नगर निगम में नई परिषद गठन के पांच माह बाद भी नहीं हो सकी पहली बैठक , पूर्व में शपथ के दो माह के भीतर ही हो गई थी साधारण सभा की बैठकें
खंडवा. शहर सरकार की नई परिषद गठित होने के पांच माह बाद भी साधारण सभा नहीं हो सकी। इससे पहले की परिषदों ने गठन होने के अधिकतम दो माह में ही पहली बैठक पूरी कर ली थी। लेकिन मौजूदा परिषद ने पहली साधारण सभा की बैठक महीनों तक नहीं बुलाने का नया रेकॉर्ड दर्ज करवा लिया है। बैठक नहीं होने से विकास पर नीतिगत चर्चा नहीं हो पा रही है। आयुक्त, महापौर और एमआइसी के अनुमोदन पर चुने हुए प्रतिनिधि भी सवाल नहीं उठा पा रहे हैं।
मार्च के पहले सप्ताह में ही साधारण सभा हुई
निगम रेकॉर्ड के तहत पहली परिषद का गठन वर्ष 1994-95 में हुआ था। तत्कालीन परिषद का गठन जनवरी में हुआ। अणिमा उबेजा पहली महापौर बनी, मार्च के पहले सप्ताह में ही साधारण सभा हुई। इसी तरह वर्ष 2000 में महापौर तराचंद चंद अग्रवाल, वर्ष 2005 में वीर सिंह, 2010 में भावना शाह और 2014-15 में सुभाष कोठारी महापौर बने। सभी महापौर ने गठन के दो माह बाद साधारण सभा की पहली बैठक करवा ली। इसके बाद नई परिषद का गठन 7 अगस्त 2022 को हुआ। तब से लेकर आज तक साधारण सभा नहीं हुई।
पार्षद शहर के विकास पर चर्चा नहीं कर पा रहे हैं
इससे जनता के द्वारा चुने गए पार्षद शहर के विकास पर चर्चा नहीं कर पा रहे हैं। नियम है कि साधारण सभा की बैठक हर माह होनी चाहिए या फिर अधिकतम तीन माह के भीतर हो जाए। लेकिन शहर सरकार की नई परिषद के गठन के पांच माह बीत गए अभी तक साधारण सभा नहीं हुई। इससे नई परिषद शहर के विकास को लेकर एक भी बड़ा निर्णय नहीं कर पाई है।
साधारण सभा की बैठक की तारीख भी जल्द निर्धारित की जाएगी। शहर विकास के सभी कार्य चल रहे हैं। तो पांच करोड़ तक के कार्य एमआइसी को पॉवर है। बड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए अगले माह तक बैठक बुलाने की तैयारी है।
अमृता यादव, महापौर
एमआइसी 50 हजार की पुलिया तो पास नहीं कर पा रही है, पांच करोड़ की बात दूर है। छोटे-छोटे कार्य नहीं हो पा रहे हैं। साधारण सभा की बैठक पांच माह में एक भी नहीं हुई। जवाब नहीं देना पड़े इस लिए बैठक नहीं बुला रहे है।
दीपक राठौर, नेता प्रतिपक्ष, ननि
साधारण सभा की बैठक परिचय सम्मेलन के साथ हो जाती है। महापौर जी साधारण सभा कब बुलाएंगी। ये उनका नीतिगत मामला है, लेकिन शहर का विकास किसी तरह से प्रभावित नहीं हैं। चालीस लाख रुपए तक के कार्य के अनुमोदन की अनुमति स्वयं मेरे पास है।
निलेश दुबे, आयुक्त, ननि