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गुत्थी सुलझाने में मददगार बना मोबाइल, मुखबिर तंत्र फेल

जिन वारदात में नहीं मिला मोबाइल वह अनसुलझी, जिनमें मिला वह हो गईं ट्रेस

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खंडवा

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Rahul Singh

Apr 29, 2019

Hitech police

Hitech police

खंडवा. आधुनिक युग में पुलिस तो हाईटेक हो गई है। लेकिन अपने महत्वपूर्ण अंग जमीनी मुखबिर तंत्र को पीछे छोड़ दिया है। मौजूदा समय में अपराधों की गुत्थी सुलझाने में मोबाइल पुलिस का मददगार साबित हो रही है।
वहीं जिन वारदातों में मोबाइल नहीं मिलता वह सुलझाने में पुलिस को पसीने छूट रहे हैं। क्योंकि जमीनी तौर पर पुलिस का सक्रिय मुखबिर तंत्र फेल साबित हो रहा है। जिले की वारदातों में नजर दौड़ाएं तो ज्यादातर सनसनीखेज अपराधों को पुलिस ने मोबाइल लोकेशन और मोबाइल से मिली जानकारियों के आधार पर ही सुलझाया है। यही कारण है कि पुलिस लगातार सर्विलांस ट्रैकिंग सिस्टम पर निर्भर होती जा रही है। वारदात होते ही पुलिस सबसे पहले साइबर सेल को सक्रिय करती है। ताकि सर्विलांस के जरिए आसानी से अपराधियों के संबंध में साक्ष्य जुटाए जा सकें। लेकिन हाईटेक होने के बाद भी पुलिस को मुखबिरों के बगैर कुछ अपराधों को ट्रेस करना मुश्किल हो रहा है।
मोबाइल से लोकेशन ट्रेस, संदिग्धों की होती है शिनाख्त
वारदात के बाद पुलिस की तफ्तीश में सबसे पहले मोबाइल की जांच शुरू होती है। हत्या, चोरी, डक ैती सहित अन्य वारदातों में शिकार हुए व्यक्ति का मोबाइल जब्त किया जाता है। मोबाइल की जांच कर पुलिस उससे साक्ष्य जुटाती है। साथ ही आरोपियों की लोकेशन ट्रेस की जाती है। इसके अलावा संदिग्धों की लोकेशन ट्रेस कर पुलिस शिनाख्त करती है। ऐसे में कम समय में पुलिस अपराध की गुत्थी सुलझा लेती है। मगर जिन वारदातों में पुलिस को मोबाइल नहीं मिलता, उनकी गुत्थी सुलझाने में पुलिस उलझी रहती है। ऐसे कई मामले हैं तो अब तक अनसुलझे पड़े हुए हैं।


...तो 24 घंटों में महाराष्ट्र पहुंचकर दबोचे थे आरोपी
मालीकुंआ स्थित दिव्यशक्ति गैस एजेंसी में चोरों ने रात के समय चोरी की वारदात को अंजाम दिया और फरार हो गए। सुबह वारदात सामने आते ही पुलिस ने तफ्तीश शुरू की। वारदात करने से पहले आरोपी होटल में रुके थे। जहां उन्होंने मोबाइल नंबर दिया था। पुलिस ने उक्त नंबर को ट्रेस किया, जिसकी लोकेशन महाराष्ट्र में मिली। तुरंत टीम रवाना की गई। टीम लगातार मोबाइल लोकेशन को फालो करते हुए आकोला पहुंची और दबिश देकर चोरी के आरोपियों को महज 24 घंटों में गिरफ्तार कर लिया था। ऐसी अन्य कई वारदातों में पुलिस ने मोबाइल की मदद से आरोपियों को गिरफ्तार किया है।


मोबाइल नहीं तो अनसुलझी पड़ी वारदात
23 अक्टूबर 2018 को पिपलौद थाना क्षेत्र स्थित सिंगोट के पास नदी किनारे करीब 55 वर्षीय महिला का जला हुआ शव मिला था। महिला की हत्याकर केरोसिन डालकर जलाया गया था। मामले की जांच में पुलिस को न तो मौके से कोई मोबाइल मिला और न अन्य सुराग।
यहीं कारण है कि यह वारदात अब तक अनसुलझी पड़ी है। क्योंकि मोबाइल नहीं मिलने के बाद पुलिस का जमीनी मुखबिर तंत्र भी सुराग नहीं जुटा पा रहा है। ऐसे अन्य मामले भी पेडिंग पड़े हैं।


मोबाइल लोकेशन से धराए थे हत्यारे
12 फरवरी को जावर थाना क्षेत्र के ग्राम रनगांव में खेत में सो रहे श्रीपाल पिता गणपतसिंह (42) निवासी बड़ोदा अहीर की हत्या की गई थी। हत्या की सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर तफ्तीश शुरू की। जांच के दौरान कुछ संदिग्धों के नाम सामने आए। संदिग्धों की मोबाइल लोकेशन ट्रेस की गई। लोकेशन वारदात के दिन पंधाना की बजाय वारदातस्थल पर थी। इसी आधार पर पूछताछ की और आरोपियों ने गुनाह कबूला लिया था।


अपराधों को सुलझाने में मोबाइल फोन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वारदातस्थल पर मोबाइल मिलने से आरोपियों को गिरफ्तार करने में मदद मिलती है। जल्द मामला सुलझ जाता है। लेकिन जिन वारदातों में मोबाइल नहीं मिलता उन्हें सुलझाने में ज्यादा मेहनत और समय लगता है।
प्रकाश परिहार, एएसपी