
Are in Omkareshwar Kedardrshn
खंडवा@पत्रिका
ओंकारेश्वर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को यहां भगवान केदार के भी दर्शन होते हैं। ठंड में केदारनाथ के दरबाजे बंद कर दिए जाते हैं, इसलिए इस समय किसी को भी केदार दर्शन नहीं मिलते। लेकिन उनके स्थान पर ओंकारेश्रव में भी केदार स्थल है। यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। जब ग्रीष्मकाल शुरू होता है तो भगवान केदारनाथ को अपने धाम पूजा-अर्चना कर रवाना होते हैं।
गायत्री शक्ति पीठ के महाराज संतोष जी ने बताया कि पंचकेदार शीतकालीन गुद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ का विशेष महत्व है। कहते हैं जो श्रद्धालु यहां आते हैं, उन्हे एक साथ पांच केदारों के दर्शन प्राप्त होते हैं। इसीलिये इसे पंचकेदार गद्दीस्थल कहा जाता है। पंच केदार गददीस्थल में शीतकाल के दौरान भगवान केदार, द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर व भगवान ओंकारेश्वर विराजमान होते हैं।
ठंड में होते हैं दर्शन
नर्मदाविद् श्रीराम परिहार ने बताया कि यह बात बहुत कम लोगों को पता है कि पौराणिक कथाओं के अनुसार ऊखीमठ को उषामठ कहा जाता है, जिसे अब ऊखीमठ ही कहते हैं। यहां स्थित भगवान श्रीकृष्ण के पोते ऊषा-अनिरूद्ध का विवाह मंडप आज भी श्रद्धालुओं की आस्था व विश्वास का केन्द्र है। कथा में वर्णन है कि इस ऊखीमठ के कण-कण में देवी-देवताओं का वास है। ऊखीमठ में स्थित भगवान केदारनाथ व मद्महेश्वर के शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंन्दिर पंचकेदारेश्वर, बाराही मंदिर, भैरव मंदिर, चंडिका मंदिर सहित भोलेश्वर महादेव व कुंड चोपता मोटर मार्ग पर भारत सेवा आश्रम चैराहे बजरंग बली हनुमान के दर्शन व पूजा अर्चना का विशेष महत्व है।
Published on:
07 Jan 2017 10:55 pm
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