
किसानों के साथ खेत पर खराब फसल देखते कृषि विभाग के अधिकारी
राजेश पटेल
खंडवा. जिले में एक सितंबर से अब तक 16 इंच से अधिक बारिश हुई है। तेज बारिश में किसानों को किसानों की 790 करोड़ से ज्यादा की का नुकसान हुआ है। सबसे अधिक सोयाबीन की डेढ़ लाख क्विंटल उत्पादन प्रभावित होने का अनुमान है। बारिश के दौरान कपास और मक्का की भी फसलें बर्बाद हो गईं। फसलों का सर्वे करने सरकार के करीब एक हजार दूत फील्ड में उतरे हैं।
50-60 % नुकसान हुआ है
प्रारंभिक सर्वे की अनुमानित रिपोर्ट में सोयाबीन की एक लाख हेक्टेयर से ज्यादा फसल प्रभावित हुई है। सर्वे टीम के सत्यापन के दौरान सोयाबीन की औसत 50-60 % नुकसान हुआ है। प्रति हेक्टेयर 15 क्विंटल की दर से डेढ़ लाख क्विंटल से ज्यादा उत्पादन प्रभावित होगा।सोयाबीन की बोनी दो लाख हेक्टेयर है। कपास की 56 हजार हेक्टेयर बोनी हुई है। इसमें 40 हजार हेक्टेयर खराब हो गई है। कपास के घेटे में रुई सड़ने लगी है। किसानों ने सर्वे दल को बताया कि जो घेटे अभी खुले नहीं हैं वह भी दागी हो गए हैं। हर खेत में कपास की फसल 75-80 % नुकसान हुई है। मक्का का रकबा 36 हजार हेक्टेयर है। इसमें 20 हजार हेक्टेयर से ज्यादा फसल खेतों पर आड़ी हो गई।
ऐसे समझें 790 करोड़ नुकसानी का आंकडा
सोयाबीन का उत्पादन प्रति हेक्टेयर औसत 12-15 क्विंटल है। एक लाख हेक्टेयर में प्रति हेक्टेयर उत्पादन 15 क्विंटल हिसाब से डेढ़ लाख क्विंटल होता है। इसकी कीमत 5,000 रुपए प्रति क्विंटल की दर से 750 करोड़ रुपए होती है। नुकसानी का औसत 50-60 प्रतिशत है। नुकसानी 50 प्रतिशत राशि 375 करोड़ रुपए होती है। इसी तरह कपास और मक्का को मिलाकर औसत नुकसानी 790 करोड़ रुपए होती है।
खेत पर किसानों की मौजूदगी में सत्यापन
फसलों के सर्वे में 419 गांवों में पंचायत सचिव, कोटवार के साथ ही राजस्व निरीक्षक और कृषि ग्रामीण विस्तार अधिकारी और उद्यानिकी कृषि विस्तार अधिकारियों की संयुक्त टीम खेत पर पहुंची। किसानों की मौजूदगी में गांव-गांव खेतों पर सत्यापन किया जा रहा है। इसके अलावा जिला, ब्लाक और तहसील स्तर के अधिकारी भी फील्ड पर पहुंचे। ग्राम अटूट खास में कपास की फसल का सत्यापन करके दौरान किसानों ने फसल के घेटे तोड़कर दिखाए। सत्यापन के लिए कृषि उप संचालक केसी वास्कले भी कई ग्रामों में सर्वे दल के साथ खेत पर पहुंचे। इसी तरह एसडीएम, तहसीलदार भी खेत सर्वे दल के साथ निरीक्षण में पहुंचे। अब तक करीब पंद्रह हजार हेक्टेयर रकबा का सर्वे पूर्ण हो चुका है।
पंचायत भवन में दस्तावेज जमा करा रहा दलसर्वे दल के कर्मचारी खेत पर प्रभावित खातेदार व बटाईदार का नाम, निर्धारित रकबा, सर्वे नंबर, सर्वे का रकबा, क्षतिग्रस्त रकबा, क्षतिग्रस्त का प्रतिशत, फसल का नाम, नुकसानी का कारण आदि बिंदुओं की जानकारी के साथ पासबुक, मोबाइल नंबर और आधार नंबर की छायाप्रति ले रहे हैं।
फैक्ट फाइल
फसल बोनी रकबा ( हेक्टे ) नुकसानी रकबा ( हेक्टे) नुकसानी की औसत कीमत
सोयाबीन 2,00,000 1,0800 350 करोड़
कपास 56,000 40, 000 300 करोड़
मक्का 37, 000 20, 000 140 करोड़
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नोट : आंकड़े जिला प्रशासन के पास पहुंची प्रारंभिक अनुमानित रिपोर्ट के आधार पर, फाइनल सर्वे होने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी। फसलों के औसत नुकसानी के आधार पर बाजार मूल्य से नुकसान की कीमत निकाली गई है।
वर्जन..
फसलों के सर्वे के लिए गांव-गांव में सर्वे दल भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। पटवारी हड़ताल पर हैं। तहसीलदार से रिपोर्ट मांगी गई है। सर्वे के कार्य में राजस्व निरीक्षक, कृषि के साथ पंचायत सचिव सहयोग में लगाए गए हैं। जल्द ही सर्वे का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।
केआर बड़ोले, अपर कलेक्टर
Published on:
27 Sept 2023 01:22 pm

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