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मजदूर की मौत पर 25 हजार का मरहम, मंत्री के निर्देश भी नहीं माने

पीएम के समय मृतक के पिता को दिए थे 25 हजार

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Injured policeman dies, no clue of the vehicle that hit him

पटाजन. आंवल्या डेम के लिए 33 केवी बिजली लाइन डालने वाले ठेकेदार के लिए मजदूरों की जान की कोई कीमत नहीं है। 9 ?फरवरी को करंट से एक मजदूर की मौत पर उसने पिता को अंतिम संस्कार के लिए 25 हजार रुपए दिए थे।
इसके बाद मानवता के नाते ही सही ना परिवार के हालचाल जाने और ना ही कोई और मदद का भरोसा दिया। मृतक परिवार का बड़ा बेटा होने से पालन-पोषण का जिम्मा भी उसी पर था। मंत्री शाह ने भी ठेकेदार को उचित मदद के निर्देश दिए थे लेकिन उसने इसे भी अनदेखा कर दिया है।
मजदूर की करंट से मौत के करीब 20 दिन बाद मृतक विशाल के पिता चंद्रसिंग ने बताया खालवा में पोस्टमार्टम के समय ठेकेदार आया और 25 हजार रुपए देकर कहा बाद में और देखते हैं लेकिन अब तक एक फोन तक नहीं लगाया है। उसने करंट नहीं लगने बल्कि पोल से गिरने से मौत होना बताया था।
अब पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में करंट से ही मौत होने का खुलासा हुआ है। इसका मतलब है ठेकेदार चालू लाइन में ही मेरे बेटे से काम करवा रहा था। मेरे बेटे की जान उसी की लापरवाही से हुई है। अब पीएम रिपोर्ट के आधार पर रोशनी पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज कराएंगे। चंद्रसिंग ने कहा मेरे बेटे के साथ गांव के 7-8 युवक भी गए थे जो घर लौट आए हैं। काम करने वालों का बीमा भी था या नहीं यह भी ठेकेदार नहीं बता रहा है।

परमिट निरस्त होने के बाद भी कराता रहा काम
विशाल की मौत के दूसरे दिन पता चला था कि विद्युत कंपनी ने काम के लिए दोपहर 3.45 बजे तक ही परमिट दिया था लेकिन ठेकेदार देर शाम तक काम कराता रहा। करीब 6.30 बजे विशाल को 11 केवी लाइन का तार नई लाइन डालने वाले तार से छू गया था जिससे उसे करंट लगा और उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। ठेकेदार की इतनी बड़ी लापरवाही पर भी अब तक पुलिस, प्रशासन, विद्युत कंपनी सहित किसी भी विभाग ने उसकी जिम्मेदारी तय नहीं की है।

मंत्री शाह के निर्देश भी हवा
मृतक विशाल के पिता चंद्रसिंग ने बताया की 15 दिन पहले खंडवा वनमंत्री विजय शाह से मिलकर अपनी व्यथा सुनाई थी। मंत्री ने तत्काल ठेकेदार को फोन कर मृतक के परिवार को उचित आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अब तक ठेकेदार ने कोई ध्यान नहीं दिया है।
याद आते ही बेहोश हो जाती है मां
विशाल की मां अब तक बेटे की मौत के सदमे से उबर नहीं पाई है। उसकी आंखों के सामने बेटे की अर्थी घूमती रहती है। बेटे की याद आते ही वह बेहोश हो जाती है और उसे डॉक्टर के पास ले जाना पड़ता है। विशाल के पिता ने बताया बेटे की मौत को एक माह होने जा रहा है। इस बीच चार-पांच बार उसकी मां बेहोश हो चुकी है। उसकी ऐसी हालत के कारण मैं काम-धंधा भी नहीं कर पा रहा हूं।