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धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान… आकांक्षी जिले के कारण रुका अभियान, अब 601 गांवों के लिए नया प्रस्ताव भेजा

-ग्राम उत्कर्ष अभियान में पहले बने थे 305 गांवों के प्रस्ताव, आया नया आदेश -601 गांवों का प्रस्ताव गया राज्य शासन के पास, स्वीकृति मिलना बाकी -केंद्र के अभियान में 18 विभागों की 25 सेवाएं मिलेंगी गांवों में

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खंडवा

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Manish Arora

Dec 04, 2024

Dharti Aaba Gram Utkarsh Abhiyan

खंडवा. जिला पंचायत कार्यालय खंडवा

केंद्र सरकार द्वारा आदिवासी समुदायों के विकास और जीवन स्तर को सुधारने के लिए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान की शुरुआत की गई है। प्रदेश सहित जिले में भी अभियान के तहत शासन के 18 विभागों की 25 सेवाओं का लाभ गांवों तक पहुंचाया जाएगा। जिले में अभियान की शुरुआत तो हुई, लेकिन आदिवासी समुदाय को लाभ मिलना शुरू नहीं हो पाया है। इसका मुख्य कारण पहले से बने प्रस्तावों के अलावा भी नए गांवों का चयन होना सामने आ रहा है।

खंडवा केंद्र सरकार के आकांक्षी जिलों में शामिल है। पहले धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत 305 गांवों का चयन किया गया था। इन गांवों में शासन के 18 विभागों द्वारा 25 कार्यों के प्रस्ताव भी बनाकर तैयार कर राज्य शासन को भेज भी दिए गए थे। अभियान की शुरुआत होने से पहले आकांक्षी जिले का मामला सामने आया और राज्य शासन द्वारा गांवों की संख्या बढ़ाने को कहा गया। अब जिले में कुल 605 गांवों में शासन की योजनाओं का लाभ आदिवासी ग्रामीणों तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए कलेक्टर के निर्देश पर जिला पंचायत द्वारा बढ़ाए गए गांवों को लिए भी प्रस्ताव बनाकर भेजे गए हैं, जिसकी स्वीकृति आना बाकी है। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान की शुरुआत 2 अक्टूबर से की गई है।

ये लाभ पहुंचाया जाएगा अभियान में
अभियान में सभी जनजातीय परिवारों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए कौशल विकास, उद्यमिता संवर्धन और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। सभी पात्र जनजातीय परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराना और उनके गांवों में सडक़, पानी, बिजली जैसी बुनियादी सेवाओं का विस्तार किया जाएगा। अधिक से अधिक मोबाइल मेडिकल यूनिट्स (एमएमयू) की स्थापना की जाएगी, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर पहुंच सुनिश्चित की जा सके। इसी प्रकार जनजातीय क्षेत्रों में ज्यादा से ज्यादा जनजातीय बहुउद्देशीय विपणन केंद्र (टीएमएमसी) शुरू करने के प्रयास किये जाएंगे, जिससे जनजातीय परिवारों को उनकी अपनी कला, संस्कृति, चित्रकारी, वनोपज संग्रहण, शहद, कोदो-कुटकी, ज्वार-बाजरा, महुआ से तैयार उत्पादों, जड़ी-बूटी से प्राकृतिक उपचार ज्ञान कौशल की बेहतर मार्केटिंग हो सकें और जनजातियों की उन्हीं के गांव में ही आमदनी बढ़ाई जा सके। इससे जनजातियां पलायन भी नहीं करेंगी।

प्रस्ताव बनाकर भेज दिए
आकांक्षी जिला होने से गांवों की संख्या बढ़ाई गई है। हमने राज्य शासन को प्रस्ताव बनाकर भेज दिया है। वहां से फंड रिलीज होना बाकी है। स्वीकृति आते ही अभियान के तहत कार्यक्रम कर हितग्राहियों को लाभांवित किया जाएगा।
डॉ. नागार्जुन बी गौड़ा, जिला पंचायत सीइओ

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