
Amazing Darshan at Omkareshwar Mahadev Jyotirlinga
पीयूष तिवारी
ओंकारेश्वर (खंडवा). जैसे ओम शब्द में पूरा ब्रह्मांड विद्यमान हैं, सभी देवी देवताओं के मंत्र ओंम शब्द से शुरू होते हैं। उसी तरह ओंकार पर्वत भी अपने में बहुत सारे रहस्यों को छिपाए है। इसलिए राजा मांधाता ने अपनी तपस्या के लिए इस स्थान का चुनाव किया। यहां महल बनवाए, भगवान ओंकारेश्वर मंदिर की स्थापना की। इसके अलावा भी कई मंदिरों को भी बनवाया। कई एेसे राज हैं जो आज भी लोगों के लिए अनोखे हैं। इसी में परिक्रमा मार्ग में स्थित चांद सूरज द्वार है। यहां आज भी सूर्य की पहली किरण स्पर्श करती है। इसे लेकर वहां पर चांद और सूरज की प्रतिमा भी बनी हुई है, जहां श्रद्धालु पूजा पाठ करते हैं।
ओंकार पर्वत पर राजा मांधाता के पुत्र मुचकुंद ने एक महल बनवाया, जिसमें चार प्रवेश द्वार बनवाए गए। सबसे प्रमुख प्रवेश चांद सूरज द्वार बनवाया। महल के उत्तर दिशा में स्थित प्रवेश द्वार कावेरी नदी की ओर है। प्रवेश द्वार से हाथी पर बैठा आदमी भी आराम से निकल सकता है। इस प्रवेश द्वार की दीवार में पूर्व की ओर भगवान सूर्य की प्रतिमा और पश्चिम की ओर चंद्र देव की प्रतिमा स्थापित की गई है।
ये है द्वार की विशेषता
चांद सूरज द्वार की विशेषता यह है कि पर्वत की सबसे उंचाई वाले स्थान पर बना हुआ है। यहां से सिद्धवरकूट, संगम आदि दिखता है। वहीं इस द्वार पर सुबह की सबसे पहली किरण देखने को मिलती है। इसके अलावा भी शाम के समय ढलते हुए सूरज के साथ चंद्रमा भी दिख जाते हैं। इस प्रवेश द्वार को बनाने में वास्तुकला का भी ध्यान रखा गया है, जो पुराने पत्थरों को तराशकर बनाया गया है। ओंकार पर्वत के परिक्रमा मार्ग में इस द्वार सहित कई अन्य एेसी चीजें हैं, जिन पर पुरातत्व विभाग रिसर्च कर रहा है। कुछ साल पहले जब पुरातत्व विभाग ने यहां खुदाई कराई तो पुराने जमाने की गिन्नियां और लोगों के निवास करने के अवशेष मिले। इसलिए पुरातत्व विभाग इस पूरे क्षेत्र को संरक्षित कर दिया है। इसलिए इस क्षेत्र में खुदाई करना निर्माण आदि पर प्रतिबंध लगा हुआ है।
आज पर्वत परिक्रमा पर निकलेंगे ओंकार महाराज
भादो माह के पहले सोमवार को दोपहर 2 बजे ओंकार महाराज पालकी में सवार होकर ढोल नगाड़ों एवं भक्तों के साथ रवाना होंगे। पालकी कोटी तीर्थ घाट पर जाएगी नर्मदा के तट पर पंडितों की ओर से संक्षिप्त पूजा अर्चना की जाएगी। आरती के बाद मुख्य बाजार से होते हुए परिक्रमा मार्ग से ओंकार पर्वत की परिक्रमा करने के लिए रवाना होगी। ओंकार मठ आश्रम, मां आनंदमई आश्रम, बर्फानी धाम होते हुए ऋण मुक्तेश्वर महादेव पहुंचेगी। ऋण मुक्तेश्वर से संगम घाट पर जाएगी। कावेरी नर्मदा के पवित्र संगम पर ओंकार महाराज का विद्वान पंडितों की ओर से वेद मंत्रोच्चार के साथ पंचोपचार अभिषेक पूजन किया जाएगा। महाआरती के बाद गुलाल उत्सव मनाया जाएगा, संगम घाट से रवाना होकर राधा कृष्ण मंदिर खड़ेश्वर बाबा आश्रम होकर ओंकार पर्वत के मध्य बिंदू गौरी सोमनाथ महादेव पहुंचेगी, गौरी सोमनाथ मंदिर से राजराजेश्वरी संस्थान भोली माता आश्रम चांद सूरज गेट होते हुए प्राचीन सिद्धनाथ महादेव मंदिर पर पहुंचेगी। सभी प्राचीन शिव मंदिरों में जलाभिषेक पूजन किया जाएगा। यहां से विरखला होकर परिक्रमा पुल पार करेगी रात्रि 8.30 बजे वापस मंदिर में पहुंच जाएगी, जहां आरती की जाएगी।
Published on:
14 Aug 2017 04:40 pm
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