
MANREGA
खंडवा. मनरेगा में रेशम कीट के लिए पौधे लगाने वाले आदिवासी मजदूर, किसान चार साल से भुगतान राशि के लिए भटक रहे हैं। सोमवार को करीब ढाई सौ किसान, मजदूरों ने बोरिया बिस्तर लेकर जिला पंचायत में डेरा डाल दिया। राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के बैनर तले किसान अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए। किसानों का कहना था कि जब तक राशि नहीं मिल जाती या लिखित में आश्वासन नहीं मिल जाता तब तक जिला पंचायत परिसर में ही रहेंगे। जिपं सीईओ ने कहा धारा 144 लगी है, गिरफ्तार हो जाओंगे तो भी किसान नहीं माने।
सोमवार दोपहर 12 बजे से खालवा और हरसूद से आए किसान, मजदूर जिला पंचायत पहुंचे। वहीं राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के पदाधिकारी चर्चा के लिए कलेक्टोरेट पहुंचे। यहां जिपं सीईओ से लंबी चर्चा के बाद भी मामले का कोई हल नहीं निकला। अधिकारियों का कहना था कि हमने फाइल भोपाल भेज दी है। दो दिन का समय दिया जाए, तब तक धरना प्रदर्शन स्थगित कर दिया जाए। वहीं, महासंघ पदाधिकारियों का कहना था कि 17 दिन पहले भी आपने आश्वासन दिया था। अब तक निराकरण नहीं हुआ है। हम दो दिन तक जिला पंचायत परिसर में ही रुके रहेंगे। दो दिन में निराकरण निकला तो ठीक, नहीं तो धरना-प्रदर्शन चालू रहेगा।
जिला पंचायत सीईओ डीके नागेंन्द्र ने बताया कि फाइल भोपाल मनरेगा आयुक्त को भेज दी गई है। मामला भोपाल में अटका है। किसानों को समझाइश दी, लेकिन वो नहीं मान रहे। रात में उन्हें समझाने गए थे। भोपाल जानकारी दी गई है, एक दो दिन में समस्या का निराकरण करेंगे।
अधिकारियों ने उखड़वा दिए थे पौधे
महासंघ के सौरभ कुशवाह, विशाल शुक्ला ने बताया कि चार साल पहले मनरेगा में किसानों ने रेशम उत्पादन के लिए शहतुश के पौधे लगाए थे। रेशम अधिकारी द्वारा बाद में ये पौधे उखड़ा दिए गए थे। पौधे और मजदूरी के रुपए आज तक नहीं दिए गए। इस मामले में मनरेगा आयुक्त तक जांच करा चुके है। पूरी गलती रेशम विभाग की है, लेकिन परेशान किसानों को होना पड़ रहा है। कुल 281 किसानों का करीब 2 करोड़ 36 लाख रुपया बकाया है। बार-बार आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिल रहा है। इसलिए हम पूरी तैयारी से आए हैं। दोनों समय का खाना भी जिपं परिसर में बनाकर खाएंगे और रात में परिसर में ही सो जाएंगे।
Updated on:
03 Jul 2018 01:45 am
Published on:
03 Jul 2018 06:00 am
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