खंडवा.
स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर प्रदेश सरकार ने 108 एंबुलेंस तो लगा दी, लेकिन इसका लाभ पूरी तरह से नहीं मिल पा रहा है। शुक्रवार को तो लापरवाही की हद हो गई, जब एक प्रसूता को नवजात बच्चे के साथ आठ घंटे से ज्यादा एंबुलेंस के इंतजार में बैठना पड़ा। पति दिनभर फोन लगाता रहा, दूसरी ओर से जवाब मिलता रहा कि वाहन उपलब्ध नहीं है। रात 8.30 बजे एंबुलेंस आई तो चालक ने गांव जाने से मना कर दिया। सीएमएचओ के हस्तक्षेप के बाद रात को प्रसूता और नवजात अपने घर पहुंचे।
सिंगोट सर्कल के पिपलोद खास निवासी निकिता पति अमित मोखले को परिजन 28 फरवरी को डिलीवरी के लिए खंडवा जिला अस्पताल लाए थे। उसी दिन शाम को निकिता की डिलीवरी हुई और नवजात को जन्म दिया। शुक्रवार दोपहर 12.10 बजे डॉक्टर ने निकिता को अस्पताल से छुट्टी दे दी। पति अमित ने दोपहर 12.30 से एंबुलेंस 108 को फोन लगाना शुरू किया। पहले तो जवाब मिलता रहा कि कुछ देर में एंबुलेंस आ रही है। इसके बाद फिर जवाब मिलने लगा कि अभी वाहन उपलब्ध नहीं है। दिनभर में अमित ने करीब 15 बार 108 पर फोन किया, लेकिन रात 8 बजे तक भी उसे एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पाई। इसकी शिकायत सीएमएचओ से की गई तो एक एंबुलेंस रात 8.30 बजे वहां पहुंची।
चालक ने गांव जाने से कर दिया मना
निकिता के डिस्चार्ज टिकट पर एड्रेस में ब्लॉक पिपलोद लिखा हुआ था। परिजन ने पिपलोद के पास कोहदड़ गांव, निकिता के मायके का पता वाहन चालक को बताया। वाहन चालक ने बताए पते पर जाने से मना कर दिया। वाहन चालक का कहना था कि डिस्चार्ज टिकट में जो पता है, वहीं ले जाकर छोड़ेगा। जबकि कोहदड़ गांव पिपलोद खास से 10-12 किमी दूरी पर ही है। यहां परिजन करीब 25 मिनट तक वाहन चालक से गुहार लगाते रहे। पत्रिका को इसकी जानकारी मिली तो सीएमएचओ से संपर्क कर वाहन चालक से कहकर उसे कोहदड़ के लिए भिजवाया गया।
चार घंटे गैलरी में बैठी रहीं प्रसूता और नवजात
निकिता की छुट्टी दोपहर 12.10 बजे हो गई थी। एंबुलेंस के इंतजार में पहले तो परिजन प्रसूता और नवजात के साथ वार्ड में ही रहे। शाम 4 बजे अन्य प्रसूता के आने पर पलंग खाली करना पड़ा। इसके बाद परिजन प्रसूता और नवजात को लेकर गैलरी में बैठे रहे। रात में एंबुलेंस आने की सूचना पर ए-ब्लॉक की चौथी मंजिल से नीचे लाने के लिए व्हील चेयर भी नहीं मिली। परिजन खुद ही व्हील चेयर अस्पताल के अन्य वार्ड से ढूंढकर लाए और नीचे लेकर पहुंचे।
पूर्व में भी आ चुके लापरवाही के मामले
एंबुलेंस 108 के समय पर आने या नहीं आने की ये पहली घटना नहीं है। इसके पूर्व भी कई बार ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। खालवा और पंधाना ब्लॉक में तो एंबुलेंस के नहीं पहुंचने पर मरीज की मौत का मामला भी सामने आया है। एंबुलेंस को लेकर सीएम हेल्प लाइन में होने वाली शिकायतों का निराकरण का जिम्मा भी सीएमचओ को सौंप दिया जाता है। जबकि एंबुलेंस 108 पर सीएमएचओ का कोई होल्ड ही नहीं है। इसका संचालन सीधे सेंट्रल कंट्रोल रूम से होता है।
भोपाल भेजेंगे शिकायत
108 एंबुलेंस निजी कंपनी द्वारा संचालित की जा रही है। हमारे निर्देशों को भी ये नहीं मानते। इस मामले की शिकायत भोपाल में की जाएगी।
डॉ. शरद हरणे, सीएमएचओ