
PM Narendra Modi,khandwa latest news,Khandwa The girls of the village tweeted to the Prime Minister
खंडवा. डिजिटल होते इंडिया में जब खंडवा जैसे जिले में सिर्फ इसलिए इंटरनेट सेवाएं बाधित की जाती हैं, क्योंकि वायरल होती सूचनाओं से सांप्रदायिक सौहाद्र्र बिगडऩे का डर होता है। एेसे में ये कुछ सच्ची कहानियां हैं, जिन्हें पढ़कर ये सीखा जा सकता है कि इंटरनेट का सही उपयोग कैसे किया जाना है और इससे जीवन में कितने सकारात्मक बदलाव लाए जा सकते हैं।
कैसे नीलोफर बी का एक कदम प्रेरणा बन जाता है तो वहीं बीमारी से त्रस्त संगीता के जीवन में नया विश्वास आता है। मानसिक रूप से कमजोर माने जाने वाले शख्स ने कम्प्यूटर पर अपना व गांव का नाम टाइप करना सीखकर दूसरों के लिए मिसाल पेश की है और लड़कियों ने मोबाइल के फ्लैश लाइट में भी सीखने का जुनून दिखाया और अब ट्विटर अकाउंट हैंडल करती हैं।
झिझक टूटी, नीलोफर ने बढ़ाए कदम
जिले का गोराडि़या गांव। प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (पीएमजी दिशा) के तहत जब रोहित सिंह और एकांश सोनी, यहां के लोगों को डिजिटल साक्षरता देने पहुंचे तो पहले नेट कनेक्टिविटी, कमरे की अनुपलब्धता जैसे समस्याएं आईं। फिर पढऩे में रूचि लेने वालों की तादाद कम होने से जूझना पड़ा। कुछ लड़कियां आने लगी। फिर एक दिन करीब ४५ साल की नीलोफर बी खुद कॉपी लेकर पढऩे आ गई। इसके बाद इनके मोहल्ले की करीब २० लड़कियों ने कदम बढ़ाए। कम्प्यूटर क्या, जरूरत क्यों?, ऑपरेटिंग सिस्टम, सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर, ई-मेल के बारे में सीख चुकीं हैं।
परेशानी आई तो हुई निराश, अब जागा विश्वास
गांव आरूद। नाम संगीता बराड़े। ये दिव्यांग हैं। गेस्ट फेकल्टी के रूप में स्कूल में संस्कृत पढ़ाया। फिर लंग्स में प्रॉब्लम हुई तो इलाज कराया। उम्मीद के मुताबिक फायदा नहीं मिला। निराशा हुई। फिर डिजिटल साक्षरता की ओर कदम बढ़ाए। एक पैर नकली होने के बावजूद एवरेस्ट फतह करने वाली विश्व की पहली महिला पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा के वीडियो देखे। फिर से विश्वास जागा है। कहती हैं- कुछ कर दिखाऊंगी। दिव्यांग शांतिलाल पटेल भी डिजिटल साक्षरता प्राप्त कर रहे हैं।
ट्वीट कर पीएम को कहती हैं थैंक्स
मुस्कान खान, मंजूला राठौर, उर्वशी, हरदेवी बुंदेकर, अंजलि बछानिया, अंबिका चौहान। जी हां, ये वो लड़कियां हैं जो कम्प्यूटर नहीं जानती थी। लेकिन इन्होंने सांसद के गोद लिए गांव आरूद में बिजली की आंखमिचौनी के बीच मोबाइल की फ्लैश लाइट में भी लैपटॉप से पढऩे की उत्सुकता दिखाई। अब इनके ट्विटर अकाउंट हैं और ये केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और पीएम नरेंद्र मोदी तक को ट्वीट करती हैं।
पहले मानते थे कमजोर, अब देखते रह जाते हैं
इनसे मिलिए, ये है महेश नागदे। आरूद के ग्रामीण इन्हें पहले मानसिक रूप से कमजोर मानते थे लेकिन इन्होंने सीखने की इच्छा जताई। अब टाइप करके कम्प्यूटर पर अपना व गांव का नाम लिख लेते हैं। की-बोर्ड पर अंगुलिया चलाते हैं तो लोग इन्हें देखते रह जाते हैं।
Published on:
05 Oct 2017 05:02 pm
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