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लघु उद्योग के नाम पर राइस मिल और गुड़ उद्योग मौजूद

कबीरधाम में उद्योग का नाम लेते हुए दो सहकारी शक्कर कारखाना और 300 से अधिक गुड़ फैक्ट्री की छवि आंखों के सामने आ जाती है। इसके अलावा भी उद्योग की याद करें तो राइस मिल मौजूद है। इसके अलावा जिले में प्रमुख रूप से लघु उद्योगों की कमी है। इसे बढ़ावा देने के लिए शासन-प्रशासन को प्रयास करने की आवश्यकता है।

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लघु उद्योग के नाम पर राइस मिल और गुड़ उद्योग मौजूद

लघु उद्योग के नाम पर राइस मिल और गुड़ उद्योग मौजूद

कवर्धा. 30 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय लद्यु उद्योग दिवस मनाया जाता है। और यह इसलिए मनाया जाता है ताकि लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया जा सके, लेकिन कबीरधाम में इसकी कमी है।
जिले में उद्योग तो है लेकिन सीमिति। उद्योग के नाम पर राइस मिल और सीजन में गुड़ फैक्ट्री ही हैं। इसमें भी सीजन में 300 से अधिक गुड़ फैक्ट्री लगते हैं पंजीकृत केवल 55 ही हैं। वहीं 60 राइस मिल उद्योग विभाग से पंजीकृत हैं। इसके अलावा कुछ ब्रीक्स व फ्लाइ एस के उद्योग लगे हुए हैं। जबकि जिले में गन्ना के अलावा चना, मक्का, मूंगफली जैसे फसल भी पर्याप्त मात्रा में उत्पादन होता है। इससे संबंधित उद्योग लगाए जा सकते हैं। साथ ही अन्य सामग्री निर्माण के उद्योगों की अत्यंत आवश्यकता है। उद्योग स्थापित होने से ग्रामीणों को रोजगार मिलता है साथ ही जिले की तरक्की होती है।
औद्योगिक क्षेत्र उद्योग कम
जिला मुख्यालय से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम हरिनछपरा को औद्योगिक विकास के लिए वर्ष २००६-०७ में औद्योगिक क्षेत्र घोषित किया गया है। कुल 51 एकड़ में इस क्षेत्र को विकसित किया गया है और इसमें 50 लाख लागत तक के उद्योग लगाए जा सकते हैं। यहां पर कुल ८१ प्लांट है। इसमें से अभी तक ७० प्लाट आबंटित हो चुके हैं लेकिन केवल ३८ इकाई स्थापित किए जा सके हैं। इसमें राईस मिल, फ्लाई एस, ब्रीक्स, पानी पाउच, दोना पत्तल, टायर, केमिकल, मसाला और जैविक खाद निर्माण के उद्योग लगे हैं।

आर्थिक दृष्टि से पिछड़े क्षेत्र
आर्थिक दृष्टि से विकासशील क्षेत्रों की सूची में जिला मुख्यालय कवर्धा शामिल है। वहीं जिले के तीन अन्य विकासखंड सहसपुर लोहारा, पंडरिया व बोड़ला को औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन के लिए आर्थिक दृष्टि से पिछड़े क्षेत्रों की सूची में शामिल किया गया है। सूक्ष्म उद्योगों के लिए औद्योगिक क्षेत्र निर्धारित कर उसे विकसित भी किया गया है, लेकिन विभिन्न कारण है जिसके चलते ही लोग यहां रूचि नहीं ले रहे हैं।
परिवहन के लिए रेल की व्यवस्था नहीं
जिले में उद्योगों को बढ़ावा नहीं मिलने का सबसे बड़ा कारण जिले में कच्चा माल परिवहन के लिए रेल परिवहन की सुविधा की कमी है। चूंकि सडक़ मार्ग से राज्य के बड़े शहर कोरबा, रायगढ़ के अलावा दुर्ग, बिलासपुर, भिलाई, रायपुर व राजनांदगांव सामान दूरी पर है और ये सभी शहर कवर्धा से सडक़ मार्ग से ही जुड़े हुए हैं। सडक़ मार्ग से माल के परिवहन में खर्च भी ज्यादा आता है, इसलिए लोग यहां उद्योग लगाने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
& लघु उद्योग में ५ लाख से ५ करोड़ रुपए के उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं। अभी शासन की सेवा योजना अंतर्गत २५ लाख तक और निर्माण योजना में ५० लाख रुपए तक के लोन मिल सकते हैं। चूंकि जिले में गन्ना और धान अधिक मात्रा में होती है तो इससे संबंधित उद्योग स्थापित करना बेहतर हो सकता है।
डीएल पुसाम, महाप्रंबधक, जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, कबीरधाम