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टापू पर बने इस मंदिर में भीम ने की थी शिव की पूजा

इसलिए इस मंदिर का नाम पड़ा भीम कुंड शिव मंदिर

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खंडवा

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Rahul Singh

Jul 29, 2018

Bhimkund Shiva temple Khandwa

Bhimkund Shiva temple Khandwa

खंडवा. शहर से करीब चार से पांच किलोमीटर दूर आबना नदी के टापू पर स्थित है प्राचीन भीमकुंड शिव मंदिर। चारों तरफ से पानी से घिरे इस मंदिर पर पहुंचने के लिए पक्का रास्ता नहीं है, पगडंडी के सहारे रास्ता तय करना पड़ता है। मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको नदी पार करना होगी, यदि बारिश हो रही है तो यहां जाना मुश्किल ही होगा। हल्की बारिश में पानी के बीच से होकर मंदिर जाना होगा। भोले बाबा के दर्शन के लिए स्थानीय लोगों ने नदी पर पत्थर डालकर अस्थाई रास्ता बना लिया है जिसके सहारे आप नदी पार कर मंदिर तक पहुंच सकते हैं। चारों ओर से फलदार पौधों और विशाल बरगद के पेड़ के नीचे भीमकुंड मंदिर में विराजे हैं भोले बाबा। चारों तरफ हरियाली, पेड़ों पर चहचहाते पक्षी और पास ही बहती आबना नदी, यह नजारा बेहद ही सुकून देने वाला है। कहते है कि महाभारत काल के समय पांडव अज्ञातवास के समय इस धरती पर पहुंचे थे और भीमकुंड जहां स्थापित है वहां भीम ने तपस्या के लिए शिवलिंग की स्थापना की थी। यहां छोटी और बड़ी आबना नदी का संगम भी है।


रामेश्वर
- उत्तर में रामेश्वर कुंड है। महत्व यह है कि रामायण काल में वनवास के बाद पुष्पक विमान से लौटते समय भगवान श्रीराम सीता व लक्ष्मण इस स्थान पर रूके। यहां सीता बावड़ी भी है। तब से यह रामेश्वर कुंड के रूप में विराजमान है। प्राचीनकाल की पद्मावति देवी की मूर्ति भी स्पष्ट दिखाई देती है।


पदमकुंड

- पश्चिम में पदमकुंड का इतिहास है कि यहां पूर्व में बहुतायत में कमल के फूल खिलते थे और पदम को कमल कहा जाता है और यह लक्ष्मी का प्रतीक है। इस कुंड में प्राचीनकाल की पद्मावति देवी की मूर्ति भी स्पष्ट दिखाई देती है।


सूरजकुंड
पूर्व दिशा में सूरजकुंड को यह नाम सूर्योदय को लेकर कहा गया। कहते हंै कि सूर्य की प्रथम किरण सूरजकुंड पर पड़ती है। सावन माह में यहां भी भगवान के दर्शन के लिए भक्तों की कतार लगी रहती है।