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संत सिंगाजी के 502 वें अवतरण दिवस- कोरोना महामारी को समाप्त करने के लिए हुई विशेष पूजा-अर्चना

निमाड़ के निर्गुणी संत सिंगाजी महाराज के 502 वें अवतरण दिवस के मौके पर समाधी स्थल पर शुक्रवार सुबह संत सिंगाजी की चरण पादुका का शृंगार पंचामृत से पूजन किया गया।

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502nd incarnation day of saint singaji

502nd incarnation day of saint singaji

खंडवा/बीड़. निमाड़ के निर्गुणी संत सिंगाजी महाराज के 502 वें अवतरण दिवस के मौके पर समाधी स्थल पर शुक्रवार सुबह संत सिंगाजी की चरण पादुका का शृंगार पंचामृत से पूजन किया गया। मंदिर के महंत रतन महाराज के परिवार और पुजारी सहित कुछ भक्त ों द्वारा संत सिंगाजी महाराज के 502 वें अवतरण दिवस पर आरती की गई जिसमें कोरोना महामारी को समाप्त करने के लिए संत सिंगाजी महाराज से प्रार्थना की गई । जिसके बाद समिति मात्रा में हलुआ प्रसादी का किया गया।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी संत सिंगाजी महाराज की जयंती के अवसर पर भोपाल स्थित अपने निवास में उनके चित्र पर माल्यार्पण किया। वहीं क्षेत्रीय विधायक विधायक नारायण पटेल ने भी क्षेत्र की जनता को संत सिंगाजी महाराज के 502 वै अवतरण दिवस पर बधाई देते हुए कोरोना नियमों का पालन करने की अपील की। ज्ञात हो कि सिंगाजी महाराज का जन्म ग्राम खजूरी जिला बड़वानी मध्यप्रदेश में हुआ। संत सिंगाजी को 16वीं या 17वीं शताब्दी के काल का माना जाता है। कहा जाता है कि सिंगाजी एक कवि व संत थे। खंडवा जिले में संत सिंगाजी की समाधि हैं, प्रतिवर्ष मेले का आयोजन भी होता है। संत सिंगाजी के आध्यात्मिक गीत आज तक गाए जाते हैं। खंडवा जिले में निर्मित थर्मल पावर प्लांट मूंदी का नाम संत सिंगाजी के नाम पर रखा गया है।
463 वर्षों से जल रही अखंड ज्योत
बता दें की संत सिंगाजी महाराज ने यहां पर जीवित समाधी ली थी तब से लेकर आज तक 463 साल से यहां पर अखंड ज्योती जल रही हैं जिसको घी से जलाया जाता है। सिगांजी भवत यहा पहुचाते है संत सिंगाजी महाराज चमत्कारी पुरुष थे संत सिंगाजी महाराज के समाधी के बाद भी आज तक यहां मन की मुराद लोगों की पूरी होती है और चमत्कार देखने को मिलते। यहां पर समाधी पर मन्नत पूरी होने निशान चढाने के साथ तुलादान भी होता है। निमाड़ में घर-घर में संत सिंगाजी की पूजन आरती भजन होते है। जब भी कोई शुभ कार्य किया जाता है तो सबसे पहले संत सिंगाजी महाराज का जयकारा लगाया जाता है।