
Omkareshwar temple
पीयूष तिवारी
खंडवा. ओंकारेश्वर के घने जंगलों में परमारकालीन शिवमंदिर मिला है। यह मंदिर तब लोगों को दिखा जब घने जंगलों में वे घूमने के लिए गए। इस दौरान एक टीला दिखा, लेकिन जब पास आकर उन्होंने देखा तो पाया वहां एक बहुत ही पुराना मंदिर है। वह मंदिर मरम्मत के अभाव में काफी जर्जर स्थिति में है।
जब अंदर गए तो देखा शिवलिंग और कई खंडित प्रतिमाएं मिली। इसकी जानकारी वन विभाग को भी दी गई है, लेकिन घने जंगल होने के चलते मंदिर तक पहुंचना बहुत ही कठिन है। घने जंगलों में मिले मंदिर पर की गई नक्काशी, ओंकारेश्वर मंदिर की तर्ज पर है। खंभे से लेकर मंदिर के मेहराब तक ओंकारेश्वर मंदिर के खंभों पर नक्काशी की तर्ज पर तराशे गए हैं। यही नहीं मंदिर की बनावट भी महामेरू प्रसादम कला की तर्ज पर उसे तैयार किया गया है, जिसे सभी कलाओं का पितामह माना गया है।
पहुंचना नहीं है आसान
यह मंदिर बड़वाह से सिद्धवरकूट और वहां से संगम के आगे ही नर्मदा के किनारे स्थित है। उसी रास्ते में यह घने जंगलों में यह मंदिर स्थित है। मंदिर की स्थिति देखकर यह लग रहा है कि जब भी यह मंदिर रहा होगा बहुत ही भव्य होगा। क्योंकि खुला स्थान और नर्मदा का तट काफी शानदार है। अब इस मंदिर के संवारने की जरूरत है, ताकि पुरानी कला को संजोया जा सके। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एकात्म यात्रा का समापन करने आ रहे थे, लेकिन उनका दौरा निरस्त हो गया है।
डीएफओ खंडवा एसके सिंह ने बताया कि मंदिर की जानकारी वन विभाग को मिली है। प्राचीन और छोटा मंदिर है। मंदिर के आसपास साफ-सफाई और व्यवस्थाओं के लिए वन विभाग के अधिकारियों को भी पत्र लिखा जाएगा।
मंदिर के पास अवशेष
शिवलिंग, पुराना मंदिर का ढांचा, पत्थर का बना चौपड़, लाल पत्थरों पर बनाई गई नक्काशी, मंदिर का प्रवेश द्वार
पुरानी खंडित प्रतिमाएं, पुरानी बावड़ी
Published on:
09 Jan 2018 12:33 pm
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