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मप्र भाजपा अध्यक्ष को भाषण देने के तुरंत बाद मंच पर कराना पड़ा इलाज

भारतीय जनता पार्टी मप्र के अध्यक्ष नंदकुमारसिंह चौहान को खंडवा में इलाज कराने की स्थिति बन पड़ी।

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खंडवा

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Amit Jaiswal

Jan 25, 2018

bjp state president nandkumar singh chauhan Latest News in Hindi

bjp state president nandkumar singh chauhan Latest News in Hindi

खंडवा. शहर के यातायात में बड़े सुधार के नजरिए से नई अनाज मंडी के पीछे नगर निगम ने ट्रांसपोर्ट नगर विकसित करने की कार्ययोजना बनाई है। बहुप्रतीक्षित इस प्रोजेक्ट में निर्माण कार्यों के लिए बुधवार शाम को भूमिपूजन हुआ। यहां सांसद व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमारसिंह चौहान ने भाषण दिया लेकिन इसके तुरंत बाद डॉक्टर को बुलवाया गया।


प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमारसिंह चौहान की आंखों में तकलीफ की शिकायत के बाद यहां जांच करने के लिए डॉ. सुभाष जैन पहुंचे। उन्होंने मंच पर प्रदेशाध्यक्ष की आंखों की जांच करने के बाद कहा कि ड्रॉप दे दिया है। जल्द ही ठीक जाएंगे। महापौर सुभाष कोठारी, विधायक, देवेंद्र वर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष हरीश कोटवाले, निगमाध्यक्ष रामगोपाल शर्मा, आयुक्त जेजे जोशी, कार्यपालन यंत्री ईश्वरसिंह चंदेली व अन्य उपस्थित थे।


भाषण में ये बोले प्रदेशाध्यक्ष चौहान
ट्रांसपोटर्स व मैकेनिकों की संख्या भूमिपूजन कार्यक्रम में कम रही। ये देखकर सांसद व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमारसिंह चौहान ने पानी, रेल का किस्सा सुनाया। कहा- बहकाते हैं लोग। अच्छे काम में रूकावट आती है। लेकिन यहां जो पहले आएगा वो पहले पाएगा। कुछ होशियार लोग पहले से जगह ले लेंगे, बाद में ब्लैक में बेचेंगे। ट्रांसपोर्ट व्यवसायी, मैकेनिक, स्पेयर पाट्र्स से जुड़े लोगों के लिए रियायत दर पर यहां प्लॉट दिए जा रहे हैं। इससे निगम की कोई कमाई नहीं है। हिसाब जोड़ेंगे तो निगम 1-2 करोड़ ज्यादा ही खर्च करेगा। सांसद चौहान ने कहा कि यहां संजयनगर की गाइडलाइन लागू की है। सड़क के उस पार की जमीन डेढ़ हजार रुपए स्क्वेयर फीट है, जबकि यहां 600 रुपए है। ये अवसर है, इसका फायदा ले लो। मेरे पास तो ट्रक है नहीं, नहीं तो मैं भी

पानी और रेलगाड़ी के ये किस्से सुनाए
चौहान ने कहा कि गांधीसागर पर बांध बना तो ये कहा गया कि ये यहां से जो बिजली बनेगी और जब पानी से ये निकल जाएगी तो बगैर ताकत का पानी आए, फसलें बिगाड़ेगा। खेत खराब हो जाएंगे। इस पर आंदोलन हुए। इसी तरह रेलगाड़ी के मामले में भी हुआ। इसका आविष्कार लंदन में हुआ। पहली रेल चलाना मुश्किल हुआ, क्योंकि समाज चाहे अमरीका का हो, लंदन का हो या हिंदुस्तान का। मन में झिझक रहती है। वहां रेल शुरू हुई तो ट्रायल के लिए दो डिब्बे लगाए, इंजन आवाज करता था। मुफ्ट में ट्रायल में बैठने के लिए निमंत्रण दिया गया, लोग बैठे नहीं, ये तो शैतान का रूप है। ट्रायल तो लेना था, सरकार ने जेल के कैदियों को हथकडि़या डाल के बैठा कर ट्रायल लिया। जब पहली रेलगाड़ी चली तो उसमें खुले दिमाग के लोग नहीं बैठे, वो मजबूर कैदी लोगों को बैठाकर चली। ट्रांसपोर्ट नगर में भी जो पहले आएगा, वो पहले पाएगा, बाद वाले पछताएंगे, तरसेंगे।