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ओंकारेश्वर बांध का पानी पांच गांवों में घुसा, हालात एेसे कि नाव से स्कूल का सफर

मध्यप्रदेश के खंडवा में इंदिरा सागर बांध से पानी छोड़ा जाना शुरू हो गया है। जिससे जलस्तर में बढ़ गया है। एेसे में ५०० परिवारों के सामने संकट खड़ा है।

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khandwa latest new, water of Omkareshwar dam entered in villages,

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खंडवा. सरदार सरोवर बांध को भरने में मिली सफलता के बाद एनएचडीसी और राज्य सरकार ने ओंकारेश्वर बांध का लेबल बढ़ाने की तैयारी कर ली है। इसके लिए इंदौर में एनएचडीसी की जीएम रेणुपंथ ने महत्वपूर्ण बैठक ली। इसके बाद शनिवार शाम से ही बांध का लेबल बढऩा शुरू हो गया है। इससे गांव टापू बनने लगे हैं।
जानकारी मुताबिक इंदिरा सागर बांध की टरबाइन चलाकर एक-दो दिन में ओंकारेश्वर बांध में पानी भरा जाएगा। इससे बांध में पानी का लेबल १९१ से बढ़कर १९३ मीटर तक पहुंच जाएगा। बता दें कि दो साल पहले भी एनएचडीसी ने अचानक इंदिरा सागर से पानी छोड़कर १८९ से १९१ मीटर कर दिया था। हालांकि दो मीटर लेबल लेकर को बढ़ाने के बाद जमकर विरोध हुआ था। करीब २२ दिन तक जल सत्याग्रह किया गया। विस्थापन में करीब एक हजार से अधिक लोगों को मानक के अनुसार कम मुआवजा दिया गया। इसे लेकर नर्मदा बचाओ आंदोलन के बैनर तले विरोध-प्रदर्शन और जल सत्याग्रह किया गया, लेकिन प्रशासन पर कोई असर नहीं होने पर डूब प्रभावितों ने कलेक्टोरेट तक पर कब्जा कर लिया था। बाद भी जब कुछ नहीं हुआ तो ७०० लोगों ने अपनी मुआवजा राशि वापस लौटा दी थी, जो करोड़ों रुपए है। बाद में नया पैकेज लागू किया गया तो ३०० लोगों ने इसे स्वीकार कर लिया। जबकि ४०० लोगों ने अपना मुआवजा लेने से इनकार कर दिया।

डूब जाएगी पांच गांव की जमीन
ओंकारेश्वर बांध का वाटर लेबल दो मीटर बढऩे से कामनखेड़ा, घोगलगांव, एखंड, टौंकी और केलवां पांच गांव डूब जाएंगे। इन गांवों के ५०० परिवार आज तक विस्थापित नहीं हुए हैं। बांध बनने के १२ साल बाद भी ये अपनी जगह से हटाए नहीं गए हैं। जबकि एनएचडीसी के अनुसार सभी गांव विस्थापित हो चुके हैं। सभी लोगों को मुआवजा भी दिया जा चुका है। इधर, ग्रामीण प्रवीण भारती, जाधव पटेल, बाबूलाल खंडेलवाल, रुद्रम पुरी, राम गिर, महेश पटेल, कोमल दवारे, अनिल दवारे, गोपालपुरी, चंदाबाई, सागरबाई ने प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है कि बांध के बढ़ते जल स्तर को रोका जाए। अन्यथा हमें फिर से आंदोलन की राह पर जाना पड़ेगा।
इंतजाम करेंगे
ओंकारेश्वर बांध के विस्थापितों के पास कोई लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति नहीं बनेगी। इसलिए चिंता की कोई बात नहीं है। यदि एेसी स्थिति बनेगी तो उससे निपटने का पूरा इंतजाम किया जाएगा।
अभिषेक सिंह, कलेक्टर