
अपनी धरती की तलाश में कर्मवीर...-खंडवा के बाद अस्तित्व में आए रीवा परिसर को मिल गया 40 करोड़ का भवन-भोपाल में 50 एकड़ के भवन में शुरू हुआ माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय
खंडवा.
कलम के सिपाही कर्मवीर पदभूषण माखनलाल चतुर्वेदी की कर्मस्थली खंडवा में अब भी वह सपना किराए के भवनों पल रहा है, जिसे एमसीयू भोपाल से पहले देखा गया था। दरअसल भोपाल में संचालित पं. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की स्थापना खंडवा में ही होना थी, लेकिन 30 साल पहले यह विश्वविद्यालय भोपाल में स्थापित हो गया और खंडवा के हाथ लगा इस यूनिवर्सिटी का विस्तार परिसर। यह परिसर भी पिछले 22 सालों से किराए के भवनों में संचालित हो रहा है।
पत्रकारिता में मास्टर की डिग्री हासिल करने के लिए देशभर के विद्यार्थी यूनिवर्सिटी के भोपाल खंडवा और रीवा परिसरों में पहुंचते हैं, लेकिन खंडवा में यूनिवर्सिटी का विस्तार परिसर कर्मवीर विद्यापीठ किराए के भवनों के संचालित होने से खंडवा परिसर कभी भी विद्यार्थियों की पहली या दूसरी पसंद नहीं बन पाया। खंडवा के बाद अस्तित्व में आए रीवा परिसर अब विशाल भवन में स्थानांतरित हो गया है। यह भवन 40 करोड़ रुपए की लागत से बनकर तैयार हुआ है। जबकि खंडवा परिसर कर्मवीर विद्यापीठ अब भी किराए के भवनों में किसी छोटे प्रायवेट इंस्टीट्यूट की तरह संचालित हो रहा है। भवन और इंफ्रास्ट्रक्चर के अभाव में खंडवा केवल वही विद्यार्थी पहुंच पाते हैं जो भोपाल में प्रवेश लेने से चूक जाते हैं। कर्मवीर विद्यापीठ की स्थापना के समय से ही यहां पर अपना भवन होने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन अब तक यह कोशिशें फाइलों में ही जारी हैं और दादा की नगरी में उनके नाम का विश्वविद्यालय दयनीय स्थिति में संचालित हो रहा है।
फिल्म पत्रकारिता पाठयक्रम भी छिना
महान गायक, अभिनेता और निर्देशक किशोर कुमार की जन्मभूमि होने से खंडवा परिसर के लिए एमसीयू ने फिल्म पत्रकारिता का कोर्स डिजाइन कराया था, लेकिन खंडवा परिसर में उम्मीद के अनुकूल आवेदन नहीं आने के बाद यह कोर्स भोपाल परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया है। खंडवा परिसर के लिए यह दूसरा बड़ा आघात माना जा रहा है। गणतंत्र दिवस पर भोपाल में 50 एकड़ क्षेत्र में बने परिसर के उदघाटन के समय प्रख्यात फिल्म निर्देशक अशोक शरण ने कुलपति प्रोफेसर केजी सुरेश की मौजूदगी में फिल्म पत्रकारिता कोर्स का उदघाटन किया।
जमीन के लिए अब तक हुए प्रयास
खंडवा परिसर को स्वयं के भवन में लाने के लिए पिछले 15 सालों से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कर्मवीर के लिए सबसे पहले छैगांवमाखन में अग्रवाल ओवरसीज के पास जमीन चिह्नित की गई थी। यह जमीन परिसर को आवंटित भी हो गई थी, लेकिन कुछ समय बाद सरकार का एक पत्र यूनिवर्सिटी को मिला कि यह भूमि अब यूनिवर्सिटी को नहीं दी जाएगी। सरकार द्वारा छैगावमाखन की जमीन यूनिवर्सिटी को देने से मना करने के बाद शहर से सटे हुए चीराखदान इलाके गड्ढे की जमीन कर्मवीर और संगीत महाविद्यालय को आवंटित की गई, लेकिन यह जमीन इतनी खराब थी कि इसे लेवल करने में भवन बनाने का सारा फंड खत्म हो रहा था साथ ही यहां तक पहुंचने का रास्ता भी हीं था। इसके एवज में म्यूजिक एंड आर्ट कॉलेज को फारेस्ट की जमीन दे दी गई और यूनिवर्सिटी फिर खाली हाथ रह गई।
केंद्रीय विद्यालय के पास मांगी 5 एकड़ जमीन
पहले दोनों प्रस्ताव खारिज होने के बाद यूनिवर्सिटी ने केंद्रीय विद्यालय के पीछे जहां तहसील कार्यालय स्थानांतरित होने वाला है, वहां पांच एकड़ जमीन मांगी है। इस जमीन के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजे हुए छह माह हो चुके हैं, लेकिन अबतक सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं मिल पाया है। यहां पर करीब दस एकड़ सरकारी जमीन खाली है। यह भूमि सरकार कर्मवीर के लिए देती है तो खंडवा परिसर भी देशभर में अपनी पहचान बना पाएगा।
Published on:
30 Jan 2022 11:51 am
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