कारण वह पोड़ी चौकी पुलिस से संपर्क किए। इसके बाद पुलिस ने पार्वती को सखी वन स्टॉप सेंटर भेज दी। अब सखी वन स्टॉप सेंटर की कार्यकताएं महिला को कैसे न्याय दिलाया जाए। इस पर विचार कर रही है।

पति के मौत के किसी ने उनका साथ नहीं दिया। जब माता पिता और भाई ने ही उसे घर से निकाल दिया तो दूसरों से क्या सिकवा शिकायत करे। पार्वती बताती है कि रोजी मजदूरी कर दो वक्त के रोटी की जुगाड़ तो कर लेंगे, लेकिन पार्वती अपने बच्चों के भविष्य को लेकर ज्यादा चिंतित है।

पार्वती ने बताया कि पति के साथ वे माता पिता के घर पर ही रहते थे, लेकिन पति की मौत के बाद उसे माता पिता ने घर से निकाल दिया। भाई ने घर में आग लगा दी। इसके चलते 15 दिन पहले ही घर से निकल गई थी। खाने व पहनने के लिए कुछ नहीं था। इसके कारण वे गर्भ में 9 माह का बच्चा लिए पोड़ी के एक किराना दुकान में 15 दिनों तक काम की। इसके बाद वह पुलिस के माध्यम से सखी वन स्टॉप सेंटर भेजा गया। अब सखी वन स्टॉप सेंटर मामले की छानबिन के बाद बिलासपुर नारी निकेतन भेजने की तैयारी कर रही है।