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अच्छी खबर: बेर के पेड़ पर लाख कीट लगाकर किसान कमा सकते हैं लाखों रुपए

जिले में हो रहा लाख के उत्पादन का प्रयोग, जुलाई से मिलने लगेगा किसानों को बीज, वैज्ञानिक ने किया निरीक्षण, बेर के पेड़ पर पालेंगे लाख कीट बीहन

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Good news: Farmers can earn millions of rupees by planting lakh insects on trees

Good news: Farmers can earn millions of rupees by planting lakh insects on trees

खंडवा से अवधेश गंगराड़े की रिपोर्ट....
खंडवा. लाख की खेती करने के इच्छुक किसानों के लिए अच्छी खबर है। जिले में पहली बार लाख के उत्पादन के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र में बेर और तुअर के पौधों पर लाख के कीट को तैयार करने के लिए प्रयोग शुरू किया गया है। इस प्रयोग के सफल होते ही जुलाई से जिले के किसानों के लिए बीज का वितरण शुरू कर दिया जाएगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक कृषि विज्ञान केंद्र में लाख की व्यावसायिक कीट 'बीहनÓ की प्रजाति को लाया गया है। इसकी एकड़ में लागत दो हजार रुपए आती है। यदि सबकुछ ठीक रहा तो एकड़ में इस कीट से ४० से ५० हजार रुपए तक का लाख निकलता है।
कम उत्पादन से कीमत ज्यादा...
भारत लाख उत्पादन में प्रथम है लेकिन मध्यप्रदेश की बात करें तो केवल ३ से ४ स्थानों पर ही इसका उत्पादन होता है। इसका प्रोसेसिंग प्लांट सिवनी में है। वहीं शहडोल सहित एक अन्य जिले में भी कम मात्रा में लाख उत्पादन होता है। पूरे प्रदेश में लाख उत्पादन की स्थिति सालाना ६५ हजार क्ंिवटल है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक तुअर के पौधे पर लगने वाला लाख बाजार में किसान को करीब १२० रुपए किलो मिल जाता है। लेकिन खेत की मेढ़ पर लगे बेर के पेड़ पर लगने वाले लाख की कीमत २०० तक होती है।

एक नजर...
01 तुअर के पौधे में ९०० ग्राम अरहर व ४०० ग्राम लाख का उत्पादन
800 पौधे तुअर के एक एकड़ में रोपे जाते हैं
02 दो हजार रुपए एकड़ में लागत
01बीहन कीट करता है ०.२९ ग्राम लाख का उत्पादन

लाख की खेती करना है आसान...
- आसानी से बिना नुकसान के लाख का उत्पादन संभव
- बाजार में मांग ज्यादा होने से किसानों कमा सकते हैं अच्छा-खासा मुनाफा
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी लाख की पूछपरख
- प्रदेश में कम क्षेत्रों में है उत्पादन

कीड़ों का रक्षा कवच होता है लाख...
लाख केरिना लाका नामक कीट से उत्पादित होने वाली प्राकृतिक राल है। लाख के कीड़े पलाश, बेर के पेड़ों सहित तुअर के पौधों पर पाले जाते हैं। यह इसकी शाखाओं से रस चूसकर भोजन प्राप्त करते हैं। अपनी सुरक्षा के लिए राल का स्त्राव कर कवच बना लेते हैं। बाद में इसे काटी गई टहनियों से खुरच कर निकाला जाता है।

इन चीजों में होता इस्तेमाल...
शृंगार की वस्तुएं, सील, चपड़ा, विद्युत कुचालक, वार्निश, फलों व दवा पर कोटिंग, पॉलिश व सजावट की वस्तुएं तैयार करने में किया जाता है। इस तरह यह बहुउपयोगी है।
साल में दो बार ले सकते हैं उत्पादन...
बीहन लाख से शिशु कीट के निकलने के बाद बाकी लाख लगी डंडियों को फूंकी कहा जाता है। जिसे छील कर निकाला जाता है। इसका फसल चक्र जून- जुलाई और अक्टूबर- नवंबर है। साल में दो मर्तबा उत्पादन लेकर किसान अपनी सुविधा अनुसार केंद्र या सीधे व्यापारियों को बेच सकते हैं।

आसान है लाख का उत्पादन...
यह एक व्यावसायिक कीट है। इससे तुअर की फसल को कोई नुकसान नहीं होगा। इसके रखरखाव में भी कोई खर्च नहीं है। एक बार बीज से कीट बनने के बाद यह उत्पादन की प्रक्रिया आसान है। कोई अतिरिक्त मेहनत किसान को नहीं करना होगी। उत्पादन के साथ किसान को फायदा ही होगा।
डॉ. मोनी थॉमस, लाख कीट एक्सपर्ट, जवाहर लाल नेहरू कृषि विद्यालय, जबलपुर

प्रशिक्षण के साथ देंगे पूरी जानकारी
प्रायोगिक तौर पर तुअर के पौधांे पर कीट से बनने वाले लाख के लिए किसानों को इसकी जानकारी से अवगत कराया जाएगा। वहीं इच्छुक किसान को जुलाई में प्रशिक्षण के साथ बीज प्रदान किया जाएगा। उसे बेर पर लगाना है या तुअर के पौधे पर इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ अन्य जानकारी के लिए संपर्क कर सकते हंै।
वैज्ञानिक डॉ. पीपी शास्त्री, कृषि विज्ञान केंद्र, खंडवा