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देश का पहला ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट MP में, खेतों के खरपतवार से चलेगा विमान

जिले के पुनासा के जलकुंआ में 10 एकड़ में 60 करोड़ रुपए की लगात से बनेगा एनर्जी पार्क, खेतों के वेस्ट से बनेगी सीएनजी, एनएनजी और बायो हाईड्रोजन गैस

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खंडवा

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Rajesh Patel

Mar 03, 2022

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खंडवा. सबकुछ योजना के तहत हुआ तो जल्द ही खंडवा में देश का पहला व्यवसायिक ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट लगेगा। इस प्लांट का पार्क तैयार किया जाएगा। जिसमें खेतों के वेस्ट यानी कृषि अपशिष्ट से सीएनजी, एलएनजी और बायोहाइड्रोजन गैस बनेगी। इससे वाहन चलाए जा सकेंगे। उद्यमियों ने प्लांट लगाने का ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया है। प्रदेश सरकार की सहायता से 60 करोड़ रुपए की लागत से प्लांट लगेगा।

इनवेस्टरों को हरीझंडी दे दी

प्रधानमंत्री के ग्रीन एनर्जी के उत्पादन के आह्वान पर एमएसई विभाग ने इनवेस्टरों को हरीझंडी दे दी है। जिले के पुनासा तहसील के जलकुंआ गांव में जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी हो गई है। इसके लिए 10 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की गई है। उद्यमियों ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग कार्यालय में परमिशन के लिए आवेदन दिया है। परमिशन मिलते ही काम तेजी के साथ शुरू हो जाएगा।

तीन तरह की एनर्जी का उत्पादन
उद्यमी जयेश जायसवाल का दावा है कि इस प्लांट में किसानों के खेतों के खरपतवार का उपयोग होगा। कृषि अपशिष्टों से प्रतिदिन एक टन क्रूड ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करेगा। जिसमें मीथेन, हाइड्रोजन, कार्बनडाइ आक्साइड व चारकोल अलग हो जाएगा। इस क्रूड ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग जेट विमान, राकेट, वायुयान आदि के ईंधन के रूप में किया जा सकता है।

99 फीसदी शुद्ध होगा ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन
तकनीक को ईजात करने वाले मिरजापुर (यूपी) के वैज्ञानिक डॉ. प्रीतम सिंह कहते हैं कि उत्पादित ग्रीन हाइड्रोजन 99.9 फीसद शुद्ध होगी। वैज्ञानिक सिंह बताते हैं कि उनकी निजी कंपनी वीजल ग्रीन एनर्जी की टाड (टैन टेक्नालाजी थर्मली एक्सलेटेड एनरोबिक डाइजेशन) तकनीक से स्थापित होने वाले 24 रिएक्टर के इस प्लांट पर 100 लोगों को रोजगार मिलेगा। इनके वेतन आदि का खर्च वाटोमो एनर्जी कंपनी वहन करेगी। प्लांट में तैयार होने का उत्पाद भी खरीदेगी।

प्रतिदिन सात टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन
वैज्ञानिक बताते हैं कि 15 टन कृषि अपशिष्ट (बायोमास- पराली, भूसा, सब्जियों के छिलके, पेड़-पौधों की पत्तियां, लकड़ी, पाम वेस्ट, फूल आदि) से साढ़े सात टन क्रूड हाइड्रोजन गैस तैयार की जा सकती है। साथ ही एक किग्रा बायोमास से दो यूनिट व 1000 किग्रा से दो मेगावाट बिजली उत्पन्न की जा सकती है।

नवार्ड बना रहा किसानों का एफपीओ
जिले में एफपीओ (फार्मर्स प्रोडक्शन आर्गेनाइजेशन) के लिए नवार्ड योजना तैयार किया है। डीडीएम नवार्ड रवि मोरे ने बताया कि प्रत्येक एफपीओ में 300-300 किसानों को रखा जाएगा। खंडवा, पुनासा में बनाए जा चुके हैं। खालवा व पंधाना में जल्द बना लिए जाएंगे।

वर्जन...
इंदौर के कुछ उद्यमी समूह बनाकर व्यवसायिक ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट लगाने की तैयारी में है। खंडवा के पुनासा एरिया में लगाने के लिए निजी जमीन पर लगाएंगे। प्रोजेक्ट कागजी प्रक्रिया में है।
टीआर रावत, जिला महाप्रबंधक, डीआइसी