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99 वां स्थान खंडवा ने देश में पाया लेकिन निमाड़ में ही पिछड़ गए हम

हमसे आगे खरगोन और बुरहानपुर
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Clean Survey -2018

Clean Survey -2018

खंडवा. स्वच्छ सर्वेक्षण-2018 का रिजल्ट शनिवार को घोषित हो गया। देश में ९९वां स्थान हासिल कर खंडवा टॉप-100 से बाहर होने से बच गया। १ लाख से अधिक जनसंख्या वाले 500 शहरों में खंडवा को ये रैंकिंग मिली है। इससे बेहतर स्थिति तो बीते साल थी। शहर को इस साल २६ स्थान का नुकसान हुआ है। क्योंकि सर्वे में शामिल देश के १ लाख से कम जनसंख्या वाले 3541 शहरों को राज्य व क्षेत्रीय रैंकिंग मिली है। शहरों के बीच 4 हजार अंकों के लिए प्रतिस्पद्र्धा थी। इससे पहले दिसंबर-2017 में मप्र सरकार द्वारा तय एजेंसी द्वारा यहां प्री-सर्वे किया गया था। जिसमें 2199 अंक मिले थे। वर्ष 2017 में दो हजार अंकों में से 1319 अंक मिले थे। अब स्वच्छ भारत अभियान के तहत शहरों को होटलों की तरह 1 से लेकर 7 तक की स्टार रेटिंग मिलना है, इसके लिए ज्यादा मेहनत व प्रयास करने होंगे।
शहर को एेसे मिले हैं अंक...
394 अंक सर्विल लेवल प्रोग्रेस (1400 कुल में से)
1036 अंक डायरेक्टर ऑब्र्जवेशन (1200 कुल में से)
1158 अंक सिटीजन फीडबैक व स्वच्छता एप (1400 कुल में से)
2588 अंक मिले हैं शहर को कुल 4 हजार अंक में से

इस बार एेसे चला था सर्वे...
- 29 जनवरी से २ फरवरी तक पांच दिन टीम रही थी यहां।
- 5 दिन तक इस साल पहली बार ही चला था स्वच्छता सर्वे।
-3 दिन तक चारों दिशा में 150 स्थानों पर घूमी थी टीम।
- 2 दिन तक दस्तावेजों की जांच में ही जुटे रहे थे सदस्य।

ये भी जानिए
- 2015 से हुई थी स्वच्छ सर्वेक्षण की शुरुआत, 476 शहर शामिल थे उस समय।
- 2016 में 473 और 2017 में 434 शहरों को स्वच्छ सर्वेक्षण में किया गया था शामिल।

निगम ने एेसे किए थे प्रयास...

- 50 वार्डों में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन करवाना शुरू किया
- 100 फीसदी कचरा कलेक्शन के लिए लोगों में जागरूकता लाई गई
- 5406 व्यक्तिगत शौचालय बनवाकर खुले में शौच मुक्त करने का प्रयास
- 7.94 करोड़ रुपए से ज्यादा रुपए इन व्यक्तिगत शौचालयों पर खर्च किए गए
- 600 से अधिक सफाई अमले की बायोमैट्रिक अटेंडेंस सिस्टम शुरू किया
- 100 रुपए से लेकर 5000 हजार रुपए तक जुर्माना कचरा फेंकने वालों पर किया

इन मुद्दों पर निगम रहा कमजोर...
- घरों से ही गीला-सूखा कचरा अलग-अलग कराने में पूरी तरह सफलता नहीं मिल पाई।
- ट्रेंचिंग ग्राउंड पर कचरे के पहाड़ और वहां सेग्रिगेशन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं कर पाए।
- शहर अब भी खुले से शौचमुक्त नहीं हो पाया है, कागजों में भले ही ओडीएफ का दर्जा मिला।
- सुविधाघरों में बायोमैट्रिक मशीनें तो दिल्ली की टीम आने के ठीक पहले ही लगाईं गई थीं।
- व्यावसायिक क्षेत्रों की दो बार सफाई के मामले में पिछड़े, रात की सफाई व्यवस्था भी कमजोर।

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