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पति-पत्नी को मिलाया, दुघर्टना क्लेम दिलाया और राजस्व जमा कराया

नेशनल लोक अदालत में 469 मामलों का निराकरण, 746 पक्षकार लाभांवित हुए

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Mixed husband and wife, got accident claim and deposited revenue

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खंडवा. मप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर शनिवार को नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। प्रधान जिला न्यायाधीश संजीव एस कालगांवकर के मार्गदर्शन व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण खंडवा के सचिव सूरज सिंह राठौर के निर्देशन में यह आयोजन हुआ। जिसमें जिला विधिक सहायता अधिकारी अनुपमा मुजाल्दे ने समन्वय किया। जिले के न्यायालयों में लंबित 243 प्रकरण एवं 226 प्रीलिटिगेशन प्रकरणों का नेशनल लोक अदालत के माध्यम से समाधान कर निराकरण किया गया।
यहां मिलता है त्वरित न्याय
जिला न्यायालय खंडवा में सुबह साढ़े 10 बजे प्राधिकरण अध्यक्ष कालगांवकर ने दीप प्रज्जवलन कर नेशनल लोक अदालत का शुभांरभ किया। उन्होंने कहा कि लोक अदालत का सबसे बड़ा गुण निःशुल्क तथा त्वरित न्याय है। यह विवादों के निपटारे का वैकल्पिक माध्यम भी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश का कोई भी नागरिक आर्थिक या किसी अन्य अक्षमता के कारण न्याय पाने से वंचित न रह जाए।
इनकी रही मौजूदगी
इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय देवनारायण शुक्ल, जिला अभिभाषक संघ के अध्यक्ष रविन्द्र पाथरीकर, विशेष न्यायाधीश पीसी आर्य, प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश सुधीर कुमार चौधरी, तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश प्राची पटेल, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राकेश पाटीदार, श्रम न्यायाधिकारी दीपक अग्रवाल, रेल्वे मजिस्ट्रेट विष्णु प्रसाद सोलंकी, जिला रजिस्ट्रार विपेन्द्र सिंह यादव, न्यायिक मजिस्ट्रेट निधि जैन, राहुल सोनी, अभिषेक सोनी, जगत प्रताप अटल, मोहन डावर, मनीष रघुवंशी, जिला अभिभाषक संघ सचिव राकेश थापक, अधिवक्ता, बैंक, न्यायालयीन कर्मचारी, खंडपीठ सदस्य, पैरालीगल वालंटियर्स, विभिन्न विभागों के अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं पक्षकारों उपस्थित रहे।
पक्षकारों को दिए न्याय वृक्ष
नेशनल लोक अदालत के माध्यम से प्रकरण का निराकरण होने के बाद पक्षकारों को वन विभाग के समन्वय से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने स्मृति स्वरूप न्याय वृक्ष के रूप में पौधे प्रदान किए।
इतने प्रकरण हुए निराकृत
नेशनल लोक अदालत के लिए खंडवा मुख्यालय में 14 खंडपीठ, तहसील न्यायालय हरसूद में 3 खंडपीठ, तहसील न्यायालय पुनासा में 2 खंडपीठ का गठन किया गया। जिसमें कुटुम्ब न्यायालय में कुल 29 वैवाहिक संबंधित मामलों में समझौता के आधार पर निराकरण हुआ। जिला विधिक सहायता अधिकारी अनुपमा मुजाल्दे ने जानकारी दी कि शनिवार को आयोजित नेशनल लोक अदालत में कुल 19 न्यायिक खंडपीठ ने न्यायालयों में लंबित 243 प्रकरणों का राजीनामा के माध्यम से और 226 प्रीलिटगेशन प्रकरणों का निराकरण किया। एनएचडीसी के कुल 10 प्रकरणों में राजीनामा हुआ। प्रीलिटिगेशन प्रकरणों में बैकों के 31 प्रकरण में रुकी हुई वसूली के रूप में 20 लाख 84 हजार 500 रुपए की वसूली हुई। इसी प्रकार से मोटर दुघर्टना दावा के 7 क्लेम प्रकरणों का निराकरण होकर 46 लाख 30 हजार रुपऐ के अवार्ड पारित हुए। विद्युत विभाग के न्यायालयों में लंबित 27 प्रकरण का निराकरण तथा 426983 रुपए एवं 21 प्रीलिटिगेशन प्रकरणों में 514000 रुपए की वसूली हुई। 469 मामलों का समझौता आधार पर निराकरण होकर कुल 746 पक्षकार लाभांवित हुए।
पति-पत्नी ने थामा हाथ
कुटुंब न्यायालय में एक प्रकरण ऐसा चल रहा था जिसमें पति-पत्नी अलग रह रहे थे और दोनों की चाहत साथ रहने की थी। पत्नी चाह रही थी कि पति उसे परिवार से अलग रखे। इनके दो बच्चे भी हैं जो माता-पिता के झगड़े की बाट जोह रहे थे। न्यायालय ने दोनों पक्षों को समझाया तो पति अलग रहने को राजी हो गया। इसके बाद दोनों एक दूसरे के साथ रवाना हो गए।
तीन बेटी होने पर पति ने छोड़ा
मूंदी की रहने वाली पूजा अपनी मां ममता के साथ अदालत में पहुंची थी। पूजा ने बताया कि उसकी शादी इटारसी के संतोष यादव से 12 साल पहले हुई थी। उसे तीन बेटियां हुईं। इनमें एक की मौत हो चुकी है। बेटी होने पर पति ने छोड़ दिया। चार साल से वह दो बेटियों के साथ अपनी विधवा मां के पास रहने को मजबूर है। न्यायालय से नोटिस जाने पर संतोष पेशी में नहीं आता है।
पत्नी का इंतजार करता रहा युवक
पावर प्लांट में प्राइवेट नौकरी करने वाला राहुल मालवीय भी कुटुंब न्यायालय पहुंचा था। उसका कहना है कि वर्ष 2020 में शादी के कुछ महीने बाद पत्नी छोड़कर चली गई। दोनों के बीच अनबन होने से उसने मायके से आने से मना कर दिया। भरण पोष के लिए केस लगाया तो अदालत से आदेश हो गया। अब राहुल ने पत्नी को वापस लाने फरियाद की है।

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