तीसरे युग्म की प्रतिमाओं में नारी जीवन को केन्द्रित किया गया है। इनमें जान भरने के लिए विशेष कारीगरी की गई है और इन सभी को गहराई तक गढ़कर बनाया गया है। तीसरे युग्म की प्रतिमाओं में नारी जीवन की विविधता, सौंदर्य, भाव, नाग कन्याओं, देवदासियों और भंजिकाओं की रमणीयता को प्रमुखता से बताया गया है।